PoK protest : PoK यानी पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में पिछले 4 दिनों से बवाल मचा है। पीपुल्स एक्शन कमेटी पर प्रतिबंध के बाद हजारों लोग सड़कों पर उतर आए हैं। लोगों के विरोध को दबाने के लिए पाकिस्तान सरकार ने पूरा जोर लगा दिया है। हिंसक झड़प में कई पुलिसकर्मियों और आम नागरिकों की मौत हो चुकि है। वहीं करीब 70 लोग घायल बताए जा रहे हैं। सरकार ने PoK के इस आंदोलन को विभाजनकारी बताया है, जबकि पीपुल्स एक्शन कमेटी का कहना है कि उनकी मांगें जायज और वाजिब हैं। सवाल है कि आखिर ऐसी क्या मांगें हैं, जिनके चलते PoK एक बार फिर सुलग रहा है>
2025 के प्रदर्शन से जुड़ा है मामला
दरअसल, सितंबर 2025 में पीपुल्स एक्शन कमेटी ने अपनी कई मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन किया था। यह प्रदर्शन करीब एक हफ्ते तक चला। कमेटी की प्रमुख मांग पीओके विधानसभा में परिसीमन के तहत प्रवासी कश्मीरियों के लिए आरक्षित 12 सीटों को समाप्त करने की थी। उस समय सरकार और पीपुल्स एक्शन कमेटी के बीच एक समझौता हुआ था, जिसमें इस मुद्दे का समाधान खोजने पर सहमति बनी थी। हालांकि, अगले 9 महीनों तक सरकार ने इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया। अब पीओके में चुनावों की घोषणा हो चुकी है।
पाक सरकार ने पीपुल्स एक्शन कमेटी पर बैन लगाया
चुनावों की घोषणा होते ही पीपुल्स एक्शन कमेटी के सदस्य सरकार के विरोध में उतर आए। कमेटी ने 9 जून को पूरे पीओके में विरोध-प्रदर्शन आयोजित करने की तैयारी कर ली थी, लेकिन उससे पहले ही पाकिस्तान सरकार ने कमेटी पर प्रतिबंध लगा दिया। कमेटी के ज्यादातर सदस्यों पर भी आतंक कानून के तहत प्रतिबंध लगाया गया है। पाकिस्तानी सरकार की कोशिश विरोध-प्रदर्शन को पूरी तरह से खत्म करने की है। ताकि, उसके खिलाफ एंटी इनकंबेंसी का माहौल न बन सके।
फायरिंग में अब तक 30 लोगों की मौत
पीपुल्स एक्शन कमेटी का कहना है कि जब तक 12 पद के आरक्षण को समाप्त नहीं किया जाता है, तब-तक विरोध प्रदर्शन जारी रहेंगे। सरकार के खिलाफ अहिंसक तरीके से विरोध प्रदर्शन होता रहेगा। अलग-अलग सरकारी आंकड़ों के मुताबिक पाकिस्तानी सेना की फायरिंग में अब तक 30 लोगों की मौत हो चुकी है और 200 से ज्यादा लोग घायल हो चुके हैं। हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि मौत का यह आंकड़ा सैकड़ों के पार जा चुका है। पीओजेके पूरी तरह ठप पड़ा हुआ है।
पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराए दुनिया-भारत
वहीं, इस मामले को लेकर जब विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इन घटनाओं पर ध्यान देना चाहिए और पाकिस्तान को उसके कथित कुकर्मों और दुर्व्यवहार के लिए जवाबदेह ठहराना चाहिए। रि.लेफ्टिनेंट जनरल कंवल जीत सिंह ढिल्लों का भी कहना है कि भारत को इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीयमंचों पर उठाना चाहिए ताकि पाकिस्तान का असली चेहरा दुनिया देख ले। वहीं, पीओजेके में जारी हिंसा को लेकर जम्मू कश्मीर के पूर्व डीजीपी एसपी वैद्द ने भी पाकिस्तान पर निशाना साधा है।
27 जुलाई को PoK में होने हैं चुनाव
बता दें PoK में आने वाली 27 जुलाई को विधानसभा चुनाव होने हैं। यहां कुल 53 सीटें हैं, जिनमें 45 पर सीधे चुनाव होते हैं। ऐसे समय में यह विवाद राजनीतिक रूप से भी काफी अहम माना जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में PoK की राजनीति में कई बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। इमरान खान की पार्टी PTI की सरकार बनने से लेकर कई प्रधानमंत्रियों के बदलने तक राजनीतिक अस्थिरता बनी रही। चुनाव से पहले भड़की यह हिंसा आने वाले दिनों में PoK की राजनीति को और ज्यादा प्रभावित कर सकती है।
