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क्या है 400000000000 का 'ओमान-गुजरात' अंडरसी पाइपलाइन प्रोजेक्ट? भारत को मिलेगी हॉर्मुज संकट से मिलेगी मुक्ति

Middle East India Deepwater Pipeline SAGE: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और हॉर्मुज जलडमरूमध्य में सप्लाई बाधित होने के खतरे के बीच भारत ने ओमान-गुजरात अंडरसी गैस पाइपलाइन प्रोजेक्ट को फिर से एक्टिव कर दिया है।

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क्या है 400000000000 करोड़ का 'ओमान-गुजरात' अंडरसी पाइपलाइन प्रोजेक्ट? भारत को मिलेगी हॉर्मुज संकट से मिलेगी मुक्ति

TIMES NOW Navbharat EXPLAINER: पश्चिम एशिया (मिडल-ईस्ट) में लगातार गहराते सैन्य और भू-राजनीतिक संकट ने भारत के एक बेहद महत्वाकांक्षी लेकिन ठंडे बस्ते में पड़े ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट को दोबारा जिंदा कर दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत सरकार अब समुद्र के रास्ते ओमान से सीधे गुजरात तक करीब 2,000 किलोमीटर लंबी अंडरसी नेचुरल गैस पाइपलाइन बिछाने की योजना पर बेहद गंभीरता से विचार कर रही है।

Firstpost की खबर के मुताबिक, लगभग ₹40,000 करोड़ की अनुमानित लागत वाला यह प्रोजेक्ट (Oman-Gujarat Deep-Sea Gas Pipeline) पिछले तीन दशकों से सिर्फ कागजों पर सिमटा हुआ था। लेकिन हालिया दिनों में 'स्ट्रैट ऑफ हॉर्मुज' (Strait of Hormuz) में तेल और गैस के टैंकरों पर हुए हमलों और सप्लाई में आई रुकावटों ने भारतीय नीति-नियमताओं को अपनी ऊर्जा सुरक्षा की समीक्षा करने पर मजबूर कर दिया है। विशेषज्ञ इसे भारत के लिए 'रणनीतिक रूप से बेहद जरूरी' मान रहे हैं।

हॉर्मुज का खतरा: क्यों डरा हुआ है भारतीय बाजार?

भारत अपनी जरूरत का 85 प्रतिशत कच्चा तेल और भारी मात्रा में प्राकृतिक गैस (LNG) विदेशों से आयात करता है। इस आयात का एक बहुत बड़ा हिस्सा ओमान और अन्य खाड़ी देशों से होते हुए 'स्ट्रैट ऑफ हॉर्मुज' के रास्ते भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचता है।

ग्लोबल चोकपॉइंट: हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का ऐसा संकरा समुद्री रास्ता है, जहां से दुनिया के कुल तेल व्यापार का पांचवां (1/5th) हिस्सा गुजरता है।

बढ़ती लागत: पश्चिम एशिया के ताजा संघर्ष की वजह से इस रूट पर समुद्री जहाजों का किराया, बीमा और क्रूड-गैस की कीमतें आसमान छूने लगी हैं।

अल्टरनेटिव की तलाश: अगर यह रूट लंबे समय के लिए बंद होता है, तो भारत की अर्थव्यवस्था चरमरा सकती है। इसी वजह से 'मिडल ईस्ट-इंडिया डीपवॉटर पाइपलाइन' (MEIDP) को इस जोखिम का एकमात्र परमानेंट इलाज माना जा रहा है।

क्या है ओमान-गुजरात डीप-सी प्रोजेक्ट?

