अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और दो धुर विरोधी देशों के रिश्तों के इतिहास में एक बेहद चौंकाने वाला मोड़ आया है। अमेरिका ने बुधवार को मियामी की एक संघीय अदालत में क्यूबा के पूर्व राष्ट्रपति राउल कास्त्रो के खिलाफ हत्या और अमेरिकी नागरिकों की जान लेने की साजिश रचने का गंभीर मुकदमा दर्ज किया है। कार्यवाहक अमेरिकी अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लांश ने इस ऐतिहासिक इंडिक्टमेंट (चार्जशीट) की घोषणा की। यह मामला 24 फरवरी 1996 का है, जब क्यूबा के रूसी निर्मित मिग (MiG) लड़ाकू विमानों ने समुद्र के ऊपर उड़ रहे दो निहत्थे अमेरिकी नागरिक विमानों को मार गिराया था। इस हमले में चार लोगों की मौत हो गई थी। 30 साल बाद इस घाव के दोबारा हरे होने से मियामी में रहने वाले क्यूबाई शरणार्थियों में जहां खुशी है, वहीं क्यूबा सरकार ने इसे अपने देश पर सैन्य हमले की अमेरिकी साजिश करार दिया है।
क्या था 'ब्रदर्स टू द रेस्क्यू' मिशन और क्यों भड़का था क्यूबा?
इस पूरी कहानी के केंद्र में मियामी (फ्लोरिडा) का एक दक्षिणपंथी संगठन है, जिसका नाम है 'ब्रदर्स टू द रेस्क्यू' (Hermanos al Rescate)। इस संगठन की स्थापना 1980 के दशक में एक क्यूबाई अप्रवासी जोस बासुल्टो ने की थी। उस समय क्यूबा के तत्कालीन राष्ट्रपति फिदेल कास्त्रो की कम्युनिस्ट नीतियों के विरोध में करीब 1.25 लाख लोग समुद्र के रास्ते छोटी और असुरक्षित नावों पर सवार होकर अमेरिका भाग रहे थे। 'ब्रदर्स टू द रेस्क्यू' का काम छोटे सेसना (Cessna) विमानों के जरिए फ्लोरिडा जलडमरूमध्य (Florida Straits) में इन शरणार्थियों को ढूंढना, आसमान से उन्हें लाइफ जैकेट और रसद गिराना और अमेरिकी कोस्ट गार्ड को सूचित करना था। संगठन का दावा है कि उन्होंने करीब 6,000 लोगों की जान बचाई थी। धीरे-धीरे यह संगठन केवल मानवीय सहायता तक सीमित नहीं रहा। 1995 के आते-आते इस संगठन के विमानों ने क्यूबा की राजधानी हवाना के हवाई क्षेत्र में घुसना शुरू कर दिया। वे आसमान से कम्युनिस्ट सरकार के खिलाफ और लोकतंत्र के समर्थन वाले पर्चे गिराने लगे, जिसमें क्यूबा की जनता से सरकार के खिलाफ विद्रोह करने की अपील की जाती थी। क्यूबा सरकार ने इसे अपनी संप्रभुता पर हमला माना और अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी कि वह इन उड़ानों को तुरंत रोके, नहीं तो इसके गंभीर नतीजे होंगे।
हवाना के पास उड़ान भरता ब्रदर्स टू द रेस्क्यू का विमान
24 फरवरी 1996: आसमान में वो खौफनाक 20 मिनट
24 फरवरी 1996 की दोपहर करीब 1:30 बजे, 'ब्रदर्स टू द रेस्क्यू' के तीन छोटे सेसना-337 स्काईमास्टर विमानों ने फ्लोरिडा के मियामी-डेड काउंटी एयरपोर्ट से उड़ान भरी। उनका आधिकारिक फ्लाइट प्लान फ्लोरिडा के दक्षिण में चक्कर काटकर वापस लौटने का था। जैसे ही ये तीन विमान क्यूबा के करीब 24वें पैरेलल एरिया के पास पहुंचे, क्यूबा की वायुसेना पूरी तरह सक्रिय हो गई। राउल कास्त्रो, जो उस समय क्यूबा के रक्षा मंत्री थे, उनके सीधे आदेश पर दो रूसी मिग लड़ाकू विमानों ने आसमान में इन छोटे नागरिक विमानों को घेर लिया। अमेरिकी प्रॉसिक्यूटर के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय हवाई क्षेत्र में बिना किसी पूर्व चेतावनी या डाइवर्ट होने का मौका दिए, क्यूबा के मिग पायलटों ने दो सेसना विमानों पर हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलें दाग दीं। पलक झपकते ही दोनों विमान हवा में ही मलबे के ढेर में तब्दील हो गए और समुद्र में जा गिरे। इस हमले में विमानों में सवार चार अमेरिकी नागरिक, जिनके नाम आर्मंडो अलेजांद्रे, मारियो डे ला पेना, पाब्लो मोरालेस और कार्लोस कोस्टास की मौके पर ही मौत हो गई। संगठन के नेता जोस बासुल्टो का तीसरा विमान किसी तरह बचकर भागने में सफल रहा।
हत्या की चार्जशीट में राउल कास्त्रो पर क्या हैं आरोप?
अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) द्वारा दाखिल नई चार्जशीट में तत्कालीन रक्षा मंत्री राउल कास्त्रो को इस पूरे हत्याकांड का मुख्य सूत्रधार माना गया है। चार्जशीट के अनुसार, जनवरी 1996 में हवाना के ऊपर पर्चे गिराए जाने के बाद राउल कास्त्रो और उनके बड़े भाई फिदेल कास्त्रो (तत्कालीन राष्ट्रपति) ने इन अमेरिकी नागरिक विमानों को जानबूझकर मार गिराने का अंतिम फैसला लिया था। फरवरी 1996 की शुरुआत में, राउल कास्त्रो ने खुद सैन्य अधिकारियों को आदेश दिया था कि वे रूसी मिग विमानों के जरिए इन छोटे विमानों को ट्रैक करने, उनका पीछा करने और उन्हें हवा में ही नष्ट करने की विशेष ट्रेनिंग शुरू करें। राउल कास्त्रो और उनके मिग पायलटों पर अमेरिकी नागरिकों की हत्या की साजिश और विमान नष्ट करने की धाराओं के तहत मामला दर्ज हुआ है। अमेरिकी कानून में इन अपराधों के लिए उम्रकैद या मौत की सजा का प्रावधान है।
क्या 94 की उम्र में राउल झेलेंगे मुकदमा?
इस कहानी में कोई भी दूध का धुला नहीं
अमेरिकी और क्यूबा के मामलों के अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ इस पूरी घटना को बेहद जटिल मानते हैं। अमेरिकन यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञ विलियम लियोग्रांडे और पीटर कॉर्नब्लूह ने अपनी पुस्तक "बैक चैनल टू क्यूबा" में लिखा है कि तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन प्रशासन को अच्छी तरह पता था कि यह अप्रवासी संगठन लगातार क्यूबा को उकसा रहा है। फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) ने इस घटना से पहले संगठन के नेता बासुल्टो को उनकी 'लापरवाह और खतरनाक' उड़ानों के लिए कोई कड़ा नोटिस नहीं दिया था, जिससे उनके हौसले बढ़े। विशेषज्ञों का मानना है कि एक तरफ 'ब्रदर्स टू द रेस्क्यू' का क्यूबा को उकसाना, दूसरी तरफ अमेरिकी प्रशासन की ढिलाई और अंत में क्यूबा द्वारा निहत्थे नागरिक विमानों पर सीधे मिसाइल दाग देना, इस पूरे घटनाक्रम में कोई भी 'पूरी तरह सही' नहीं था। बाद में अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने यह भी खुलासा किया कि क्यूबा के 5 जासूसों (The Wasp Network) ने इस अप्रवासी संगठन में सेंध लगाई थी और उन्होंने ही विमानों की उड़ान का सटीक समय और रूट हवाना को लीक किया था।
क्या अमेरिकी अदालत के कठघरे में खड़े होंगे कास्त्रो?
राउल कास्त्रो ने 2006 में अपने भाई फिदेल के बीमार होने के बाद राष्ट्रपति पद संभाला था और 2018 तक वे इस पद पर रहे। हालांकि उन्होंने 2021 में कम्युनिस्ट पार्टी के प्रमुख पद से संन्यास ले लिया, लेकिन आज 94 वर्ष की उम्र में भी क्यूबा की सत्ता के पीछे का असली रिमोट कंट्रोल उन्हीं के हाथ में माना जाता है। गिरफ्तारी की संभावनाओं की बात करें तो क्यूबा अपने देश के सबसे बड़े नेता को कभी भी अमेरिका को प्रत्यर्पित नहीं करेगा। लेकिन अमेरिकी अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लांश ने एक बड़ा संकेत देते हुए कहा कि अमेरिका कई तरीकों से अपराधियों को न्याय के कटघरे में लाता है। उन्होंने इसी साल जनवरी का उदाहरण दिया, जब वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को अमेरिकी स्पेशल फोर्सेज (US Special Forces) ने वेनेजुएला की राजधानी से एक गुप्त ऑपरेशन के तहत पकड़ लिया था।
ट्रंप सरकार का दबाव या क्यूबा पर मिलिट्री एक्शन की तैयारी?
क्यूबा के वर्तमान राष्ट्रपति मिगुएल डियाज-कैनेल ने इस चार्जशीट पर बेहद तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर लिखा, "यह बिना किसी कानूनी आधार की एक विशुद्ध राजनीतिक कार्रवाई है। अमेरिका इस झूठे केस के जरिए क्यूबा पर एक सैन्य हमले (Military Aggression) की पृष्ठभूमि तैयार कर रहा है।" क्यूबा सरकार का दावा है कि 1996 की वो कार्रवाई 'कुख्यात आतंकवादियों' द्वारा उनकी हवाई सीमा के बार-बार उल्लंघन के खिलाफ 'कानूनी आत्मरक्षा' थी। वर्तमान परिदृश्य में, ट्रंप प्रशासन क्यूबा की समाजवादी सरकार पर आर्थिक और राजनीतिक दबाव बढ़ा रहा है। अमेरिका द्वारा लगाए गए कड़े ईंधन और व्यापारिक प्रतिबंधों के कारण इस समय क्यूबा अपने इतिहास के सबसे बुरे आर्थिक संकट से गुजर रहा है। पूरे द्वीप पर रोजाना कई घंटों का बिजली कट रही है और वहां भोजन और दवाओं की भारी किल्लत है। इस माहौल में कास्त्रो पर दर्ज यह केस अमेरिका-क्यूबा के बीच बची-खुची कूटनीति को भी खत्म कर सकता है।
