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BJP में कितना ताकतवर है राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष का पद, जो आया है नितिन नबीन के हिस्से; क्या कहता है भाजपा का संविधान?

भारतीय जनता पार्टी का संगठनात्मक ढांचा बेहद अनुशासित और संविधान-आधारित माना जाता है। ऐसे में राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष जैसे पद पर किसी नेता की नियुक्ति केवल औपचारिक नहीं होती, बल्कि इसके राजनीतिक, संगठनात्मक और भविष्यगत संकेत भी होते हैं। हाल ही में नितिन नबीन को इस पद पर जिम्मेदारी मिली है। नितिन नबीन को पार्टी के भीतर अनुशासित, जमीनी और संगठन-केंद्रित नेता माना जाता है।

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नितिन नवीन के पास कितनी जिम्मेदारियां?
Curated by: Shishupal Kumar
Updated Dec 16, 2025, 17:14 IST
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बीजेपी ने हाल ही में एक चौंकाने वाला फैसला लेते हुए नितिन नबीन को भाजपा का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष घोषित कर दिया। नितिन नबीन इस पद पर आने वाले सबसे युवा नेता हैं। नितिन नबीन इस घोषणा से पहले कभी भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व का हिस्सा नहीं थे, बिहार की राजनीति के बड़े नाम थे और नीतीश सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। हालांकि नितिन नबीन अभी सिर्फ कार्यकारी अध्यक्ष ही हैं, राष्ट्रीय अध्यक्ष नहीं बने हैं, लेकिन ताकत के मामले में आज वो एक राष्ट्रीय अध्यक्ष की तरह ही ताकतवर हो गए हैं। हो सकता है कि बाद में नितिन नबीन को राष्ट्रीय अध्यक्ष की भी कुर्सी मिल जाए, जैसे जेपी नड्डा पहले कार्यकारी अध्यक्ष ही बनाए गए थे, बाद में राष्ट्रीय अध्यक्ष की कुर्सी उन्हें मिली थी। अब सवाल ये है कि बीजेपी में राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष के पास क्या-क्या जिम्मेदारियां होती हैं, क्या पावर होते हैं? बीजेपी के संविधान में राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष को लेकर क्या कहा गया है, आइए जानते हैं।

बीजेपी में कितना पावरफुल है राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष का पद?

बीजेपी में राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष का पद औपचारिक रूप से सर्वोच्च नहीं है, लेकिन व्यावहारिक राजनीति में इसे कमजोर भी नहीं माना जाता। पार्टी के संविधान के अनुसार अंतिम संगठनात्मक अधिकार राष्ट्रीय अध्यक्ष के पास होते हैं। इसके बावजूद राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष पार्टी की निर्णय प्रक्रिया के बेहद करीब रहता है। यह भूमिका राष्ट्रीय कार्यकारिणी के कामकाज के समन्वय, बैठकों के एजेंडे और राज्यों से आने वाले संगठनात्मक व राजनीतिक फीडबैक को शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचाने में अहम होती है। यही वजह है कि इस पद पर बैठा नेता संगठन के मूड, जमीनी हालात और चुनावी तैयारियों को आकार देने में अप्रत्यक्ष लेकिन प्रभावी भूमिका निभाता है। इस पद की वास्तविक ताकत संविधान से ज्यादा नेतृत्व के भरोसे और संगठन पर पकड़ से आती है। अगर शीर्ष नेतृत्व का विश्वास हो, तो राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष राज्यों में संगठनात्मक विवाद सुलझाने, चुनावी रणनीति के क्रियान्वयन और पार्टी के बड़े फैसलों की तैयारी में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। चुनावी समय में यह भूमिका और भी प्रभावशाली हो जाती है, क्योंकि संगठन और नेतृत्व के बीच समन्वय सबसे ज्यादा जरूरी होता है।

राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष पर क्या कहता है बीजेपी का संविधान?

बीजेपी के संविधान में संगठन की सर्वोच्च शक्ति राष्ट्रीय अध्यक्ष के पास निहित मानी गई है। संविधान में सीधे तौर पर “राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष” को एक स्वतंत्र, सर्वाधिकार संपन्न पद के रूप में परिभाषित नहीं किया गया है। यह पद मूलतः राष्ट्रीय अध्यक्ष की सहायता और संगठनात्मक कामकाज को सुचारु बनाने के उद्देश्य से बनाया गया माना जाता है। संविधान के मुताबिक, पार्टी की नीतियां तय करने, प्रस्ताव पारित करने और राजनीतिक दिशा निर्धारित करने का अधिकार राष्ट्रीय कार्यकारिणी के पास होता है, यह संस्था भी राष्ट्रीय अध्यक्ष के नेतृत्व में काम करती है। राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष इसी ढांचे के भीतर कार्य करता है। इस तरह, बीजेपी का संविधान राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष को निर्णय लेने वाला सर्वोच्च पद नहीं बनाता, लेकिन उसे संगठन की निर्णय प्रक्रिया के बेहद करीब रखता है। वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करता है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष और शीर्ष नेतृत्व उस पदधारी को कितनी जिम्मेदारी और भरोसा सौंपता है।

nitin nabin amit shah.

