US-Iran War: अमेरिका और इजराइल जब, ईरान के साथ जंग में गए थे, तब ट्रंप ने कई दावे किए थे। ईरान को बर्बाद कर देंगे, ईरान को परमाणु बम नहीं बनाने देंगे। ईरान में सुप्रीम लीडर की सत्ता खत्म कर देंगे...ऐसे ढेर सारे बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दिए थे, लेकिन अब जो कहानी निकलकर सामने आ रही है, उससे ईरान इस जंग का एकमात्र विजेता दिख रहा है। इजराइल काफी पहले ईरान के साथ जंग से बाहर निकल चुका है, वो लेबनान और गाजा पर ध्यान केंद्रित किए हुए है। इधर अमेरिका हॉर्मुज पर नाकेबंदी से लेकर ईरान के अंदर तक हमले करते-करते थकता दिख रहा है, ऐसा लग रहा है, जैसे ट्रंप अब इस जंग से निकलना चाह रहे हैं, यही कारण है कि अब अमेरिका होर्मुज से लेकर परमाणु हथियार तक पर पीछे हटने को तैयार दिख रहा है। अब सवाल ये है कि आखिर ट्रंप इस मुहाने तक पहुंचे कैसे कि ईरान जीत के करीब जा रहा है और अमेरिका सबकुछ गंवाने के बाद निकलने की तैयारी में है?
ईरान के साथ जंग में अमेरिका को कितना नुकसान?
ईरान के साथ जारी संघर्ष में अमेरिका को सैन्य, वित्तीय और रणनीतिक मोर्चों पर भारी नुकसान उठाना पड़ा है। इस युद्ध में अब तक अमेरिका के 20 सैन्यकर्मियों की जान जा चुकी है, जिनमें 19 सैनिक और एक नागरिक ठेकेदार शामिल हैं, जबकि 620 से अधिक सैन्यकर्मी और कॉन्ट्रैक्टर घायल हुए हैं। सैन्य उपकरणों के मामले में अमेरिकी वायु सेना और नौसेना को अपने लगभग 42 विमानों का नुकसान हुआ है। इसके अलावा, ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों में क्षेत्र में तैनात पेट्रियट मिसाइल डिफेंस सिस्टम, थाड रडार और कई प्रमुख निगरानी प्रणालियां क्षतिग्रस्त या पूरी तरह नष्ट हो चुकी हैं। लगातार जारी हमलों के कारण अमेरिका के पास उन्नत मिसाइल इंटरसेप्टर और सटीक हथियारों का भंडार भी तेजी से खाली हो रहा है।
वित्तीय मोर्चे पर भी अमेरिका को इस टकराव की भारी कीमत चुकानी पड़ रही है। इस युद्ध का सीधा सैन्य खर्च लगभग 113.3 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। फारस की खाड़ी और लाल सागर क्षेत्र में नौसेना और वायु सेना की बड़े पैमाने पर तैनाती बनाए रखने से दैनिक खर्च अमेरिकी बजट पर लगातार दबाव बना रहा है।
पैट्रियट मिसाइल मोबाइल लॉन्चर (फोटो- AP)
न परमाणु डील न होर्मुज?
'द वॉल स्ट्रीट जर्नल' की रिपोर्ट के मुताबिक, अगर ईरान होर्मुज़ जलडमरूमध्य को पूरी तरह से फिर से खोल देता है, तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप तेहरान के साथ बिना किसी परमाणु समझौते के भी पश्चिम एशिया संघर्ष को खत्म करने के लिए तैयार हैं। अधिकारियों के अनुसार, जलमार्ग के दोबारा खुलते ही ट्रंप इस संघर्ष में अपनी जीत का दावा करने की योजना बना रहे हैं। उन्होंने निजी तौर पर अपने वरिष्ठ सहयोगियों के सामने भी यह विचार व्यक्त किया है। संघर्ष की शुरुआत से ही व्हाइट हाउस ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर सख्त रुख अपनाए हुए था। हालांकि, ट्रंप ने बाद में व्यापक वार्ता के तहत इस अल्टीमेटम को टालने का प्रयास किया, लेकिन होर्मुज जलमार्ग का मुद्दा लगातार मुख्य रोड़ा बना हुआ है।
ईरान से क्यों निकलना चाह रहे हैं ट्रंप?
डोनाल्ड ट्रंप कई प्रमुख राजनीतिक, आर्थिक और सैन्य कारणों से ईरान के साथ जारी संघर्ष को जल्द समाप्त करना चाहते हैं। हॉर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान के कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं, जिससे अमेरिका में ईंधन महंगा हुआ है और महंगाई का बोझ बढ़ा है। अमेरिका में आगामी चुनावों से ठीक पहले यह आर्थिक तंगी और तेल संकट ट्रंप प्रशासन की राजनीतिक साख के लिए बड़ा खतरा साबित हो रहा है। अमेरिकी जनता के बीच यह युद्ध बेहद अलोकप्रिय है और ट्रंप पर अपने समर्थकों का दबाव है कि वे अमेरिका को विदेशी युद्धों से दूर रखें। ऐसे में ट्रंप ईरान के प्रमुख ठिकानों को नुकसान पहुंचाने का हवाला देकर केवल जलमार्ग बहाल कराकर जीत का दावा करते हुए बाहर निकलना चाहते हैं।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (फोटो-AP)
ईरान क्यों मान रहा है अपनी जीत?
ईरान के नेतृत्व का मानना है कि समय उनके पक्ष में है और अमेरिकी प्रशासन लंबे समय तक इस तनाव को बर्दाश्त नहीं कर पाएगा। उनका आकलन है कि अमेरिका के पास उन्नत मिसाइल इंटरसेप्टर जैसे हथियारों का भंडार कम हो रहा है और वहां जनता में इस संघर्ष को लेकर भारी असंतोष है। जलमार्ग के बाधित रहने से ईंधन की कीमतें ऊंची बनी रहेंगी, जिससे अमेरिकी चुनावों से पहले वहां की सरकार पर सीधा आर्थिक व राजनीतिक दबाव पड़ेगा। इसके अलावा, यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों द्वारा लाल सागर के व्यापारिक मार्ग को प्रभावित करने से यह दबाव और दोगुना हो जाता है। ऐसे में अमेरिका को अब वहां से निकलना ही होगा, जो एक तरह से ट्रंप की हार और तेहरान की जीत होगी।
कहां उलझा है मामला?
तेहरान की नई शर्तों ने इस प्रक्रिया को उलझा दिया है। ईरान ने होर्मुज से जहाजों की आवाजाही की अनुमति देने के बदले अमेरिका से अरबों डॉलर के भुगतान की मांग रखी है। इसके अलावा, ईरान ने क्षेत्र से अमेरिकी सैनिकों की वापसी और अपने खिलाफ लागू अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को पूरी तरह खत्म करने की भी शर्त रखी है। इसे मानना ट्रंप के लिए थोड़ा मुश्किल लग रहा है।
