भारतीय वायुसेना का एक Antonov An-32 एयक्राफ्ट आज असम में क्रैश कर गया। Antonov An-32 एयक्राफ्ट एक ट्रांसपोर्ट विमान है, जिसे आज की तारीख में परिवहन के लिए भारतीय वायुसेना की रीढ़ कहा जाता है। वायुसेना सालों से एएन-32 का प्रयोग, सैन्य कर्मियों को लाने-ले जाने में, माल पहुंचाने में, हथियार पहुंचाने में यहां तक की रेस्क्यू मिशन में भी इस प्रयोग करती रही है। हाल के सालों में इसके रिप्लेस करने की बात कही गई है, लेकिन अभी इसके विकल्प के तौर पर जगह लेने वाले विमानों की वायुसेना के पास कमी है।
किस टाइप का है वायुसेना का Antonov An-32 एयक्राफ्ट?
Antonov An-32 एयक्राफ्ट अपनी पीढ़ी का चौथा उन्नत संस्करण है। AN-32 एंटोनोव एन-26 का अपग्रेड वर्जन है। मूल रूप से सोवियत संघ में विकसित यह एयरक्राफ्ट दो सिंगल-शाफ्ट टर्बोप्रॉप इंजनों से लैस है। इस विमान के इंजन इसके पंखों से 1.5 मीटर ऊपर लगाए गए हैं, ताकि उबड़-खाबड़ और कच्चे हवाई पट्टियों पर उतरते या उड़ान भरते समय जमीन पर मौजूद कंकड़-पत्थर या अन्य बाहरी वस्तुएं इंजन के अंदर न जा सकें और नुकसान से बचा जा सके। यह बेहद छोटे रनवे से भी शानदार टेक-ऑफ (उड़ान) भर सकता है और अत्यधिक ऊंचाई पर भी आसानी से काम कर सकता है। इस एयरक्राफ्ट को 21 देशों या तो यूज कर चुके हैं या यूज कर रहे हैं। 1977 में यह विमान दुनिया के सामने आया था और आखिरी An-32 का उत्पादन 2012 में हुआ था।
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Antonov An-32 एयक्राफ्ट की खासियत?
Antonov An-32 की सबसे बड़ी खासियत है कि यह किसी भी मौसम में उड़ान भर सकता है। यह परिवहन का कार्य तो कर ही सकता है, साथ ही जंग के मैदान में यह बमबारी भी कर सकता है। एन-32 विमान बहुत गर्म और ऊंचाई वाले इलाकों में भी बेहतरीन उड़ान भर सकता है। यह 55 डिग्री सेल्सियस जैसी भीषण गर्मी और समुद्र तल से 4,500 मीटर (लगभग 15,000 फीट) की ऊंचाई पर भी बिना किसी परेशानी के काम करता है। यह विमान कम और मध्यम दूरी के रास्तों पर सामान (माल) ढोने के लिए सबसे भरोसेमंद माना जाता है।
एन-32 का इस्तेमाल कई तरह के जरूरी कामों के लिए किया जाता है, जैसे:
- माल और रसद गिराना: संकट के समय आसमान से राशन या सैन्य सामान नीचे पहुंचाना।
- यात्रियों को लाना-ले जाना: सैनिकों या आम लोगों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाना।
- मेडिकल इमरजेंसी: बीमार या घायल लोगों को तुरंत अस्पताल पहुंचाना (एयर एम्बुलेंस के रूप में)।
- आग बुझाना: जंगलों या दुर्गम इलाकों में लगी आग पर काबू पाना।
- पैराशूटिंग: सेना के जवानों (पैराट्रूपर्स) और स्काईडाइवर्स को आसमान से छलांग लगाने में मदद करना।
भारत के पास कितने Antonov An-32?