इस प्रोजेक्ट के तहत अरब सागर के नीचे से एक डायरेक्ट एनर्जी कॉरिडोर बनाया जाएगा, जो सीधे ओमान के गैस नेटवर्क को भारत के पश्चिमी तट (गुजरात) से जोड़ेगा।

सीधी सप्लाई, कम खर्च: वर्तमान जहाजों के जरिए आने वाली एलएनजी (LNG) के मुकाबले पाइपलाइन से आने वाली गैस बहुत किफायती होगी। शुरुआती प्रस्तावों के अनुसार, इसका ट्रांसपोर्टेशन खर्च $2 से $2.25 प्रति मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट (MMBtu) के बीच आ सकता है।

तकनीकी चुनौती (दुनिया की सबसे गहरी पाइपलाइन): यह प्रोजेक्ट आधुनिक इंजीनियरिंग की परीक्षा लेगा। समुद्र के रास्ते में कुछ जगहों पर इस पाइपलाइन को 3,450 मीटर (करीब साढ़े तीन किलोमीटर) की गहराई पर बिछाया जाएगा। इतनी गहराई पर पानी के अत्यधिक दबाव और कठिन समुद्री सतह को झेलने के लिए बेहद उन्नत तकनीक की आवश्यकता होगी।

GAIL, EIL और IOC को मिला बड़ा जिम्मा

इस प्रोजेक्ट को लंबे समय से आगे बढ़ाने की वकालत कर रही कंसोर्टियम कंपनी SAGE (South Asia Gas Enterprise) ने तकनीकी और वित्तीय व्यवहार्यता (Technical Assessment & Seabed Surveys) का खाका सरकार के सामने रखा है।

Firstpost के अनुसार, केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने देश की दिग्गज सरकारी ऊर्जा कंपनियों- GAIL (गेल), इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड (EIL) और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) को SAGE के प्री-फिजिबिलिटी डेटा के आधार पर एक विस्तृत रिपोर्ट (Detailed Feasibility Report) तैयार करने के लिए कहा है। इस रिपोर्ट के सकारात्मक आते ही ओमान सरकार के साथ आधिकारिक फंडिंग और गैस सप्लाई एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए जा सकते हैं।

सिर्फ गैस नहीं, भविष्य के ईंधन 'हाइड्रोजन' पर भी नजर

ऊर्जा विश्लेषकों का मानना है कि यह प्रोजेक्ट सिर्फ मौजूदा दौर की गैस संकट का समाधान नहीं है, बल्कि भविष्य का एक बहुत बड़ा निवेश है। जैसे-जैसे दुनिया 'क्लीन एनर्जी ट्रांजिशन' (स्वच्छ ऊर्जा) की तरफ बढ़ रही है, भारत आज बनाए जा रहे इस अंडरसी इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल भविष्य में 'ग्रीन हाइड्रोजन' को खाड़ी देशों से भारत लाने के लिए कर सकता है। हालांकि, समुद्र के साढ़े तीन किलोमीटर नीचे किसी भी तकनीकी खराबी या लीक को दुरुस्त करना एक बड़ी चुनौती होगी, लेकिन पश्चिम एशिया की अनिश्चितता ने भारत को इस रिस्क को लेने के लिए तैयार कर दिया है।

Nitin Arora
नितिन अरोड़ाauthor

नितिन अरोड़ा टाइम्स नाउ नवभारत में न्यूज डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया में उनका 6 वर्षों का अनुभव है। वह राजनीति, देश–विदेश की बड़ी घटनाओं और समसामयिक मुद्दों को गहराई से समझकर उन्हें सटीक और सरल भाषा में प्रस्तुत करने में माहिर हैं। उन्होंने अपने करियर में लगातार करंट अफेयर्स, पॉलिटिकल डेवलपमेंट्स, डिप्लोमैटिक घटनाएं और डिफेंस सेक्टर से जुड़े विषयों पर प्रभावशाली कॉन्टेंट तैयार किया है और अबतक 6 हजार से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। विभिन्न टॉपिक्स पर एक्सप्लेनेर, डेटा-आधारित रिपोर्ट्स और विश्लेषणात्मक कॉपी लिखने में उनकी मजबूत पकड़ है।

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