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इस्तीफे के बाद बढ़ गई पवार की सियासी 'पावर', 'रोटी पलटकर' खेल दिया सियासी दांव

  • Authored by: आलोक कुमार राव
  • Updated May 3, 2023, 12:44 PM IST

Sharad Pawar : शरद पवार ने करीब-करीब संकेत दे दिया है कि उनके बाद पार्टी की कमान उनकी बेटी सुप्रिया सुले के हाथ में रहेगी। पार्टी के नए अध्यक्ष का चुनाव करने के लिए पवार ने जिस समिति की घोषणा की है उसमें ज्यादातर उनके करीबी लोग हैं। जाहिर है कि वे शरद पवार की भावना का सम्मान करेंगे और अध्यक्ष पद पर सुप्रिया की ताजपोशी का रास्ता निकालेंगे।

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एनसीपी के अध्यक्ष पद से शरद पवार ने इस्तीफा दे दिया है।

Photo : PTI

Sharad Pawar : राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के मुखिया मंगलवार को जब पार्टी के नेताओं एवं कार्यकर्ताओं को संबोधित कर रहे थे तो किसी ने इस बात की उम्मीद नहीं की होगी कि वह अपने पद से इस्तीफा दे देंगे। राकांपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से इस्तीफे की पवार की घोषणा से सभी चकित हो गए। पवार ने अपने इस्तीफे की वजह भी बताई और कहा कि वे अपना ध्यान महाराष्ट्र एवं देश के मुद्दों पर केंद्रित करेंगे। पवार ने अपने इस्तीफे से आम लोगों एवं एनसीपी के कार्यकर्ताओं को भले ही झटका दिया हो लेकिन उनकी राजनीति करीब से समझने वालों के लिए यह हैरान करने वाला फैसला नहीं है।

पवार के हर सियासी फैसले का मतलब होता है

राजनीति के जानकारों का कहना है शरद पवार कोई भी सियासी फैसला ऐसे नहीं लेते। उनके हर निर्णय एवं फैसले का एक सियासी मतलब होता है। सियासत की शतरंज पर वह कौन सा पासा या मोहरा फेंकने वाले हैं इसकी जानकारी केवल उन्हीं की होती है। अपने चौंकाने वाले फैसले एवं दूरदर्शी राजनीति की वजह से उन्हें सियासत का 'चाणक्य' और 'मराठा क्षत्रप' कहा जाता है। वह राजनीति के मझे हुए खिलाड़ी हैं। सियासी जानकार मानते हैं कि इस्तीफा देकर उन्होंने एक तीर से कई शिकार किए हैं। भतीजे अजीत पवार की भाजपा के साथ बढ़ती नजदीकी की अटकलों के बीच उन्होंने अपने इस्तीफे का पास फेंककर कई चीजें अपने पक्ष में कर ली हैं।

समिति पवार की भावना का 'सम्मान' करेगी

पहला यह कि उन्होंने करीब-करीब संकेत दे दिया है कि उनके बाद पार्टी की कमान उनकी बेटी सुप्रिया सुले के हाथ में रहेगी। पार्टी के नए अध्यक्ष का चुनाव करने के लिए पवार ने जिस समिति की घोषणा की है उसमें ज्यादातर उनके करीबी लोग हैं। जाहिर है कि वे शरद पवार की भावना का सम्मान करेंगे और अध्यक्ष पद पर सुप्रिया की ताजपोशी का रास्ता निकालेंगे। दूसरा, पवार ने अपने भतीजे अजीत पवार को महाराष्ट्र की जिम्मेदारी सौंपी है। पवार का यह फैसला अजीत के पर कतरने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

शरद पवार ने 'रोटी पलट दी'

बीते एक महीने में मीडिया में ऐसी रिपोर्टों आईं कि अजीत पवार एनसीपी से अपने खेमे के विधायकों को लेकर भाजपा के साथ जुड़ सकते हैं। अटकल यह भी थी कि सीएम बनाए जाने को लेकर उनकी भाजपा के साथ एक 'डील' हुई है। भाजपा के साथ अजीत परिवार की बढ़ती नजदीकी महाराष्ट्र में बनती एवं बिगड़ती सियासत का संकेत देने लगी। इन्हीं सबके बीच सुप्रिया सुले ने बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि अगले 15 दिनों में दो बड़े सियासी 'धमाके' होंगे। इसके कुछ दिन बाद शरद पवार ने कहा कि 'रोटी पलटने का वक्त आ गया है।' शरद और सुप्रिया शायद इसी बदलाव का संकेत दे रहे थे। पवार के इस 'धमाके' के बाद एनसीपी में अगले कुछ दिनों में क्या बदलाव होंगे यह देखना दिलचस्प होगा।

पवार की सियासी 'पावर' बढ़ा देता है ऐसा फैसला

अजीत पवार एनसीपी से अलग होकर अपने गुट विधायकों के साथ अगर अलग रास्ता अपनाने की सोच रहे थे तो उनके मंसूबों को शरद पवार ने तगड़ा झटका दिया है। अपना इस्तीफा देकर उन्होंने पार्टी की सहानुभूति बटोर ली है। इस्तीफे के बाद पूरी एनसीपी शरद पवार के पीछे खड़ी हो गई है। इसका नजारा पवार के इस्तीफे के बाद देखने को मिला। कार्यक्रम में एनसीपी नेता एवं कार्यकर्ता रोने लगे। उन्होंने इस्तीफे का विरोध किया और पवार अपना फैसला वापस लेने की मांग की। जानकारी मानते हैं कि पवार ने अपने इस्तीफे के दांव से एनसीपी पर अपनी पकड़ और मजबूत कर ली है। यही राजनीतिक समझ एवं दूरदर्शिता पवार की 'पावर' को बढ़ा देता है।

आलोक कुमार राव
आलोक कुमार रावauthor

19 वर्षों से मीडिया जगत में सक्रिय आलोक राव ने प्रिंट, न्यूज एजेंसी, टीवी और डिजिटल चारों ही माध्यमों में काम किया है। इस लंबे अनुभव ने उन्हें समाचारों की समझ, प्रेजेंटेशन, डिटेलिंग और न्यूजरूम डायनेमिक्स में असाधारण दक्षता प्रदान की है। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों में विशेष रुचि रखने के साथ-साथ जियो-पॉलिटिक्स एवं डिफेंस की स्टोरीज में इनकी खासी दिलचस्पी है। आलोक ने अलग-अलग माध्यमों में काम करते हुए समाचारों की समझ, प्रस्तुति और विश्लेषण में मजबूत दक्षता विकसित की है और अब तक 25,000 से अधिक आर्टिकल तैयार कर चुके हैं। तथ्यों की गहन जांच, मजबूत न्यूज सेंस और तेज निर्णय क्षमता उनकी पत्रकारिता की प्रमुख खासियतें हैं।

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