Bengal bypolls: नंदीग्राम और रेजीनगर में मंगलवार को होने वाला मतदान महज दो विधानसभा सीटों पर उपचुनाव नहीं है। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के 15 साल के शासन का अंत कर सत्ता में आई भारतीय जनता पार्टी के लिए यह पहला चुनावी परीक्षण है। साथ ही, इन उपचुनावों से यह भी संकेत मिलने की उम्मीद है कि बिखरे हुए विपक्ष में कौन-सी पार्टी भाजपा के सामने प्रमुख चुनौती के रूप में उभर सकती है। इन उपचुनावों से मई में सत्ता संभालने के बाद भाजपा सरकार के प्रति मतदाताओं की शुरुआती प्रतिक्रिया का अंदाजा मिलेगा। वहीं, विपक्षी दल बिखरे हुए राजनीतिक मैदान में अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रहे हैं। सत्तारूढ़ दल और उसके प्रतिद्वंद्वी चुनाव में अल्पसंख्यक मतदाताओं के मतदान रुझान को भी समझने की कोशिश कर रहे हैं। दोनों विधानसभा क्षेत्रों में छह अक्टूबर को मतदान होगा और मतगणना नौ अक्टूबर को होगी।
नंदीग्राम पर सबकी नजरें
मई में भाजपा ने 15 साल के तृणमूल शासन को समाप्त कर सत्ता हासिल की थी और उसके बाद ये पहले चुनाव हैं। हालांकि, इन उपचुनावों को चार महीने पुरानी सरकार के प्रदर्शन पर जनादेश नहीं माना जा सकता, लेकिन इनसे सरकार के कामकाज और उसकी नीतिगत पसंद को लेकर जनता की शुरुआती प्रतिक्रिया के संकेत जरूर मिल सकते हैं। नंदीग्राम का चुनाव राजनीतिक रूप से अधिक प्रतीकात्मक महत्व रखता है। नंदीग्राम वह क्षेत्र है, जो ममता बनर्जी के भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन का केंद्र रहा था। इस आंदोलन ने 2011 में तृणमूल के सत्ता में आने का रास्ता तैयार करने में अहम भूमिका निभाई थी। 2021 में भाजपा के शुभेंदु अधिकारी ने इसी सीट पर बनर्जी को हराया था।
नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों सीटों से जीत शुभेंदु अधिकारी
शुभेंदु अधिकारी ने 2026 के विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों सीटों से जीत हासिल की थी और मुख्यमंत्री बनने के बाद भवानीपुर सीट बरकरार रखी, जिसके कारण नंदीग्राम में उपचुनाव की जरूरत पड़ी। भाजपा ने चंद्रनाथ रथ की मां हासिरानी रथ को उम्मीदवार बनाया है। चंद्रनाथ, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के करीबी सहयोगी थे। विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत के दो दिन बाद छह मई को चंद्रनाथ की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल धड़े की उम्मीदवार संचित प्रधानी डे ने शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात के बाद अपना नाम वापस ले लिया। इसके बाद बनर्जी के पास अपना कोई उम्मीदवार नहीं बचा और उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान का समर्थन किया। उन्होंने इसे इंडिया गठबंधन को मजबूत करने की कोशिश बताया।
