Nepal Flood: नेपाल में बुधवार सुबह (26 अगस्त 2026) आया 4.4 तीव्रता का भूकंप कुछ ही देर बाद एक बड़े आपदा में बदल गया। भूकंप दर्ज होने के करीब 15 मिनट बाद तिब्बत की ओर से भोटेकोशी नदी में अचानक बड़े पैमाने पर बाढ़ आने की सूचना मिली। देखते ही देखते बाढ़ का पानी भोटेकोशी से त्रिशूली और फिर मालेखु, मुग्लिन होते हुए देवघाट तक पहुंच गया। इस बाढ़ की चेतावनी समय पर नहीं मिल पाई, जिससे नेपाल में ऐसी तबाही मची कि लगभग 200 लोग मारे जा चुके हैं, हजार से ज्यादा लापता है, जिसमें 300 से ज्यादा भारतीय शामिल हैं।
प्रारंभिक तकनीकी आकलन के मुताबिक बाढ़ के साथ करीब 20 मिलियन क्यूबिक मीटर अतिरिक्त पानी आया। तेज बहाव के कारण कई हाइड्रोलॉजिकल स्टेशनों से डेटा आना भी बंद हो गया। आइए समझते हैं कि भूकंप के बाद करीब 10 घंटे में क्या-क्या हुआ।
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सुबह 8:37 बजे: भूकंप के झटके
सुबह 8:37 बजे 4.4 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। इसके करीब 3 मिनट बाद, 8:40 बजे स्याफ्रुबेसी स्थित हाइड्रोलॉजिकल मॉनिटरिंग सेंटर से आखिरी डेटा मिला। उस समय भोटेकोशी नदी का जलस्तर 1.62 मीटर था। यह स्तर सामान्य चेतावनी सीमा से काफी नीचे था। इस नदी के लिए चेतावनी स्तर 6 मीटर और खतरे का स्तर 9 मीटर निर्धारित है।
सुबह 8:50 बजे: नदी का डेटा गायब
सुबह 8:50 बजे स्याफ्रुबेसी केंद्र से नदी के जलस्तर का डेटा आना बंद हो गया। इसके बाद घटनाक्रम तेजी से बदलने लगा।
सुबह 9:05 बजे: तिब्बत से बाढ़ की खबर
सुबह 9:05 बजे तिब्बत की ओर से भोटेकोशी नदी में बड़े पैमाने पर बाढ़ आने की सूचना मिली।शुरुआती तकनीकी आकलन के मुताबिक बाढ़ का मुख्य प्रवाह तिब्बत की तरफ से आया और भोटेकोशी के रास्ते त्रिशूली नदी में पहुंचा। यहीं से नेपाल के कई नदी किनारे के इलाकों के लिए खतरा बढ़ गया।
सुबह 9:15 बजे: 6 लाख से ज्यादा SMS
खतरे को देखते हुए सुबह 9:15 से 9:16 बजे के बीच रसुवा, नुवाकोट, धादिंग और चितवन में नदी किनारे रहने वाले लोगों को SMS के जरिए हाई अलर्ट किया गया। इस दौरान 6 लाख से अधिक SMS भेजे गए, ताकि लोगों को समय रहते सुरक्षित स्थानों पर जाने की चेतावनी दी जा सके।
नेपाल में बाढ़ के बाद रेस्क्यू अभियान (फोटो- AP)
सुबह 9:20 बजे: एक और स्टेशन से डेटा बंद
सुबह 9:20 बजे बेत्रावती हाइड्रोमीटर से भी डेटा आना बंद हो गया। आखिरी रिकॉर्ड के मुताबिक यहां नदी का जलस्तर 3.55 मीटर था। लगातार दो मॉनिटरिंग स्टेशनों से डेटा का संपर्क टूटना बाढ़ की गंभीरता को समझने के लिहाज से महत्वपूर्ण था।
सुबह 10:28 बजे: हाईवे और नदी किनारे के इलाकों में अलर्ट
सुबह 10:28 बजे अनुमान लगाया गया कि बाढ़ धादिंग-गल्छी क्षेत्र तक पहुंच चुकी है और अगले कुछ घंटों में मुग्लिन को पार कर सकती है। इसके बाद पृथ्वी हाईवे, मुग्लिन-नारायणगढ़ सड़क और त्रिशूली नदी के किनारे के इलाकों में हाई अलर्ट जारी किया गया।
सुबह 11:26 बजे: खतरे के निशान से ऊपर पहुंचा पानी
