What Is SAVE America Act : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने यहां चुनावों में भारत जैसी व्यवस्था चाहते हैं। वह चाहते हैं कि अमेरिका में भी मतदाताओं के पास मतदान पहचान पत्र यानी वोटर आईडी कार्ड हो और इस वोटर आईडी कार्ड को दिखाकर लोग अपने मताधिकार का इस्तेमाल करें। इसके लिए वह चाहते हैं कि कांग्रेस 'द सेव अमेरिका एक्ट' पारित करे ताकि इसे देश भर में लागू और वोटर आईडी कार्ड को अनिवार्य बनाया जा सके। 'द सेव अमेरिका एक्ट' है क्या इसे जानने से पहले यह जान लेते हैं कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने भारत के मुख्य चुनाव (CEC) आयुक्त ज्ञानेश कुमार और भारत के चुनाव व्यवस्था के बारे में कहा क्या है।
2020 के चुनाव में फर्जी वोटिंग का लगाया आरोप
अपने सोशल मीडिया मंच ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में ट्रंप ने कहा कि 'इस महीने की शुरुआत में भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने हमारे प्रशासन से पूछा-एक वैध फोटो आईडी के बगैर आप अमेरिका में चुनाव कैसे करा सकते हैं? भारत के पिछले चुनाव में 64.6 करोड़ मतदाता थे! एक प्रतिशत से भी कम लोगों ने मेल के जरिए मतदान किये। यहां प्रत्येक मतदाता को मतदान करने के लिए एक वैध फोटो पहचान दस्तावेज रखना होता है। हमें अब 'द सेव अमेरिका एक्ट' पारित करने की जरूरत है।' 2020 में राष्ट्रपति चुनाव हारने के बाद ट्रंप ने अमेरिका में फर्जी वोटिंग के गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने चुनाव में धांधली होने का दावा किया। दूसरी बार राष्ट्रपति बनने के बाद भी वह कई बार इस बारे में बयान दे चुके हैं। ट्रंप इस कथित वोट चोरी एवं फर्जीवाड़े पर अब लगाम लगाना चाहते हैं। वह चुनाव में भारत जैसी वोटर आडी कार्ड की व्यवस्था और संघीय कानून चाहते हैं, हालांकि उनकी इस पहल का पूरी तरह से समर्थन नहीं मिल पाया है। इस एक्ट को लेकर कांग्रेस में मतभेद और सीनेटरों की अलग-अलग राय है। इस एक्ट को लेकर ट्रंप कितना गंभीर हैं, इसे बीते 16 जुलाई को दिए गए उनके भाषण से समझा जा सकता है।
लॉजिस्टिक, कानूनी एवं राजनीतिक बाधाएं
इस स्पीच में उन्होंने 'द सेफगार्ड अमेरिकन वोटर एलिजिबिलिटी एक्ट' (SAVE America Act) की जरूरत पर प्रमुखता से अपनी बात रखी। प्रस्तावित कानून में वोटिंग के लिए अतिरिक्त दस्तावेजों की जरूरत बताई गई है। इसके अलावा यह एक्ट मेल एवं सभी राज्यों में बैलेट के जरिए वोटिंग में कटौती की व्यवस्था करता है। इस एक्ट को लेकर लॉजिस्टिक, कानूनी एवं राजनीतिक बाधाएं भी हैं। अभी यह एक्ट यूएस हाउस एवं सीनेट के बीच फंसा हुआ है। बीते दिनों इसे लेकर दोनों जगहों पर काफी शोर-शराबा हुआ। इस एक्ट पर वोटिंग कराने और सीनेट पर दबाव बनाने के लिए रिपब्लिकन ने कई बड़े विधेयकों पर वोटिंग में देरी की। ऐसे में 'द सेव अमेरिका एक्ट' सीनेट में गतिरोध का एक बड़ी वजह बन गया है।
Donald Trump
सफलता का श्रेय लेने का मौका गंवा दिया
विवादित 'सेव अमेरिका एक्ट' का असर इतना पड़ा कि ट्रंप ने कांग्रेस द्वारा पारित एक द्विदलीय आवास विधेयक पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया। हालांकि, उनके हस्ताक्षर के बिना भी वह विधेयक कानून बन गया, लेकिन SAVE America Act को लेकर ट्रंप की व्यस्तता ने कांग्रेस के रिपब्लिकन सदस्यों को एक लोकप्रिय और द्विदलीय नीति की सफलता का श्रेय लेने का मौका गंवा दिया। फिर भी, बढ़ते राजनीतिक दबाव के बावजूद कांग्रेस अपने रुख से नहीं हिली है। ट्रंप की प्राथमिकताओं और कांग्रेस की निष्क्रियता के बीच यह तनाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि रिपब्लिकन पार्टी दोनों सदनों में बहुमत में है। लेकिन कांग्रेस नेतृत्व की बदलती शक्ति का अध्ययन करने वाले एक राजनीतिक वैज्ञानिक के तौर पर SAVE America Act पर निष्क्रियता केवल रिपब्लिकन सांसदों के बीच ट्रंप की घटती लोकप्रियता को नहीं दर्शाती। बल्कि, दशकों में सबसे बड़े चुनावी सुधारों में से एक बनने वाले इस विधेयक को लेकर कांग्रेस की हिचकिचाहट मतदाताओं की जरूरतों और सांसदों के अपने पुनर्निर्वाचन के जोखिमों की समझ को भी दर्शाती है।
ताजा स्थिति क्या है?
