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नितिन नवीन की टीम में वसुंधरा राजे, क्या हैं इसके सियासी मायने और संदेश?

राजस्थान में दो बार मुख्यमंत्री रह चुकीं वसुंधरा राजे पार्टी के सबसे कद्दावर और सर्वमान्य जननेताओं में से एक हैं। उन्हें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष का पद देकर पार्टी नेतृत्व ने यह साफ कर दिया है कि नए समीकरणों के बावजूद उनके संगठनात्मक कद और जनाधार की अनदेखी नहीं की जा सकती।

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वसुंधरा राजे की वापसी के क्या मायने? (AI Image)
Authored by: Amit Mandal
Updated Aug 18, 2026, 15:11 IST
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भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने आगामी विधानसभा चुनावों और संगठनात्मक पुनर्गठन को ध्यान में रखते हुए अपनी नई राष्ट्रीय टीम की घोषणा कर दी है। इस नई टीम में जहां कई नए और युवा चेहरों को जगह मिली है, वहीं राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा की वरिष्ठ नेता वसुंधरा राजे सिंधिया को एक बार फिर राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नियुक्त कर पार्टी में उनके अनुभव पर भरोसा जताया गया है। राजस्थान की राजनीति में लंबे समय से चल रही खींचतान और राज्य के मुख्यमंत्री पद के चयन के बाद यह कयास लगाए जा रहे थे कि केंद्रीय नेतृत्व में वसुंधरा राजे की भूमिका क्या होगी। ऐसे में राष्ट्रीय संगठन में उनकी वापसी कई राजनीतिक संदेश देती है। इसे विस्तार से समझते हैं।

अनुभव और कद का सम्मान

राजस्थान में दो बार मुख्यमंत्री रह चुकीं वसुंधरा राजे पार्टी के सबसे कद्दावर और सर्वमान्य जननेताओं में से एक हैं। उन्हें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष का पद देकर पार्टी नेतृत्व ने यह साफ कर दिया है कि नए समीकरणों के बावजूद उनके संगठनात्मक कद और जनाधार की अनदेखी नहीं की जा सकती। राजस्थान की राजनीति में क्षेत्रीय और गुटीय संतुलन बनाए रखना भाजपा के लिए हमेशा एक चुनौती रहा है। वसुंधरा राजे को केंद्रीय संगठन में बड़ी जगह देकर और साथ ही राजस्थान से उनके प्रतिद्वंद्वी रहे डॉ. सतीश पूनिया को राष्ट्रीय महामंत्री बनाकर आलाकमान ने संतुलन बनाने का संदेश दिया है। उन्हें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाए रखने का अर्थ है कि पार्टी उनके अनुभव का इस्तेमाल केवल राजस्थान तक सीमित न रखकर अन्य राज्यों के चुनाव प्रबंधन और संगठनात्मक विस्तार में भी करेगी।

वसुंधरा राजे ने जताया आभार

नियुक्ति के बाद X (ट्विटर) पर एक पोस्ट में राजे ने कहा, "मुझे भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के रूप में संगठन और राष्ट्र की सेवा करने का अवसर प्रदान करने के लिए मैं माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री नितिन नवीन जी का आभार व्यक्त करती हूं।"

वसुंधरा राजे का प्रभाव और सियासी लेखाजोखा

2023 के विधानसभा चुनावों में, भाजपा ने राजस्थान में सम्मानजनक 115 सीटें हासिल कीं, जो उस 120 सीटों के आंकड़े से थोड़ी कम थीं जब वसुंधरा राजे ने चुनावी मैदान में कदम रखा था और 2003 में पहली बार पार्टी का नेतृत्व किया था। अपने अगले कार्यकाल में 'मोदी लहर' के बल पर और राजस्थान में पार्टी का चेहरा बनने के बाद राजे ने पार्टी को 163 सीटों की भारी जीत दिलाई। 2023 के चुनावों के बाद पार्टी ने राजस्थान में नेतृत्व की एक पूरी तरह से नई पीढ़ी को आगे बढ़ाने का फैसला किया।

राजे ने पार्टी के लिए प्रचार किया, लेकिन पूरे राज्य के कोने-कोने में नहीं। उनका जनसंपर्क 200 विधानसभा क्षेत्रों में से केवल 70 क्षेत्रों की 54 चुनावी रैलियों तक ही सीमित रहा। 2023 में भजन लाल सरकार के सत्ता संभालने के बाद संदेश साफ था कि पार्टी राजस्थान में नए चेहरों को आगे लाना चाहती थी। लोकसभा चुनाव 2024 के लिए, राजे ने केवल एक निर्वाचन क्षेत्र झालावाड़-बारां में ही प्रचार किया, जहां से उनके बेटे दुष्यंत सिंह चुनाव लड़ रहे थे।

उस चुनाव में भाजपा को राजस्थान में 11 सीटों का नुकसान हुआ जो कि पिछली बार की तरह सभी 25 में से 25 संसदीय सीटें जीतने के क्लीन स्वीप के रिकॉर्ड से काफी अलग था। इन नतीजों ने यह साफ कर दिया कि राजस्थान में नया नेतृत्व मतदाताओं के बीच पूरी तरह से अपनी छाप नहीं छोड़ पाया।