सुबह 11:26 बजे फुर्के यानी मालेखु हाइड्रोलॉजिकल स्टेशन पर नदी का जलस्तर खतरे के स्तर से ऊपर पहुंच गया। महज कुछ ही मिनट बाद हालात और बिगड़ गए।
सुबह 11:43 बजे: पुल समेत कई ढांचे बहे
सुबह 11:43 बजे बाढ़ का तेज बहाव इतना शक्तिशाली हो गया कि फुर्के नदी पर बना पुल समेत कई संरचनाएं बह गईं। इसके सात मिनट बाद, 11:50 बजे, बाढ़ का पानी मालेखु बाजार के आसपास पहुंच गया।
दोपहर 1 बजे: बाढ़ ने मुग्लिन पार किया
दोपहर करीब 1 बजे बाढ़ के मुग्लिन पार करने की सूचना मिली। इसके बाद मुग्लिन से देवघाट तक नदी किनारे रहने वाले लोगों से सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की गई। अब खतरा सिर्फ स्थानीय इलाकों तक सीमित नहीं था, बल्कि नदी के निचले हिस्सों की ओर तेजी से बढ़ रहा था।
नेपाल में बाढ़ के बाद एक दृश्य (फोटो- AP)
दोपहर 1:30 बजे: देवघाट में बढ़ा जलस्तर
दोपहर 1:30 बजे देवघाट में नदी का जलस्तर 4.76 मीटर पहुंच गया। उस समय अनुमान लगाया गया कि बाढ़ का मुख्य प्रवाह करीब 3:30 बजे देवघाट पहुंचेगा और नदी का जलस्तर लगभग 8 मीटर तक जा सकता है।
दोपहर 2:14 बजे: कालिखोला में खतरे के निशान से ऊपर पानी
दोपहर 2:14 बजे कालिखोला हाइड्रोमीटर स्टेशन पर जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया। यहां अधिकतम जलस्तर 12.3 मीटर दर्ज किया गया।
दोपहर 3:20 बजे: नारायणी-देवघाट तक पहुंची बाढ़
दोपहर 3:20 बजे बाढ़ नारायणी-देवघाट क्षेत्र तक पहुंच गई। उस समय भी नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा था। इसके बाद शाम तक हालात अपने चरम पर पहुंचे।
शाम 4 बजे: देवघाट में पानी उच्चतम स्तर पर
शाम 4 बजे देवघाट में नदी का जलस्तर बढ़कर 6.57 मीटर के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। इसके बाद जलस्तर में गिरावट शुरू हुई।
शाम 6:30 बजे: खतरा घटने लगा
शाम 6:30 बजे तक देवघाट में नदी का जलस्तर घटकर करीब 4 मीटर रह गया। यानी सुबह भूकंप दर्ज होने से लेकर शाम तक करीब 10 घंटे में बाढ़ ने भोटेकोशी से त्रिशूली और फिर नारायणी-देवघाट तक का लंबा रास्ता तय किया।
नेपाल में रेस्क्यू अभियान (फोटो- AP)
कैसे समझें पूरा घटनाक्रम?
पूरे घटनाक्रम की सबसे अहम बात यह है कि भूकंप के कुछ ही मिनट बाद नदी में अचानक बाढ़ की सूचना मिली। शुरुआती तकनीकी आकलन में बाढ़ का मुख्य प्रवाह तिब्बत की तरफ से आने की बात सामने आई है। भोटेकोशी से शुरू हुआ पानी त्रिशूली नदी में पहुंचा और फिर मालेखु, मुग्लिन तथा देवघाट की ओर बढ़ता गया। रास्ते में कई हाइड्रोलॉजिकल स्टेशनों से डेटा मिलना बंद हुआ, जबकि दूसरी ओर प्रशासन ने SMS और अन्य चेतावनियों के जरिए नदी किनारे रहने वाले लोगों को अलर्ट किया। शाम तक देवघाट में जलस्तर घटने लगा, लेकिन इस पूरी घटना ने यह सवाल जरूर खड़ा किया कि भूकंप, अचानक नदी में बाढ़ और सीमावर्ती क्षेत्र से आने वाले तेज जलप्रवाह जैसे खतरों से निपटने के लिए रियल-टाइम निगरानी और चेतावनी व्यवस्था कितनी महत्वपूर्ण है। अगर नेपाल को सही समय पर चीन की ओर से जानकारी मिल पाती तो शायद इतनी क्षति नहीं होती।
