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BJP में कितना ताकतवर है राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद, क्या कहता है भाजपा का संविधान?

बीजेपी के संविधान में राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव और भूमिका को लेकर विस्तार से लिखा गया है। नितिन नबीन अब बीजेपी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और भाजपा के संविधान के अनुसार आज पार्टी के सर्वोच्च प्रशासक भी। आइए जानते हैं BJP के संविधान में राष्ट्रीय अध्यक्ष को लेकर क्या-क्या कहा गया है।

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नितिन नबीन के पास कितनी पावर

नितिन नबीन, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बन चुके हैं। इससे पहले वो कार्यकारी अध्यक्ष थे। नितिन नबीन की भाजपा के अध्यक्ष पद पर ताजपोशी निर्विरोध हुई है। मतलब उनके खिलाफ कोई चुनाव में उतरा ही नहीं। इनका बीजेपी का नेशनल प्रेसिडेंट बनना लगभग उसी दिन तय हो गया था, जिस दिन इन्हें भारतीय जनता पार्टी का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष घोषित किया गया था। बस कहने के लिए चुनाव की औपचारिकता बची हुई थी। जो मंगलवार को पूरी हो गई। अब नितिन नबीन बीजेपी के नेशनल प्रेसिडेंट बन गए हैं। अब सवाल ये है कि भाजपा में राष्ट्रीय अध्यक्ष की भूमिका क्या है, उनके पास कितनी ताकत होती है, भाजपा का संविधान, अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष की शक्तियों को लेकर क्या कहता है? आइए इसे जानते हैं।

कैसे होता है बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव?

बीजेपी के संविधान की धारा–19 में राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव के नियम तय किए गए हैं। जिसमें कहा गया है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव पार्टी के एक विशेष निर्वाचक मंडल द्वारा किया जाता है। इस निर्वाचक मंडल में राष्ट्रीय समिति के सभी सदस्य और क्षेत्र परिषद के निर्धारित सदस्य शामिल होते हैं।

  • राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की पूरी प्रक्रिया राष्ट्रीय कार्यकारिणी द्वारा तय किए गए नियमों के अनुसार संपन्न कराई जाती है।
  • राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए वही व्यक्ति पात्र होता है, जिसने कम से कम चार कार्यकाल तक प्रादेशिक सदस्य के रूप में कार्य किया हो और जो कम से कम 15 वर्षों तक पार्टी का प्राथमिक सदस्य रहा हो।
  • निर्वाचक मण्डल में से कोई भी बीस सदस्य राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के चुनाव की अर्हता रखने वाले व्यक्ति के नाम का संयुक्त रूप से प्रस्ताव कर सकेंगे। यह संयुक्त प्रस्ताव कम-से-कम ऐसे पांच प्रदेशों से आना जरूरी है जहां राष्ट्रीय परिषद के चुनाव संपन्न हो चुके हो। नामांकन पत्र पर उम्मीदवार की स्वीकृति आवश्यक होगी।
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भाजपा के नए अध्यक्ष नितिन नबीन का स्वागत करते हुए पीएम मोदी (फोटो- BJP)

भाजपा में राष्ट्रीय अध्यक्ष की भूमिका

किसी भी राजनीतिक पार्टी में राष्ट्रीय अध्यक्ष की भूमिका सबसे बड़ी और अहम होती है। राष्ट्रीय अध्यक्ष की एक तरह से पार्टी का सर्वेसर्वा होता है। संगठन से लेकर सरकार तक पर उसकी पकड़ होती है। पार्टी की दिशा, रणनीति तथा विचारधारा को मजबूती देने का कार्य राष्ट्रीय अध्यक्ष के जिम्मे ही होता है। बीजेपी चूंकि आज की तारीख में दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी है, इसलिए यहां पर राष्ट्रीय अध्यक्ष की भूमिका और बड़ी हो जाती है। 14 करोड़ से ज्यादा कार्यकर्ताओं वाली BJP का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनना और उसे आगे लेकर जाना अपने आप में एक बड़ी भूमिका की ओर इंगित करता है।

