C-295 miltary transport aircraft: रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने का जो सपना सरकार ने देखा है, वह अब साकार होने लगा है। रक्षा उत्पादन क्षेत्र में भारत एक-एक पायदान ऊपर चढ़ रहा है। इसी क्रम में उसने एक बड़ी और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। इस सप्ताह गुजरात के वडोदरा के आसमान में स्वदेश निर्मित पहले परिवहन सैन्य विमान C-295 ने सफलतापूर्वक उड़ान भरी। देश में यह पहली बार है जब निजी क्षेत्र के नेतृत्व में एक सैन्य एयरक्राफ्ट का निर्माण हुआ है। यह रक्षा उत्पादन में निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी और उसकी क्षमता को दर्शाता है। यह बताता है किरक्षा क्षेत्र में निजी क्षेत्र भागीदारी बढ़ने से भारत तेजी से आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को तेजी से हासिल कर सकता है। दरअसल, सितंबर 2021 में भारतीय वायु सेना (IAF) के लिए 56 C-295 परिवहन एयरक्राफ्ट की खरीद का सौदा 21,935 करोड़ रुपए में भारत सरकार और एयरबस डिफेंस एंड स्पेस के साथ हुआ था। इस सौदे के तहत यह तय हुआ कि एयरबस इन विमानों का निर्माण 'मेक इन इंडिया' के तहत करेगी।
एयरबस के सहयोग टाटा बनाएगी एयरक्राफ्ट
इनमें से 40 विमानों का निर्माण वडोदरा स्थित उत्पादन केंद्र में 'टाटा एडवान्स्ड सिस्टम्स लिमिटेड’ द्वारा’एयरबस’ के सहयोग से किया जाएगा। भारतीय वायुसेना ने भारत में निर्मित पहले सी-295 विमान की सफल पहली परीक्षण उड़ान के लिए इससे जुड़े पूरे दल को बधाई दी। वायुसेना ने बुधवार को कहा, 'यह उपलब्धि भारत की बढ़ती एयरोस्पेस क्षमताओं को और मजबूत करती है और 'आत्मनिर्भर भारत’ के दृष्टिकोण के तहत स्वदेशी रक्षा क्षमता को बढ़ावा देने के प्रति भारतीय वायुसेना की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।'
C 295 military aircraft
टैक्टिकल परिवहन विमान है C-295
C-295 एक मध्यम आकार वाला टैक्टिकल परिवहन विमान है। इसका निर्माण यूरोपीय देशों की कंपनी एयरबस करती है। सैनिकों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने, माल ढोने, आपात चकित्सा सेवाओं एवं उपकरणों को पहुंचाने के उद्देश्य से इसकी डिजाइनिंग की गई है। इसकी एक बड़ी खासियत है कि यह अर्ध-निर्मित एवं छोटे रनवे से भी टेकऑफ और लैंडिंग कर सकता है। दरअसल, इस तरह के एवरो HS-748 विमान भारतीय वायु सेना के पास पहले से हैं लेकिन अब ये पुराने हो गए हैं। ये विमान करीब छह दशक से IAF में हैं। अब इन्हें बदला जाना है। इसे देखते हुए भारत ने 56 एयरक्राफ्ट खरीदने का आदेश दिया।
पहला C-295 सितंबर 2023 में वायु सेना में शामिल हुआ
इस सौदे के तहत एयरबस 16 एयरक्राफ्ट बिल्कुल तैयार अवस्था में स्पेन से भेज रहा है। बाकी 40 एयरक्राफ्ट वडोदरा के टाटा एडवांस्ड सिस्टम संयंत्र में तैयार किए जाएंगे। स्पेन से आया पहला C-295 सितंबर 2023 में वायु सेना में शामिल हुआ। इसके बाद कई अन्य विमान आईएएफ में शामिल हो चुके हैं। वडोदरा से C-295 का सफलतापूर्वक उड़ान भरना यह दिखाता है कि इस संयंत्र की क्षमता विमानों के हिस्सों को जोड़ने से आगे बढ़कर उनकी उड़ान क्षमता की जांच तक पहुंच चुकी है। यानी यहां से एयरक्राफ्ट सीधे वायु सेना के पास पहुंचेंगे। यह बहुत बड़ी उपलब्धि है। इस संयंत्र का उद्घाटन अक्टूबर 2024 में हुआ।
एयरबस के लिए भी यह परियोजना बेहद खास
पहले रक्षा विमान परियोजनाओं में उत्पादन की मुख्य जिम्मेदारी प्रायः सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के पास होती थी, लेकिन C-295 कार्यक्रम ने पहली बार किसी निजी भारतीय कंपनी को राष्ट्रीय महत्व की सैन्य विमान परियोजना में केंद्रीय भूमिका दी है। एयरबस के लिए भी यह परियोजना बेहद खास है, क्योंकि कंपनी के इतिहास में पहली बार कोई पूर्ण सैन्य विमान यूरोप के बाहर निर्मित किया जा रहा है। एयरबस और टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स के अनुसार, इस कार्यक्रम में भारतीय उद्योग की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित की गई है। इसके तहत दर्जनों भारतीय कंपनियों का एक एयरोस्पेस विनिर्माण नेटवर्क तैयार हुआ है, जो विमान के पुर्जों, सब-असेंबली, टूल्स और विभिन्न प्रणालियों की आपूर्ति कर रही हैं।
C 295 military aircraft
आने वाले वर्षों में विमान में इस्तेमाल होने वाले हजारों पुर्जे भारतीय उद्योग से ही प्राप्त किए जाएंगे। यह विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र केवल गुजरात तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के कई राज्यों में फैले आपूर्तिकर्ताओं को भी जोड़ता है। उद्योग जगत के अधिकारियों का मानना है कि यह कार्यक्रम एयरोस्पेस क्षेत्र में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों रोजगार अवसर पैदा करेगा।
क्या है C-295 की खासियत?
C-295 एक बहुउद्देश्यीय सैन्य परिवहन विमान है, जो एक साथ 71 सैनिक, 50 पैराट्रूपर्स या लगभग 9 टन तक का भार ले जाने में सक्षम है। यह रेगिस्तानी इलाकों, तटीय क्षेत्रों और ऊंचाई वाले दुर्गम क्षेत्रों सहित विभिन्न भौगोलिक परिस्थितियों में प्रभावी ढंग से संचालन कर सकता है। भारतीय वायुसेना के लिए यह विमान सामरिक एयरलिफ्ट क्षमता को मजबूत करेगा, विशेष रूप से दूरदराज और कठिन क्षेत्रों में सैनिकों तथा सैन्य उपकरणों की आवाजाही के लिए। इसके अलावा मेडिकल इवैक्यूएशन, आपदा राहत, समुद्री निगरानी और विशेष अभियान जैसे कार्यों के लिए भी इसका इस्तेमाल हो सकता है।
