Who is Francesca Orsini: सीनियर सरकारी अधिकारियों ने बताया कि हिंदी की जानी-मानी स्कॉलर और स्कूल ऑफ ओरिएंटल एंड अफ्रीकन स्टडीज (SOAS), यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन में एमेरिटा प्रोफेसर फ्रांसेस्का ओरसिनी को सोमवार देर रात देश में आने से रोक दिया गया और दिल्ली एयरपोर्ट से वापस भेज दिया गया।
जानी मानी स्कॉलर और स्कूल ऑफ ओरिएंटल एंड अफ्रीकन स्टडीज (SOAS), यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन में एमेरिटा प्रोफेसर फ्रांसेस्का ओरसिनी को भारत में एंट्री नहीं दी गई। सीनियर सरकारी अधिकारियों ने बताया कि हिंदी स्कॉलर ओरसिनी को सोमवार देर रात देश में आने से रोक दिया गया, जहां उन्हें बाद में दिल्ली एयरपोर्ट से वापस भेज दिया गया।
आखिर क्या था एंट्री ना देने का कारण?
होम मिनिस्ट्री के एक अधिकारी ने दावा किया कि उनकी (ओरसिनी) पिछली यात्राओं के दौरान 'वीजा शर्तों का उल्लंघन' उन्हें देश में एंट्री से मना करने का आधार बना। जबकि ओरसिनी लंदन वापस जा रही थीं तो मामले पर कमेंट नहीं कर सकीं। लेकिन द वायर ने पहले उनके हवाले से कहा था कि उन्हें दिल्ली एयरपोर्ट पर रोकने का कोई कारण नहीं बताया गया। उन्होंने कहा, 'मुझे डिपोर्ट किया जा रहा है। मुझे बस इतना ही पता है।'
पति बोले- हांगकांग भेजा गया...
वहीं, कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में जापानी भाषा के एमेरिटस प्रोफेसर और ब्रिटिश एकेडमी के फेलो ओरसिनी के पति पीटर कोर्निकी ने द इंडियन एक्सप्रेस को कन्फर्म किया कि वह हांगकांग से दिल्ली आई थीं और उन्हें हांगकांग डिपोर्ट कर दिया गया। उन्होंने कहा कि कोई कारण नहीं बताया गया।
वीजा उल्लंघन के आरोप के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि उन्हें 'इन मामलों की कोई जानकारी नहीं है।' यह पूछे जाने पर कि क्या वह हाल ही में भारत में किसी कॉन्फ्रेंस में शामिल हुई हैं, उन्होंने कहा कि उन्हें किसी के बारे में नहीं पता।
'दिल्ली में जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की'
ओरसिनी असल में इटली की रहने वाली हैं, जहां उन्होंने हिंदी में अपनी अंडरग्रेजुएट पढ़ाई पूरी की। बाद में उन्होंने सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ हिंदी और दिल्ली में जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की।
ओरिसिनी 'द हिंदी पब्लिक स्फीयर 1920-1940: लैंग्वेज एंड लिटरेचर इन द एज ऑफ नेशनलिज्म' की लेखिका हैं। इसे ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस ने 2002 में पब्लिश किया था और यह उनके PhD के लिए SOAS में किए गए काम का हिस्सा था। यह जर्नल्स और लिटरेचर के जरिए उन दशकों के राष्ट्रवाद के संदर्भ में हिंदी भाषा पर जोर देता है।
ओरसिनी 2013-14 में हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के रेडक्लिफ इंस्टीट्यूट में थीं। उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ कैम्ब्रिज और SOAS में पढ़ाया और 2021 में SOAS से रिटायर हो गईं। वह इस इंस्टीट्यूशन के साथ तीन दशक से ज्यादा समय तक जुड़ी रहीं।
दिल्ली यूनिवर्सिटी के एक प्रोफेसर और ओरसिनी के एक दोस्त ने कहा, 'भारत के साथ उनका चार दशक से ज्यादा पुराना जुड़ाव है, उन्होंने यहां हिंदी पढ़ी है। वह कंटेंपररी और मिडिल एज के हिंदी लिटरेचर की स्कॉलर हैं। इसका ज्यादा हिस्सा ओरल भी है, इसलिए वह लोगों से बात करती थीं, जानकारी इकट्ठा करती थीं और स्कॉलर्स से मिलती थीं। उन्होंने कई स्कॉलर्स को मेंटर भी किया है और टेक्स्ट्स का ट्रांसलेशन भी किया है। यह उन आम, सालाना विजिट्स में से एक होना चाहिए था।'
'उन्हें इस देश से प्यार हो गया'
ओरसिनी को दशकों से जानने वाले दिल्ली यूनिवर्सिटी के इंग्लिश डिपार्टमेंट के पुराने प्रोफेसर आलोक राय ने कहा, 'वह हिंदी सीखने के लिए इंडिया आईं और उन्हें इस देश से प्यार हो गया। उनका पहला बड़ा काम हिंदी पब्लिक स्फीयर बनाने पर था और फिर वह उससे भी आगे निकल गईं। उन्होंने पुरानी किताबों पर डिटेल में टेक्स्ट पर काम किया है, और वह बहुत बारीकी से टेक्स्ट पढ़ती हैं। वह उर्दू की भी जानकार हैं… और उन्होंने पर्शियन भी पढ़ी है।'
ओरसिनी ने पिछले साल अक्टूबर में दिल्ली में दास्तानगोई कलेक्टिव द्वारा आयोजित 'द पूरब: ए मल्टीलिंगुअल लिटरेरी हिस्ट्री' पर दूसरा शम्सुर रहमान फारूकी मेमोरियल लेक्चर दिया था। उन्होंने 2020 में डॉ. बी. आर. अंबेडकर यूनिवर्सिटी दिल्ली और दिल्ली यूनिवर्सिटी में लिटरेरी हिस्ट्री और वर्ल्ड लिटरेचर पर लेक्चर दिए हैं। दिल्ली यूनिवर्सिटी में उन्होंने मलिक मुहम्मद जायसी की पद्मावत के बारे में बात की। उन्होंने ऑनलाइन 2021 में सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ डेवलपिंग सोसाइटीज में 'हिंदी इंटरनेशनलिज्म: लिटरेचर एंड द कोल्ड वॉर' पर बी.एन. गांगुली मेमोरियल लेक्चर दिया।