  • पार्टी का सर्वोच्च संगठनात्मक पदाधिकारी होता है।
  • बीजेपी की विचारधारा और नीतिगत दिशा तय करने में प्रमुख भूमिका निभाता है।
  • लोकसभा, विधानसभा और अन्य चुनावों की रणनीति तैयार करता है।
  • चुनाव प्रचार और अभियान की निगरानी करता है।
  • उम्मीदवार चयन प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाता है।
  • प्रदेश अध्यक्षों की नियुक्ति और संगठनात्मक चुनावों की देखरेख करता है।
  • पार्टी के मोर्चों और प्रकोष्ठों के कामकाज की समीक्षा करता है।
  • बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत और सक्रिय रखने की जिम्मेदारी निभाता है।
  • राष्ट्रीय कार्यकारिणी और संसदीय बोर्ड के साथ समन्वय करता है।
  • पार्टी और केंद्र/राज्य सरकारों के बीच सेतु का काम करता है।
  • सरकार के नीतिगत फैसलों पर संगठन की राय नेतृत्व तक पहुंचाता है।
  • कार्यकर्ताओं की समस्याएं और अपेक्षाएं शीर्ष नेतृत्व के सामने रखता है।
  • विपक्ष से राजनीतिक मुकाबले की रणनीति बनाता है।
  • राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी का प्रमुख चेहरा और प्रवक्ता बनकर उभरता है।
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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साथ नितिन नबीन (फोटो- NitinNabinBJP)

अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष पर क्या कहता है बीजेपी का संविधान?

पदाधिकारियों के अधिकार और उत्तरदायित्व में अध्यक्ष के कार्यों को लेकर बीजेपी के संविधान में लिखा गया है। राष्ट्रीय अध्यक्ष की भूमिका राष्ट्रीय कार्यकारणी में भी अहम है। कोई व्यक्ति लगातार तीन कार्यकाल से अधिक अध्यक्ष पद पर नहीं रह सकेगा।

  1. सम्बन्धित समिति अथवा परिषद की बैठकों की अध्यक्षता करना।
  2. संविधान के अनुसार अपनी समिति / कार्यकारिणी के पदाधिकारियों / सदस्यों को मनोनीत करना।
  3. विभिन्न पदाधिकारियों तथा समिति / कार्यकारिणी के सदस्यों के बीच कार्य एवं उत्तरदायित्व का विभाजन करना।
  4. अनिवार्य परिस्थिति में समिति / कार्यकारिणी के अधिकार का उपयोग करना। पर आपातस्थिति में लिए गए निर्णय पर अगली बैठक में ही स्वीकृति लेना आवश्यक होगा।
  5. अन्य दलों से बातचीत में भाग लेना या उस कार्य के लिए अपने दल के प्रतिनिधि मनोनीत करना।
  6. अपनी समिति /कार्यकारिणी की बैठक की तिथि निश्चित करना और संविधान में उल्लिखित अवधि के भीतर बैठक का आयोजन करना।
  7. अपनी इकाई के विभिन्न मोचों के अध्यक्ष एवं प्रकोष्ठों के संयोजक की सिफारिश / नियुक्ति करना और उनके कार्य का ताल मेल बैठाना।
  8. अपनी इकाई, समिति /कार्यकारिणी द्वारा आयोजित विभिन्न कार्यकर्ता, अध्ययन शिविरों व प्रशिक्षण सम्मेलनों का संचालन करना।
  9. पार्टी की संगठनात्मक ओर रचनात्मक गतिविधियों तथा आन्दोलनात्मक कार्यक्रमों को बढ़ाने के लिए इन कार्यक्रमों के कार्यान्वयन में समिति / कार्यकारिणी का मार्गदर्शन करना।
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बीजेपी अध्यक्ष का काम (फोटो- BJP)

राष्ट्रीय कार्यकारिणी में राष्ट्रीय अध्यक्ष की भूमिका

बीजेपी के संविधान की धारा–20 में राष्ट्रीय कार्यकारिणी का जिक्र है। राष्ट्रीय कार्यकारिणी में राष्ट्रीय अध्यक्ष की भूमिका सबसे अहम है।

