India Project Kusha : युद्ध या संघर्ष के दौरान वायु रक्षा प्रणाली यानी एयर डिफेंस सिस्टम की कितनी अहमियत होती है, यह 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान देखने को मिल गया। इतने बड़े स्तर पर भारत में अभी इस तरह से एयर डिफेंस सिस्टम को सक्रिय नहीं किया गया था लेकिन ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तानी हवाई हमलों को नाकाम करने में इस सिस्टम ने कमाल का काम किया जिसकी तारीफ हर कोई कर रहा है। पुंछ, राजौरी जैसे नियंत्रण रेखा की कुछ जगहों को अगर छोड़ दिया जाया तो पाकिस्तान के ड्रोन, मिसाइल, फाइटर प्लेन जैसे आसमानी खतरों को भारतीय एयर डिफेंस सिस्टम ने बहुत हद तक हवा में ही नाकाम कर दिया। इन आसमानी खतरों को निष्क्रिय करने में भारत की कई एयर डिफेंस प्रणालियां सक्रिय थीं। इनमें एस-400, आकाश, आकाशतीर, बराक-8, शिल्का और एल-70 जैसे एयर डिफेंस सिस्टम प्रमुख तौर पर हैं जिन्होंने आसमानी खतरों को ध्वस्त किया।
DRDO विकसित कर रहा 'प्रोजेक्ट कुशा'
भविष्य के खतरों और युद्धों को देखते हुए एयर डिफेंस सिस्टम की भूमिका काफी अहम मानी जा रही है। यानी जिसके पास एयर डिफेंस सिस्टम जितना मजबूत और शक्तिशाली होगा, वह देश उतना ही दुश्मन पर भारी पड़ेगा और खुद को सुरक्षित रख पाएगा। भारत भी इस बात को समझ रहा है। एयर डिफेंस सिस्टम की इसी उपयोगिता और प्रासंगिकता को समझते हुए भारत अपना एक स्वदेशी एयर डिफेंस सिस्टम तैयार कर रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक भारत के इस प्रोजेक्ट का नाम 'कुशा' है जिसे रक्षा विकास एवं अनुसंधान संगठन (डीआरडीओ) विकसित कर रहा है। यह एयर डिफेंस सिस्टम रूस से मंगाए गए S-400 जैसा होगा, यह उससे बेहतर भी हो सकता है। खास बात यह है कि 'प्रोजेक्ट कुशा' पूरी तरह से भारतीय यानी स्वदेशी होगा। इसमें S-400 जैसी खूबियां होंगी और यह देश के एयर डिफेंस सिस्टम का एक मजबूत स्तंभ होगा।

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इसमें कई तरह की इंटरसेप्टर मिसाइलें लगी होंगी
रिपोर्टों के मानें तो एयर डिफेंस सिस्टम 'कुशा' में कई तरह की रक्षा प्रणालियां काम करेंगी। इसमें अलग-अलग दूरी जैसे 150 किलोमीटर, 250 किलोमीटर और 350 किलोमीटर से आने वाले आसमानी खतरों को मार गिराने के लिए इंटरसेप्टर मिसाइलें लगी होंगी। ये मिसाइलें ड्रोन, स्टील्थ फाइटर, क्रूज मिसाइल और बैलिस्टिक मिसाइल सभी तरह के हवाई खतरों को मार गिराने में सक्षम होंगी। एस-400 भी यही काम करता है। आसमानी खतरों को निष्क्रिय करने के लिए उसमें भी अलग-अलग तरह की मिसाइलें लगी होती हैं। लेकिन बात बस इतनी भर नहीं है। डीआरडीओ की योजना 'प्रोजेक्ट कुशा' को कई स्तरों पर ले जाना है।
अभी इसके प्रोटोटाइप पर काम कर रहा DRDO
डीआरडीओ अभी इसके प्रोटोटाइप पर काम कर रहा है जिसमें करीब 12 से 18 महीने लगेंगे। प्रोटोटाइप के आ जाने पर सेनाएं अलग-अलग जगहों पर इसकी टेस्टिंग करेंगी और फिर इसमें कई बदलाव होंगे। कुल मिलाकर 'प्रोजेक्ट कुशा' का पहला वर्जन आने में कम से कम चार से पांच साल का समय लग सकता है। यही नहीं रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि डीआरडीओ 'प्रोजेक्ट कुशा' के कई चरणों पर काम कर रहा है। यानी इसे S-400 जिसे भारत में 'सुदर्शन चक्र' नाम दिया गया है, इसे उससे भी आगे ले जाने की योजना है। कुशा के फेज टू और फेज तीन वैरिएंट में इसकी मारक क्षमता रूस के आधुनिक एवं उन्नत एयर डिफेंस सिस्टम S-500 से भी आगे ले जानी की योजना है। यानी की भारत का पूरी तरह से स्वदेशी एयर डिफेंस सिस्टम हाइपरसोनिक गति वाली मिसाइलों को भी नष्ट कर पाएगा। जाहिर है 'प्रोजेक्ट कुशा' भारत का एक महात्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है। इसकी सफलता रक्षा क्षेत्र में भारत की धाक जमा देगी। साथ ही यह रक्षा उत्पादन में भारत की आत्म-निर्भरता का एक बड़ा उदघोष होगा।

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AMCA प्रोजेक्ट पर भी काम कर रहा भारत
भारत सरकार का अब पूरा जोर अपनी रक्षा जरूरतों को स्वदेशी तरीके से पूरा करने पर है। हथियार, रक्षा उपकरण, रक्षा प्रणालियां सभी देश में बन रहे हैं। पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों के लिए स्वदेशी एडवांस्ड मल्टीरोल फाइटर एयरक्राफ्ट यानी AMCA पर काम चल रहा है। हालांकि, अभी इसमें भी 15 से 20 साल लगेंगे। भविष्य के युद्धों में वायु सेना और एयर डिफेंस सिस्टम की भूमिका बहुत बड़ी होगी। इसलिए आपका अटैक और डिफेंस दोनों शानदार होना चाहिए। ये ऐसे होने चाहिए जिनका तोड़ दुश्मन के पास न हो। दुश्मन देशों चीन और पाकिस्तान दोनों के हथियारों की मारक क्षमता देखते हुए यह जरूरी है कि भारत अपनी रक्षा तैयारियों को लगातार आगे बढ़ाता रहे।