हाउस रिपब्लिकन सदस्य इस निष्क्रियता के लिए लगातार सीनेट को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। उनका कहना है कि सीनेट में विधेयक को आगे बढ़ाने के लिए 60 वोटों की फिलिबस्टर सीमा पार करनी होगी, जिसके कारण इसे सीनेट के फ्लोर पर मतदान के लिए लाना मुश्किल है। हाउस स्पीकर माइक जॉनसन ने सीनेट पर विधेयक को लेने का दबाव बनाने के लिए इसे कम से कम तीन बार सदन में पेश किया है। जुलाई 2026 में जॉनसन ने एक और रणनीति अपनाई। उन्होंने रूढ़िवादी सांसदों को संतुष्ट करने के लिए विदेश विभाग के वित्तपोषण से संबंधित हाउस से पारित विधेयक में SAVE America Act के कुछ हिस्सों को शामिल कर दिया।
हालांकि, ये कदम काफी हद तक दिखावटी हैं। सीनेट के बहुमत नेता जॉन थ्यून फरवरी 2026 से ही कह रहे हैं कि SAVE America Act को सीनेट से पारित कराने के लिए पर्याप्त वोट मौजूद नहीं हैं। जून में फॉक्स न्यूज से बातचीत में उन्होंने कहा था कि 'फिलहाल वोट मौजूद नहीं हैं।” हालांकि सीनेट के रिपब्लिकन सदस्य फिलिबस्टर नियम को खत्म करने के लिए मतदान कर सकते हैं, जिसकी मांग ट्रंप भी कर चुके हैं, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया है। हाउस में भी रिपब्लिकन पार्टी का बेहद मामूली बहुमत होने के कारण जॉनसन के लिए इस विवादित मुद्दे पर पार्टी को एकजुट रखना मुश्किल रहा है। महत्वपूर्ण विधेयकों के साथ SAVE America Act को जोड़ने की जॉनसन की रणनीति से न केवल द्विदलीय नीतियों के पटरी से उतरने का खतरा है, बल्कि एक और सरकारी शटडाउन का खतरा भी पैदा हो सकता है।
कानूनी और व्यावहारिक चुनौतियां
SAVE America Act लागू करना भ्रमित करने वाला, समय लेने वाला और महंगा हो सकता है। इसके अलावा, राज्यों को इन बदलावों को लागू करने के लिए विधेयक में कोई वित्तीय सहायता भी नहीं दी गई है। चुनावी प्रक्रियाओं में बदलाव के लिए सटीकता और पर्याप्त समय की जरूरत होती है। रिपब्लिकन सीनेटर थॉम टिलिस ने भी सवाल उठाते हुए कहा, 'क्या आपको सच में लगता है कि हम इसे 50 राज्यों में लागू कर सकते हैं? इसके लिए कोई फंडिंग नहीं है। कोई स्पष्ट कार्यान्वयन निर्देश नहीं हैं।' व्यावहारिक दिक्कतों के अलावा, चुनावी प्रक्रियाओं को संघीय स्तर पर नियंत्रित करने की इसकी वैधानिकता भी स्पष्ट नहीं है। अमेरिकी कांग्रेस के पास चुनावों से संबंधित आवश्यकताएं तय करने का अधिकार है। लेकिन संविधान के अनुच्छेद 1, धारा 4 के तहत, कांग्रेस जहां चुनावों के लिए कुछ मानक तय कर सकती है, वहीं चुनावों के प्रशासन की जिम्मेदारी राज्यों की होती है। उदाहरण के लिए, 1993 के नेशनल वोटर रजिस्ट्रेशन एक्ट ने नागरिकता को मतदान की एक आवश्यकता के रूप में मजबूत किया, लेकिन राज्यों को अपने पंजीकरण फॉर्म और मतदाता नामांकन प्रक्रिया तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई। SAVE America Act इस व्यवस्था को बदलने की कोशिश करता है और संघीय सरकार के पास मतदाता सूचियों का नियंत्रण रखने की आवश्यकता करता है।अमेरिकी नागरिकों के लिए अनिश्चितता
