Parvez Muzaffar Phone Tape: पाकिस्तान आज लंबी-चौड़ी बातें कर रहा है, भारत को मात देने का झूठा दावा कर रहा है। इनका हाल आज से ऐसा नहीं है, हर जंग में ये हारते हैं और अपनी किताबों में जीत की कहानियां पढ़ाते हैं। आपको आज एक ऐसा ही दिलचस्प घटना के बारे में बताने जा रहे हैं, तब रॉ ने पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल परवेज मुशर्रफ, जो बाद में पाकिस्तानी के राष्ट्रपति बनें, उनका फोन टेप कर लिया था, वो भी तब जब मुशर्रफ बीजिंग में थे। मतलब चीन-पाकिस्तान दोनों को मात देते हुए रॉ ने ये कारनामा किया था। यह कहानी कारगिल युद्ध के समय की है।
कारगिल युद्ध और पाकिस्तान
पाकिस्तानी सेना के सैनिक और मुजाहिदीन लड़ाके अप्रैल 1999 में करगिल में चुपचाप घुस आए। उन्होंने नियंत्रण रेखा (LoC) पार कर भारतीय बंकरों पर कब्जा कर लिया और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मजबूत स्थिति बना ली। भारत को मई 1999 में इस घुसपैठ की जानकारी तब मिली, जब स्थानीय चरवाहों ने गतिविधियां देखीं। भारत ने सीधे पाकिस्तान को इसके लिए दोषी माना, लेकिन पाकिस्तान ने साफ तौर पर इनकार कर दिया। पाकिस्तान में तब नवाज शरीफ की सरकार थी और उन्होंने साफ कह दिया कि इसमें पाकिस्तान को कोई हाथ नहीं है, पाकिस्तान ने दावा किया कि ये कश्मीरी हैं।
- पाकिस्तान शुरू में यह कहता रहा कि लड़ाई में भाग लेने वाले "घुसपैठिए" कश्मीरी आतंकवादी हैं।
- लेकिन भारत ने सबूत दिए कि इन लड़ाकों में से कई पाकिस्तान की नियमित सेना (विशेष रूप से नॉर्दर्न लाइट इन्फैंट्री - NLI) के सैनिक थे।
- इस युद्ध में पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना झेलनी पड़ी, खासकर अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों से।
पाकिस्तान तब भी लगातार बोल रहा था झूठ
भारत एक तरफ करगिल से घुसपैठियों को मार भगाने के लिए जहां ऑपरेशन विजय चला रहा था, वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान को दुनिया भर में एक्सपोज कर रहा था। भारत का साफ दावा था कि ये घुसपैठिए नहीं बल्कि पाकिस्तानी सेना के जवान हैं, जो पाकिस्तान के इशारे पर भारत में घुसे हैं। पाकिस्तान को एक्सपोज करने में रॉ की बड़ी भूमिका रही और उसने पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल परवेज मुशर्रफ का ही फोन टेप कर लिया।

पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ
जब परवेज मुशर्रफ का फोन हुआ टेप
1999 के कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय खुफिया एजेंसी RAW (Research and Analysis Wing) ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल परवेज़ मुशर्रफ और उनके चीफ ऑफ जनरल स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल मोहम्मद अजीज़ के बीच एक गोपनीय टेलीफोन बातचीत को इंटरसेप्ट किया था। यह बातचीत उस समय की गई थी जब मुशर्रफ चीन की आधिकारिक यात्रा पर बीजिंग में थे और पाकिस्तान की सेना कारगिल में भारत के खिलाफ युद्ध चला रही थी।
मुशर्रफ के फोन टेप में क्या-क्या
- जनरल मुशर्रफ और अजीज़ ने बातचीत में खुलकर स्वीकार किया कि कारगिल की रणनीति पहले से तैयार थी और यह पूरी तरह सेना द्वारा संचालित की जा रही थी।
- बातचीत से पता चलता है कि कैसे NLI (Northern Light Infantry) के सैनिक भारत के अंदर घुसपैठ कर चुके थे।
- बातचीत में जनरल अजीज यह भी इशारा करते हैं कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को पूरी योजना की जानकारी नहीं दी गई थी।
- यह सेना और नागरिक नेतृत्व के बीच की दूरी को उजागर करता है।
- बातचीत में मुशर्रफ और अजीज़ चीन में अपने संपर्कों को जानकारी देने और अंतरराष्ट्रीय समर्थन पाने की संभावनाओं पर भी चर्चा करते हैं।
- बातचीत में वे भारत की सैन्य प्रतिक्रिया और अंतरराष्ट्रीय दबाव की संभावनाओं पर भी विचार करते हैं।
मुशर्रफ के टेप से भारत को फायदा
मुशर्फ के इस टेप से भारत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर बड़ा नैतिक और कूटनीतिक लाभ मिला। भारत ने यह टेप अमेरिका और अन्य देशों के सामने पेश कर यह साबित किया कि पाकिस्तान की सेना प्रत्यक्ष रूप से युद्ध में शामिल थी। नवाज शरीफ को यह टेप भेजा गया, जिससे पाकिस्तान का झूठ सबके सामने आ गया। इससे पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय छवि को गहरा नुकसान हुआ और नवाज शरीफ पर दबाव बढ़ा कि वे पीछे हटें।

भारत दौरे के दौरान परवेज मुशर्रफ
जब भारत ने कर दिया टेप सार्वजनिक
करगिल युद्ध के बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्री विदेश मंत्री सरताज अजीज की भारत आने वाले थे, तभी कुछ दिन पहले भारत ने यह टेप दुनिया भर में बंटवा दिया। पूरी दुनिया में पाकिस्तान के नापाक इरादों की सच्चाई सामने आ गई। पाकिस्तान को सैन्य, रणनीतिक और कूटनीतिक स्तर पर हार झेलनी पड़ी। युद्ध के बाद पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल परवेज़ मुशर्रफ के बीच मतभेद हुए। बाद में मुशर्रफ ने तख्तापलट करके सत्ता संभाल ली।
