Meenakshi Natarajan : मध्य प्रदेश में कांग्रेस की राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का पर्चा रद्द हो जाने के बाद राजनीतिक माहौल काफी गरम हो गया है। कांग्रेस चुनाव आयोग और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) दोनों पर हमलावर है। पर्चा रद्द किए जाने से नाराज कांग्रेस के दिग्गज नेता बुधवार को दिल्ली में चुनाव आयोग के अधिकारियों से मिले और इसकी शिकायत की। कांग्रेस ने चुनाव आयोग से नटराजन की उम्मीदवारी बहाल करने की अपील भी की है। भाजपा का कहना है कि नटराजन ने अपने नामांकन पत्र में तेलंगाना कोर्ट में अपने खिलाफ लंबित मामले की जानकारी छिपाई। जबकि कांग्रेस का कहना है कि यह कोई आपराधिक मामला नहीं है और न ही उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज है। कांग्रेस का दावा है कि नटराजन का नामांकन गलत तरीके से खारिज किया गया।
नटराजन के खिलाफ 2022 का है मामला
विवाद की जड़ हैदराबाद की एक अदालत में लंबित एक निजी शिकायत जिसमें मीनाक्षी नटराजन का नाम भी शामिल किया गया है। भाजपा का आरोप है कि कांग्रेस नेता ने अपने चुनावी हलफनामे में इस मामले का उल्लेख नहीं किया और अधूरा नामांकन पत्र दाखिल किया, इसलिए उनका नामांकन रद्द किया जाना उचित था। वहीं, कांग्रेस का कहना है कि नटराजन के खिलाफ कोई आपराधिक मामला लंबित नहीं है। उन्हें केवल एक निजी शिकायत के संबंध में अदालत से नोटिस जारी हुआ था, जिसे चुनावी नियमों के तहत हलफनामे में बताना आवश्यक नहीं था। शिकायतकर्ता के अनुसार, यह मामला वर्ष 2022 का है, जब एक महिला ने कांग्रेस के एक सहयोगी पर उत्पीड़न और छेड़छाड़ के आरोप लगाए थे। महिला का दावा है कि उसने कई बार पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को इन आरोपों की जानकारी दी और आरोपी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की, लेकिन इस दिशा में कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त से मिला कांग्रेस का शिष्टमंडल
उम्मीदवार का नामांकन खारिज किए जाने के खिलाफ कांग्रेस ने मध्य प्रदेश से अपनी राज्यसभा बुधवार को निर्वाचन आयोग से शिकायत की और आग्रह किया कि निर्वाचन अधिकारी (आरओ) के 'संविधान एवं गणतंत्र विरोधी’ फैसले को तत्काल निरस्त किया जाए। पार्टी के एक प्रतिनिधिमंडल ने आयोग पहुंचकर इस मामले में पार्टी का पक्ष रखा और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दो अन्य आयुक्तों को ज्ञापन भी सौंपा। इस प्रतिनिधिमंडल में कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल, महासचिव जयराम रमेश, भूपेश बघेल, रणदीप सुरजेवाला और वरिष्ठ नेता दीपा दासमुंशी, विवेक तन्खा एवं अभिषेक सिंघवी शामिल थे। इसमें खुद नटराजन भी मौजूद थीं।
मीनाक्षी के पास केवल एक नोटिस आया