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नितिन नबीन को क्यों मिला राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष का पद?

नितिन नबीन बिहार से आते हैं और यह राज्य बीजेपी की राष्ट्रीय राजनीति में बेहद अहम है। 2025–26 के चुनावी चक्र को देखते हुए पार्टी पूर्वी भारत में संगठन को और मजबूत करना चाहती है। उनकी नियुक्ति से यह संदेश जाता है कि बीजेपी बिहार और आसपास के राज्यों को संगठनात्मक रूप से ज्यादा तवज्जो दे रही है। नितिन नबीन उम्र के लिहाज से अपेक्षाकृत युवा हैं, लेकिन संगठन और विधायी राजनीति-दोनों का अनुभव रखते हैं। बीजेपी लंबे समय से युवा नेतृत्व को ऊपर लाने की रणनीति पर काम कर रही है और यह नियुक्ति उसी नीति का हिस्सा मानी जा रही है। राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष का काम अक्सर नीतिगत फैसलों को जमीन पर उतारने और राज्यों से फीडबैक लेकर नेतृत्व तक पहुंचाने का होता है। नितिन नबीन की पहचान ऐसे नेता की है जो संगठन और कार्यकर्ताओं के साथ सीधा संवाद रखते हैं, जिससे वे इस भूमिका के लिए उपयुक्त माने गए। बीजेपी में इस तरह की नियुक्तियां अक्सर भविष्य की बड़ी जिम्मेदारियों का ट्रायल मानी जाती हैं। नितिन नबीन को राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाना संकेत देता है कि पार्टी उन्हें आने वाले वर्षों में और बड़े संगठनात्मक या राजनीतिक रोल के लिए तैयार कर रही है।

राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष के तौर पर नितिन नबीन की जिम्मेदारियां

नितिन नबीन के पास इस समय बीजेपी की कई बड़ी जिम्मेदारियां है, जिसमें नए राष्ट्रीय अध्यक्ष पर का चुनाव भी है। जेपी नड्डा को जनवरी 2020 में भाजपा अध्यक्ष नियुक्त किया गया था और वह अपना कार्यकाल पूरा कर चुके हैं। नड्डा को 2024 के लोकसभा चुनावों तक पार्टी का नेतृत्व करने के लिए कार्यकाल विस्तार दिया गया था। इसके बाद नए अध्यक्ष का चुनाव होना था, लेकिन अभी तक हुआ नहीं है। अब चुनाव होने तक नितिन नबीन इस पद पर तो हैं ही, बहुत ज्यादा चांस है कि वो राष्ट्रीय अध्यक्ष भी बने। भाजपा में ऐसा पहले भी हो चुका है। 2019 में अमित शाह के पार्टी अध्यक्ष रहते हुए जेपी नड्डा को कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। फिर वह राष्ट्रीय अध्यक्ष बने।

nitin nabin nadda'.

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सरकार से लेकर संगठन तक में बड़ी भूमिका

नितिन नबीन 2006 में पहली बार पटना पश्चिम विधानसभा से विधायक बने और उसके बाद 2010 में बांकीपुर क्षेत्र से विधानसभा पहुंचे। इसके बाद से वे लगातार बांकीपुर का विधानसभा में प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। 2021 में उन्हें पहली बार बिहार सरकार में मंत्री बनने का मौका मिला। उन्हें उस समय पथ निर्माण मंत्री का दायित्व सौंपा गया और उन्होंने उल्लेखनीय कार्य किए। इसके बाद वे एनडीए सरकार में लगातार मंत्री बनते रहे हैं। फिलहाल वे पथ निर्माण और नगर विकास विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। संगठन में भी उन्होंने अपनी भूमिका निभाई है। 2010 से 2013 तक वे भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय महामंत्री की भूमिका निभाते रहे, तो 2016 से 2019 तक युवा मोर्चा के बिहार प्रदेश अध्यक्ष का दायित्व संभाला। वे राष्ट्रीय कार्यसमिति सदस्य, भारतीय जनता युवा मोर्चा, सह प्रभारी की भूमिका भी निभा चुके हैं। उनके कुशल सांगठनिक कार्यों को देखते हुए उन्हें कई राज्यों का संगठन और चुनाव प्रभारी का दायित्व भी निभाने का मौका दिया गया।

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