भाजपा ने बदला अपना रुख

राजस्थान में भाजपा सरकार के अपने कार्यकाल के आधे समय तक पहुंचने के साथ ही यह संकेत बिल्कुल स्पष्ट है कि राजे को बनाए रखना राजनीतिक दृष्टिकोण से सही निर्णय है। 2028 में जब भाजपा अगले राज्य चुनाव में उतरेगी और महिला नेताओं पर विशेष ध्यान केंद्रित होगा, तो राजे बहुत आसानी से बढ़त बना लेंगी। वह न सिर्फ महिला मतदाताओं को आकर्षित करती हैं, बल्कि उनका व्यापक जनाधार भी है, साथ ही उनके पास राजशाही का वह आकर्षण भी है जो गहरे सामंती जड़ों वाले इस राज्य में असर दिखाता है।

उनका जाट, मराठा और राजपूत विरासत का संयोजन और गुज्जर समुदाय के साथ उनका वैवाहिक संबंध, उन्हें एक ऐसा राजनीतिक समीकरण देता है जो राजस्थान के जातीय ताने-बाने में अचूक है। उनकी बहु निहारिका राजे राजनीतिक रूप से प्रभावशाली इसी समुदाय से आती हैं। राजे ने इसे अपनी राजनीतिक पहचान बनाया है और वह अक्सर कहती हैं, मैं राजस्थान के 36 कौमों से अपील करती हूं।

पूर्व सीएम वसुंधरा राजे कितनी ताकतवर हैं?

वसुंधरा राजे की राजनीतिक ताकत और केंद्रीय संगठन में उनके प्रभाव को इन बिंदुओं से समझा जा सकता है:

  • राज्य में भाजपा के विधायक दल और कार्यकर्ताओं के बड़े वर्ग में आज भी वसुंधरा राजे की मजबूत पकड़ मानी जाती है। राजस्थान के ग्रामीण और राजपूताना बेल्ट में उनका अपना एक व्यक्तिगत प्रभाव है।
  • जब-जब राजस्थान में संगठन या सरकार के भीतर कोई बड़ा मोड़ आया है, वसुंधरा राजे ने आलाकमान के फैसलों के साथ तालमेल बिठाया है। राष्ट्रीय टीम में उनकी उपस्थिति केंद्रीय नेतृत्व के साथ उनके संवाद को मजबूत बनाए रखती है।
  • आगामी राज्य विधानसभा चुनावों और राष्ट्रीय अभियानों में वसुंधरा राजे भाजपा के प्रमुख चेहरों में से एक रहेंगी।

नितिन नवीन की इस नई टीम में 13 राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और 8 राष्ट्रीय महामंत्री शामिल हैं। पूरी लिस्ट में अनुभव और नए चेहरों का मिश्रण देखने को मिला है।

राष्ट्रीय उपाध्यक्ष

  • वसुंधरा राजे सिंधिया (राजस्थान), तीरथ सिंह रावत (उत्तराखंड), राम माधव (दिल्ली), बैजयंत जय पांडा (ओडिशा), डी. पुरंदेश्वरी (आंध्र प्रदेश), रेखा वर्मा (उत्तर प्रदेश)।
राष्ट्रीय महामंत्री
  • स्मृति ईरानी, विनोद तावड़े, सुनील बंसल, बिप्लब कुमार देव, डॉ. सतीश पूनिया, गजेंद्र पटेल, हरीश द्विवेदी और संजय भाटिया।
राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष
  • केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल को एक बार फिर राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है।
  • संगठन महामंत्री: बी. एल. संतोष राष्ट्रीय महामंत्री (संगठन) के पद पर बने रहेंगे।

नितिन नवीन की नई टीम से क्या संदेश?

जब 2028 के चुनाव नजदीक आएंगे, तो भाजपा को सत्ता विरोधी लहर से भी जूझना पड़ेगा। ऐसी परिस्थितियों में एक ऐसे नेता को साथ बनाए रखना जिसके पास इस तरह का मजबूत सामाजिक व राजनीतिक समीकरण हो, न केवल राजनीतिक रूप से फायदेमंद है, बल्कि समझदारी भरा कदम भी है। उन्हें पार्टी में एक सम्मानजनक पद देकर, भाजपा ने उनके राजनीतिक कद के प्रति अपना सम्मान दिखाया है और यह संदेश दिया है कि वे स्वीकार करते हैं कि राज्य की राजनीति में वह आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं। नितिन नवीन की नई टीम का यह पुनर्गठन इस बात का स्पष्ट संकेत है कि भारतीय जनता पार्टी अपने नए नेतृत्व को उभारने के साथ-साथ अपने वरिष्ठ नेताओं के राजनीतिक अनुभव को भी साथ लेकर चलना चाहती है। वसुंधरा राजे को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के पद पर बरकरार रखकर पार्टी ने यह संदेश दिया है कि वे भले ही राज्य की सक्रिय सत्ता से दूर दिखती हों, लेकिन पार्टी के राष्ट्रीय कैनवास पर उनकी अहमियत और ताकत आज भी बरकरार है।

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