प्रधान को 2007 के नंदीग्राम भूमि अधिग्रहण आंदोलन से जुड़े पुराने मामलों में गिरफ्तार किया गया था, लेकिन बाद में उन्हें अंतरिम जमानत मिल गई और वह चुनाव प्रचार में लौट आए। ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल के प्रतिद्वंद्वी धड़े ने मोहम्मद एतेशामुल हक को लिफाफा चुनाव चिह्न और एक अलग अस्थायी पार्टी पहचान के साथ मैदान में उतारा है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) ने शांतिगोपाल गिरि को उम्मीदवार बनाया है। इस तरह नंदीग्राम का चुनाव रणनीतिक सहयोग की परीक्षा बन गया है। ममता बनर्जी का धड़ा कांग्रेस को अपना समर्थन देने की कोशिश कर रहा है, जबकि भाजपा विधानसभा चुनाव में हासिल अपनी बढ़त बरकरार रखने की उम्मीद कर रही है।
रेजीनगर में राजनीतिक समीकरण अलग
रेजीनगर में राजनीतिक समीकरण अलग है। यह सीट उस समय खाली हुई जब 2026 के विधानसभा चुनाव में रेजीनगर और नवादा दोनों सीटों से जीतने वाले हुमायूं कबीर ने नवादा सीट बरकरार रखी। उनकी पार्टी आम जनता उन्नयन पार्टी (एजेयूपी) ने उनके बेटे गुलाम नबी आजाद को उम्मीदवार बनाया है। कबीर ने रेजीनगर सीट करीब 59,000 मतों के अंतर से जीती थी। चुनाव मैदान में भाजपा के उम्मीदवार और मुर्शिदाबाद जिले के पूर्व अध्यक्ष सखराव सरकार, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल धड़े के उम्मीदवार रबीउल आलम चौधरी, तृणमूल के प्रतिद्वंद्वी धड़े के उम्मीदवार सफीउज्जमान शेख, कांग्रेस उम्मीदवार मोहम्मद अब्दुल्लाहिल काफी और माकपा के सैयद असद अली शामिल हैं। रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (आरएसपी) ने अपने उम्मीदवार विकास चंद्र मिश्रा का नाम वापस ले लिया। पार्टी ने पारंपरिक हंसिया-हथौड़ा चुनाव चिह्न के बजाय बाल्टी का चिह्न आवंटित किए जाने के निर्वाचन आयोग के फैसले पर आपत्ति जताई थी। एजेयूपी ने भी अपनी सीटी के चुनाव चिह्न को बदलकर मेज किए जाने पर आपत्ति जताई।
नंदीग्राम रणनीतिक सहयोग की परीक्षा
ममता बनर्जी के धड़े को उस समय अनिश्चितता का सामना करना पड़ा जब चौधरी ने कार्यकर्ताओं पर दबाव और नयी पहचान के तहत प्रचार में मुश्किलों का हवाला देते हुए चुनाव से हटने की घोषणा कर दी। हालांकि, पार्टी प्रमुख के साथ बातचीत के बाद उन्होंने अपना फैसला बदल दिया। इस उपचुनाव में अगर नंदीग्राम रणनीतिक सहयोग की परीक्षा है, तो रेजीनगर बिखराव और संगठनात्मक मजबूती की परीक्षा है। कांग्रेस के लिए दोनों सीटों की परिस्थितियां अलग-अलग हैं। नंदीग्राम में उसे बनर्जी का समर्थन प्राप्त है, जबकि रेजीनगर में वह स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ रही है। कांग्रेस नेता प्रदीप भट्टाचार्य ने कहा कि पार्टी को तृणमूल के हाथों गंवाई अपनी राजनीतिक जमीन फिर हासिल करनी चाहिए, जबकि अधीर रंजन चौधरी ने संगठन को फिर से मजबूत करने पर जोर दिया है।
ममता बनर्जी के धड़े के लिए रेजीनगर एक परीक्षा
ममता बनर्जी के धड़े के लिए रेजीनगर यह परीक्षा है कि क्या वह तृणमूल के परिचित नाम और चुनाव चिह्न के बिना भी अपना जनाधार बनाए रख सकता है। वहीं, प्रतिद्वंद्वी धड़ा तृणमूल की राजनीतिक विरासत पर अपना दावा मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। भाजपा खासकर रेजीनगर में अपना जनाधार बढ़ाने की कोशिश कर रही है, जहां अल्पसंख्यक मतदाताओं की संख्या काफी अधिक है। शुभेंदु अधिकारी ने उपचुनाव को इस बात की परीक्षा के रूप में पेश किया है कि क्या अल्पसंख्यक मतदाता भाजपा के विकास के एजेंडे का समर्थन करते हैं। (PTI Input)