भारत के पास Antonov An-32 1984 में आया था, तब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और तत्कालीन सोवियत संघ के नेता लियोनिद ब्रेझनेव के बीच इस विमान को लेकर समझौता हुआ था। भारत ने 125 Antonov An-32, सोवियत संघ से खरीदे थे, जो आज के यूक्रेन में बनाए गए थे। 125 में से 105 Antonov An-32 आज भी भारतीय वायुसेना की सेवा में है, जिन्हें अपग्रेड किया जा चुका है। देश की सबसे कठिन और ऊंची सरहदों-लद्दाख, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश-पर मुस्तैद भारतीय सेना के लिए यह विमान एक सच्चे संकटमोचक और 'लाइफलाइन' की भूमिका निभाता है।
An-32 दो इंजन वाला टर्बोप्रॉप मिलिट्री ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट (फोटो- IStock)
भारत के लिए कितना महत्वपूर्ण है Antonov An-32?
सोवियत काल के इस विमान को भारतीय वायुसेना में "सतलुज" के नाम से जाना जाता है। यह विमान पिछले चार दशकों से भारत की सामरिक परिवहन क्षमता की रीढ़ रहा है। इसकी सबसे बड़ी खूबी इसका मजबूत डिजाइन और बहुत कम जगह से टेक-ऑफ और लैंडिंग (STOL) करने की क्षमता है। यह विमान लद्दाख जैसी दुर्गम जगहों पर समुद्र तल से 10,000 फीट से अधिक की ऊंचाई पर बनी हवाई पट्टियों से भी आसानी से उड़ान भर सकता है। यही वजह है कि LAC और LoC पर तैनात भारतीय जवानों तक रसद और हथियार पहुंचाने के लिए यह वायुसेना का सबसे अचूक हथियार है। । 2013 की उत्तराखंड बाढ़ और 2015 के नेपाल भूकंप जैसी आपदाओं में इसने हजारों लोगों की जान बचाई। लेकिन समय के साथ पुराने होते ढांचे और विदेशी कल-पुर्जों पर निर्भरता के कारण इसके संचालन में दिक्कतें आ रही थीं। 2017 की कैग (CAG) रिपोर्ट के मुताबिक, मूल देश यूक्रेन के भू-राजनीतिक तनाव के चलते स्पेयर पार्ट्स नहीं मिल पा रहे थे, जिससे इस बेड़े की परिचालन क्षमता गिरकर महज 40% रह गई थी।
अबतक कितने IAF Antonov An-32 क्रैश हो चुके हैं?
भारत चार दशकों के इतिहास में लगभग 10 से अधिक बड़े हादसे हुए हैं। दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों, घने बादलों और अचानक बदलते खराब मौसम के कारण ये विमान कई बार दुर्घटनाग्रस्त हुए। इनमें तीन सबसे बड़े हादसे शामिल हैं: 2019 में अरुणाचल प्रदेश में विमान क्रैश हुआ, जिसमें 13 जवान शहीद हुए; 2016 में बंगाल की खाड़ी में एक विमान 29 लोगों के साथ लापता हो गया था, जिसका मलबा साल 2024 में समुद्र की गहराई में मिला; और 2009 में अरुणाचल में ही एक अन्य क्रैश में 13 कर्मियों की जान गई थी।
Antonov An-32 कब तक होगा रिप्लेस?
An-32 विमान साल 2032 से चरणबद्ध तरीके से रिटायर होना शुरू होंगे और साल 2040 तक भारतीय आसमान से इनकी पूरी तरह विदाई हो जाएगी। इसकी जगह लेने के लिए C-295 का निर्माण शुरू हो गया है। वायुसेना ने लगभग 60 से 80 नए मध्यम परिवहन विमानों (20 टन क्षमता वाले) की खरीद के लिए ₹1 लाख करोड़ के एक मेगा प्रोजेक्ट को हरी झंडी दी है। इस रेस में लॉकहीड मार्टिन का C-130J सुपर हरक्यूलिस और एम्ब्रेयर का KC-390 शामिल हैं। यह नया विमान भविष्य में मुख्य रूप से An-32 और इल्यूशिन-76 (Il-76) की जगह लेगा।
