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Taiwan में क्यों बार-बार दखल देता है China 'ड्रैगन' की मंशा में रोड़े अटकाता अमेरिका !

China Interfere in Taiwan: चीन ताइवान को अपने एक प्रांत के रूप में मानता है और ताइवान को चीन में शामिल होने के लिए दबाव डालता है वहीं ताइवान खुद को एक स्वतंत्र और संप्रभु राज्य के रूप में मानता है।

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ताइवान में क्यों बार-बार दखल देता है चीन (फाइल फोटो)

China Taiwan Tension: चीन-ताइवान विवाद काफी लंबी अवधि का संघर्ष है, जो दो देशों के बीच राजनयिक और क्षेत्रीय दावे के कारण उत्पन्न हुआ है, बता दें कि चीन ताइवान को अपने प्रांत के रूप में देखता है, वहीं ताइवान खुद को एक स्वतंत्र संप्रभु राष्ट्र मानता है पर चीन ताइवान पर अपना दावा जताता है और उसे अपने एक प्रांत के रूप में मानता है।

यही नहीं वह ताइवान को चीन के एकीकरण में शामिल करने के लिए बल का उपयोग भी करने में पीछे नहीं रहता गौर हो कि हाल के सालों में चीन ने ताइवान के चारों ओर सैन्य अभ्यासों को बढ़ाया है, जिससे तनाव बढ़ गया है।

ताइवान चीन के साथ एकीकरण का विरोध करता रहा है

चीन का मानना है कि ताइवान को अंततः चीन में शामिल होना चाहिए वो ताइवान को एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता देने से इनकार करता है।

वहीं ताइवान चीन के साथ एकीकरण का विरोध करता है।

ताइवान को एक अलग देश के रूप में मान्यता नहीं दी

चीन ताइवान मसले के दुनिया में असर की बात करें तो कई देशों ने ताइवान को एक अलग देश के रूप में मान्यता नहीं दी है, लेकिन कई देशों ने ताइवान को व्यावहारिक रूप से एक संप्रभु राष्ट्र के रूप में मान्यता दी है।

चीन की सैन्य ताकत ताइवान से काफी अधिक

ताइवान के चारों ओर चीन के सैन्य अभ्यासों ने तनाव को बढ़ा दिया है और संभावित युद्ध की स्थिति पैदा कर दी है वहीं हाल ही में ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने द्वीप के आसपास कई विमानों और नौसैनिक जहाजों के संचालन के साथ चीनी सैन्य गतिविधि में वृद्धि की सूचना दी। कुछ विमानों ने ताइवान के ADIZ में प्रवेश किया, जिसके कारण ताइवानी बलों की ओर से निगरानी और प्रतिक्रियाएं की गईं। वैसे चीन की सैन्य ताकत ताइवान से काफी अधिक है, जिससे एक संभावित संघर्ष में ताइवान के लिए तमाम दिक्कतें पैदा हो सकती हैं।

चीन इसे अपना विद्रोही राज्य मानता है

चीन इसे अपना विद्रोही राज्य मानता है। एक ओर जहां ताइवान स्वयं को स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र मानता है, वहीं चीन का मानना है कि ताइवान को चीन में शामिल होना चाहिए और फिर इसके लिए चाहे बल प्रयोग ही क्यों न करना पड़े।

अमेरिका ने कहा- 'ताइवान अकेला नहीं'

अमेरिका ने अपने एशियाई सहयोगी देशों को आगाह किया है कि वे अपना रक्षा खर्च बढ़ाएं और अपनी सेनाओं को मजबूत करें।अमेरिका के रक्षा मंत्री ने हाल ही में कहा, अमेरिका अपने सहयोगियों को चीन के सैन्य और आर्थिक दबाव के आगे अकेला नहीं छोड़ेगा, मुकाबले में वह सहयोगी देशों के साथ खड़ा होगा। प्रतिक्रिया में चीन ने इसे उकसावे वाला वक्तव्य बताया है और कहा कि वास्तव में अमेरिका क्षेत्र में शांति और स्थिरता के लिए सबसे बड़ी समस्या है।

इतिहास है बेहद पुराना

चीन में वर्ष 1644 में चिंग वंश सत्ता में आया और उसने चीन का एकीकरण किया। वर्ष 1895 में चिंग ने ताइवान द्वीप को जापानी साम्राज्य को सौंप दिया। 1911 में चिन्हाय क्रांति हुई जिसमें चिंग वंश को सत्ता से हटना पड़ा। इसके बाद चीन में कॉमिंगतांग की सरकार बनी। जितने भी इलाके चिंग रावंश के अधीन थे, वे कॉमिंगतांग सरकार को मिल गए। कॉमिंगतांग सरकार के दौरान चीन का आधिकारिक नाम 'रिपब्लिक ऑफ चाइना' कर दिया गया था।

वर्ष 1683 से 1895 तक मुख्यभूमि चीन पर ताइवान का शासन था। वर्ष 1895 में, जापान ने प्रथम चीन-जापान युद्ध जीता। युद्ध के बाद ताइवान जापान के नियंत्रण में आ गया। द्वितीय विश्वयुद्ध में जापान की पराजय के बाद पाट्सडैम (1945), काहिरा (1946) की घोषणाओं के अनुसार ताइवान पर राष्ट्रवादी कॉमिंगतांग पार्टी का अधिकार फिर से मान लिया गया।

Taiwan की गिनती एशिया के बड़े कारोबारी देश के तौर पर

ऐसा नहीं है कि ताइवान विश्व समुदाय से पूरी तरह कट गया है और उपेक्षित हो गया है। कूटनीतिक तौर पर अकेला पड़ जाने के बावजूद ताइवान की गिनती एशिया के बड़े कारोबारी देश के तौर पर होती है। यह कंप्यूटर टेक्नॉलजी के उत्पादन के मामले में दुनिया का अग्रणी देश है और इसकी अर्थव्यवस्था भी बहुत मजबूत है।

Ravi Vaish
रवि वैश्यauthor

रवि वैश्य टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क पर कार्यरत एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें पत्रकारिता में 20 वर्षों का व्यापक अनुभव हासिल है। खबरों की बारीकियों को समझने और तेजी से प्रस्तुत करने में उनकी विशेष दक्षता है। टीवी पत्रकारिता में रिपोर्टिंग और डेस्क—दोनों क्षेत्रों में अनुभव होने के कारण वे समाचारों को बहुआयामी दृष्टिकोण से देखते हैं। देश–दुनिया की ताजातरीन अपडेट्स, ब्रेकिंग न्यूज, एक्सप्लेनर और विशेष स्टोरीज तैयार करने में वे सिद्धहस्त हैं। उनकी प्राथमिकता हमेशा यही रही है कि हर खबर तेज, सटीक और जानकारीपूर्ण रूप में पाठकों तक पहुंचे। रवि वैश्य अब तक 22,000 से अधिक खबरें लिख चुके हैं, जिनमें कई एक्सक्लूसिव रिपोर्ट्स, इंटरव्यू, ग्राउंड रिपोर्ट्स, विश्लेषण और एक्सप्लेनर शामिल हैं।

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