निर्वाचन आयोग के अधिकारियों से मुलाकात के बाद वेणुगोपाल ने संवाददाताओं से कहा, 'हमने भारत निर्वाचन आयोग के साथ विस्तार से चर्चा की और तथ्य व आंकड़े रखे।’ वरिष्ठ अधिवक्ता सिंघवी ने कहा, 'हमारे प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग के सामने विस्तृत रूप से अपने मुद्दे रखे हैं। मीनाक्षी नटराजन जी के मामले में आरओ का फैसला विकृत है, कानूनी रूप से गलत है, जिसका समर्थन नहीं किया जा सकता।’ उनका कहना था कि निर्वावन अधिकारी ने जिस आधार पर मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द कर दिया, वह आधार कानूनी रूप से सही नहीं हैं। कांग्रेस नेता ने कहा, 'ऐसा कोई आपराधिक मामला नहीं है, जिसका मीनाक्षी जी खुलासा कर सकती थीं। अदालत से एक नोटिस आया, जिसमें मीनाक्षी जी से कहा गया कि आप आकर हमें बताइए कि हम इस मामले का संज्ञान लें या नहीं।’
इस मामले में आगे के तीन चरण बचे हैं
सिंघवी ने कहा, 'कानून के पहली कक्षा के विद्यार्थी को भी पता होता है कि मजिस्ट्रेट द्वारा संज्ञान लेना एक प्राथमिक चरण होता है और उसमें यह फैसला किया जाता है कि यह मामला आगे चलना चाहिए या नहीं। बिना संज्ञान के कोई भी आपराधिक मामला जन्म ही नहीं लेता है।’कांग्रेस नेता ने कहा, 'मजे की बात यह है कि चुनाव आयोग के कानून में स्पष्ट लिखा है कि आपको सिर्फ वह खुलासा करना है, जिसमें अपराध अगर सिद्ध हो तो सजा दो साल से ज्यादा हो और जिसमें आरोप तय हो चुके हैं। इसे देखने का उत्तरदायित्व आरओ का होता है।’ सिंघवी ने कहा, 'इस मामले में मजिस्ट्रेट ने संज्ञान नहीं लिया है। व्यवस्था यह है कि मीनाक्षी जी को सुनने के बाद मजिस्ट्रेट संज्ञान लेंगे, उसके बाद जांच होगी और फिर आरोप पत्र तैयार होगा। यानी इस मामले में आगे के तीन चरण बचे हैं। मजिस्ट्रेट ने संज्ञान तक नहीं लिया है, मगर आरओ ने मान लिया कि यह एक आपराधिक मामला लंबित है।’
आरओ का फैसला गणतंत्र के सिद्धांतों के विरुद्ध-सिंघवी
उनका कहना था, 'इसके अलावा, हमने कई और मुद्दे रखे और कहा है कि ऐसी गलती के कारण राज्यसभा उम्मीदवार का नामांकन रद्द नहीं किया जा सकता है।’ सिंघवी ने दावा किया कि आरओ का फैसला गणतंत्र के सिद्धांतों के विरुद्ध है और समान अवसर की स्थिति को खत्म करने वाला है तथा संविधान के मूल ढांचे को भी विकृत करता है। उन्होंने कहा, 'हमने यह भी कहा है कि निर्वाचन आयोग के पास पूरा अधिकार क्षेत्र है कि वे आरओ के फैसले को बदल दे या आदेश निरस्त कर दें। आयोग पहले भी हरियाणा और गुजरात के मामलों में हस्तक्षेप कर चुका है।’ कांग्रेस नेता के अनुसार, यह नहीं कहा जा सकता है कि चुनाव आयोग किसी भी तरह से असहाय है। शपथपत्र में जानकारी छुपाने के आरोप में कांग्रेस की उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन मंगलवार को रद्द कर दिया गया।
तीन सीट के लिए 18 जून को मतदान होना है
मध्य प्रदेश विधानसभा के एक अधिकारी ने ’पीटीआई-भाषा’ को बताया था कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार महेश केवट ने निर्वाचन अधिकारी के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी कि नटराजन ने जानबूझकर अपने खिलाफ तेलंगाना में दर्ज एक मुकदमे का अपने शपथ पत्र में कोई उल्लेख नहीं किया है। उन्होंने कहा था कि इसे लेकर दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद निर्वाचन अधिकारी ने नटराजन का नामांकन निरस्त कर दिया। मध्यप्रदेश में राज्यसभा की तीन सीट के लिए 18 जून को मतदान होना है।