  1. राष्ट्रीय कार्यकारिणी में अध्यक्ष तथा अधिक से अधिक 120 सदस्य होंगे, जिनमें कम-से-कम 40 महिलायें तथा 12 अनुसूचित जाति / जनजाति के सदस्य होंगे, जो अध्यक्ष द्वारा मनोनीत किये जायेंगे।
  2. अध्यक्ष द्वारा राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्यों में से अधिक से अधिक 13 उपाध्यक्ष, 9 महामंत्री, एक महामंत्री (संगठन), अधिक से अधिक 15 मंत्री तथा एक कोषाध्यक्ष को मनोनीत किया जायेगा। पदाधिकारियों में से कम-से-कम 13 महिलाएं होंगी और अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति में से प्रत्येक वर्ग में से कम-से-कम तीन पदाधिकारी होंगे।
  3. कार्यकारिणी के सदस्य वे व्यक्ति हो सकेंगे जो कम-से-कम तीन अवधियों तक सक्रिय सदस्य रहे हों। विशेष परिस्थितियों में राष्ट्रीय अध्यक्ष अधिक से अधिक 15 सदस्यों को इस शर्त से छूट दे सकेगा।
  4. आवश्यकता होने पर राष्ट्रीय अध्यक्ष महामंत्री संगठन की सहायता के लिए एक या अधिक संगठन मंत्रियों की नियुक्ति कर सकते हैं और प्रदेश अध्यक्ष को भी ऐसी नियुक्तियों की अनुमति दे सकते हैं।
  5. आवश्यकतानुसार राष्ट्रीय अध्यक्ष दो या दो से अधिक प्रदेशों के संगठन कार्य के लिए क्षेत्रीय संगठन मंत्रियों की नियुक्ति कर सकते हैं और राज्य अध्यक्ष को राज्य स्तर पर दो या अधिक जिलों के लिए विभाग / संभाग संगठन मंत्रियो की नियुक्ति की अनुमति दे सकते हैं।
  6. राष्ट्रीय अध्यक्ष अपनी कार्यसमिति में कम-से-कम 25 प्रतिशत नए सदस्यों को स्थान देंगे। राष्ट्रीय कार्यकारणी में स्थायी आमंत्रित पदेन सदस्यों के अतिरिक्त विशेष आमंत्रितों की संख्या 30 प्रतिशत से अधिक नहीं होगी।
  7. राष्ट्रीय, प्रादेशिक तथा जिला स्तरों पर पूर्णकालिक कार्यकर्ता को ही महामंत्री (संगठन) के पद पर नियुक्त किया जायेगा। पद मुक्त होने के दो वर्ष बाद ही वह किसी भी चुनाव में भाग लेने के लिए अर्ह माना जायेगा।
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भाजपा के पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष अटल बिहारी वाजपेयी (फोटो- BJP)

एक नजर में भाजपा के नए अध्यक्ष नितिन नबीन

नितिन नबीन ने 2006 में पहली बार पटना पश्चिम विधानसभा से विधायक के रूप में राजनीति में कदम रखा। इसके बाद 2010 में वे बांकीपुर क्षेत्र से विधानसभा पहुंचे और तब से लगातार इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। 2021 में उन्हें पहली बार बिहार सरकार में मंत्री बनने का अवसर मिला, तब उन्हें पथ निर्माण विभाग का जिम्मा सौंपा गया, जिसमें उन्होंने सराहनीय कार्य किए। इसके बाद से वे एनडीए सरकार में लगातार मंत्री पद पर कार्यरत रहे। संगठनात्मक क्षेत्र में भी नितिन नबीन की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। 2010 से 2013 तक वे भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय महामंत्री रहे, जबकि 2016 से 2019 तक उन्होंने युवा मोर्चा के बिहार प्रदेश अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। इसके अलावा वे राष्ट्रीय कार्यसमिति सदस्य और युवा मोर्चा के सह प्रभारी भी रह चुके हैं। उनके कुशल संगठनात्मक नेतृत्व को देखते हुए उन्हें विभिन्न राज्यों में संगठन और चुनाव प्रभारी के दायित्व निभाने का अवसर भी मिला। नितिन नबीन को 14 दिसंबर को भाजपा का कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया गया था।

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