कानूनी चुनौतियों के अलावा, SAVE America Act अमेरिकी मतदाताओं और उनका प्रतिनिधित्व करने वाले सांसदों के लिए वास्तविक प्रभाव पैदा कर सकता है। विधेयक का घोषित उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि केवल अमेरिकी नागरिक ही मतदान करें। हालांकि, मतदान के लिए नागरिकता की आवश्यकता पहले से ही संघीय कानून में मौजूद है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि व्यवहार में यह विधेयक योग्य मतदाताओं के लिए लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लेना अधिक कठिन बना सकता है। ग्रामीण अमेरिका के मतदाताओं पर इसका खासा असर पड़ सकता है। इनमें से अधिकांश का प्रतिनिधित्व रिपब्लिकन सांसद करते हैं। विधेयक के तहत डाक से मतदाता पंजीकरण और डाक से मतदान पर कड़े प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। 50 लाख से अधिक अमेरिकियों को मतदान के लिए पंजीकरण कराने के लिए एक घंटे या उससे अधिक समय तक गाड़ी चलानी पड़ सकती है, जबकि कुछ मतदाताओं को आठ घंटे तक की यात्रा करनी पड़ सकती है। विवाह के बाद अपना नाम बदलने वाली महिलाओं के लिए जन्म प्रमाणपत्र के साथ-साथ विवाह प्रमाणपत्र भी प्रस्तुत करना आवश्यक हो सकता है।
मतदाताओं को करना पड़ सकता है चुनौती का सामना
पहली बार मतदान करने वाले मतदाताओं, कॉलेज परिसरों में रहने वाले युवाओं और हाल ही में स्थानांतरित हुए लोगों को भी व्यक्तिगत रूप से आवश्यक दस्तावेज जुटाने और प्रस्तुत करने की चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। कांग्रेस के सदस्य, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाले सांसद, इन वास्तविकताओं से अवगत होने की संभावना है। अपने मतदाताओं के मतदान के अधिकार को सीमित करना या कम से कम मतदान प्रक्रिया को भ्रमित करना उनके अपने चुनावी भविष्य के लिए भी जोखिम पैदा कर सकता है।
Trump
रिपब्लिकन पार्टी पर ट्रंप की पकड़
क्या SAVE America Act को लेकर कांग्रेस की हिचकिचाहट रिपब्लिकन पार्टी पर ट्रंप की कमजोर होती पकड़ का संकेत है? संभवतः। ट्रंप अपने दूसरे कार्यकाल में अब तक के सबसे निचले लोकप्रियता स्तर पर हैं। कुछ सांसदों के लिए SAVE America Act के मुद्दे पर ट्रंप की अनदेखी करना अब ऐसा राजनीतिक जोखिम हो सकता है जिसे वे उठाने को तैयार हैं। लेकिन ज्यादातर रिपब्लिकन सांसदों के लिए ट्रंप को खुश रखना अभी भी प्राथमिक चुनाव और आम चुनाव में सफलता के लिए महत्वपूर्ण है। सीनेट के मौजूदा सदस्यों के लिए भी ट्रंप का प्राथमिक चुनावों में समर्थन काफी प्रभावशाली रहा है और वह पार्टी की दिशा तय करने में अब भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। मतदाताओं के बीच SAVE America Act के कुछ प्रावधान MAGA समर्थक मतदाताओं में लोकप्रिय हैं। इसलिए गहरे रिपब्लिकन क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाले सांसदों के लिए यह महत्वपूर्ण चुनावी मुद्दा बना हुआ है।
कांग्रेस एक पुराने पैटर्न को दोहरा रही है
सार्वजनिक रूप से विधेयक का समर्थन करते हुए और फिर सीनेट को हाउस से पारित विधेयक को रोकने की जिम्मेदारी सौंपकर कांग्रेस एक पुराने पैटर्न को दोहरा रही है। इससे रूढ़िवादी सांसद एक तरफ राष्ट्रपति को खुश कर सकते हैं, जबकि दूसरी तरफ प्रक्रिया का इस्तेमाल करके चुनाव से कुछ महीने पहले मतदान व्यवस्था में बड़े बदलाव लाने वाले विधेयक को रोक सकते हैं। कुल मिलाकर SAVE America Act को पारित करने में कांग्रेस की हिचकिचाहट केवल ट्रंप और रिपब्लिकन पार्टी के बीच संबंधों की परीक्षा नहीं है। यह इस बात का उदाहरण भी है कि कांग्रेस वही काम कर रही है जिसके लिए उसे बनाया गया था और वह है अपने मतदाताओं के हितों और चिंताओं का प्रतिनिधित्व करना।
