ट्रंप प्रशासन और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के बीच छिड़ा विवाद
Harvard Vs Trump Row: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी (Harvard University) के बीच विवाद थमने का नाम ही नहीं ले रहा है और अब तो ऐसी विकट स्थिति पैदा हो गई कि विदेशी छात्रों का भविष्य अधर हैरान/परेशान हैं। ट्रंप ने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ने के इच्छुक लगभग सभी विदेशी छात्रों का देश में प्रवेश रोकने के लिए एक शासकीय आदेश पर हस्ताक्षर किए हैं। जिसमें घोषणा की गई है कि हार्वर्ड को मैसाचुसेट्स के कैम्ब्रिज स्थित अपने परिसर में विदेशी छात्रों को दाखिला देने की अनुमति देना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा होगा।
यह देश के सबसे पुराने और सबसे धनी यूनिवर्सिटी के साथ 'व्हाइट हाउस' के टकराव की दिशा में एक और कदम है। बोस्टन की एक संघीय अदालत ने हार्वर्ड में विदेशी छात्रों पर रोक लगाने से गृह सुरक्षा विभाग को पिछले सप्ताह रोक दिया था, लेकिन ट्रंप का आदेश एक अलग कानूनी प्राधिकार का इस्तेमाल करता है।
हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के विदेशी छात्रों का एक समूह, जिसमें प्रत्युष रावल और उनके मित्र शामिल थे, 22 मई को बोस्टन के पास के सोमरविल शहर में एक घर में एकत्र हुआ था। आमतौर पर सामान्य लगने वाली बातें भी उस दिन उनके बीच सामूहिक चिंता का कारण बन गईं।
ट्रंप प्रशासन ने अचानक देश में रहने की उनकी कानूनी स्थिति को रद्द कर दिया, इसलिए छात्रों ने पूरी रात परेशानी और भय में बिताई। अदालतों के हस्तक्षेप से पहले, ये छात्र अगले 24 घंटों तक “आउट-ऑफ-स्टेटस” के रूप में रहे। यह शब्द उन लोगों के लिए प्रयोग किया जाता है, जो अमेरिका में कानूनी रूप से प्रवेश करते हैं, लेकिन कुछ शर्तों को पूरा न कर पाने के कारण अपनी वैध स्थिति खो देते हैं।
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पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, रावल ने बताया, “तब से एक अजीब सी बेचैनी हमारे आस-पास बनी हुई है। हममें से बहुत से लोग, जो छात्र वीजा पर यहां हैं, उनके लिए यह बहुत वास्तविक था। एक झटके में सब कुछ बदल गया। हमें नहीं पता था कि क्या हो रहा है।” रावल कहते हैं कि कुछ मौजूदा छात्र सक्रिय रूप से अपनी डिग्री को अन्य कॉलेजों में स्थानांतरित करने के बारे में सोच रहे थे, कुछ नौकरी की तलाश में थे, लेकिन उन सभी के लिए, “उनके सपने टूट रहे थे”।
होमलैंड सुरक्षा विभाग (DHS) ने छात्र और विनिमय आगंतुक कार्यक्रम के तहत हार्वर्ड प्रमाणन को वापस ले लिया, जिससे यूनिवर्सिटी पर नए विदेशी छात्रों को प्रवेश देने पर प्रभावी रूप से रोक लग गई और वर्तमान अंतरराष्ट्रीय नामांकित छात्रों की कानूनी स्थिति को खतरा पैदा हो गया।
ट्रंप प्रशासन के फैसलों से हार्वर्ड में पढ़ने वाले लगभग 6,800 अंतरराष्ट्रीय छात्रों के जीवन पर असर पड़ रहा है, जहां वे कुल छात्र संख्या का लगभग 27 प्रतिशत हैं। यहां भारतीय मूल के लगभग 800 छात्र हैं। हार्वर्ड ने कहा है कि वह अपने अंतरराष्ट्रीय छात्रों की सुरक्षा के लिए लड़ेगा।
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रावल ने कहा, “मौजूदा छात्रों को नहीं पता कि उन्हें अपनी डिग्री पूरी करने की अनुमति मिलेगी या नहीं। यह उनके जीवन को झकझोर देने वाली बात है। मैं ऐसे कई दोस्तों को जानता हूं जिन्होंने यहां एडमिशन तो ले लिया है, लेकिन अब वे इस पर पुनर्विचार कर रहे हैं। इस देश में बहुत अनिश्चितता है... सिर्फ हार्वर्ड के लिए ही नहीं, बल्कि आमतौर पर अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए भी।”
निशाना बनाए जाने की आशंका के कारण नाम न जाहिर करने की शर्त पर एक शोधकर्ता ने कहा, “जब आप काम पर आते हैं तो आप विज्ञान के बारे में सोचते हैं। इनमें से बहुत से आदेश आपका ध्यान काम से हटा देते हैं, क्योंकि आप इस बात को लेकर चिंतित रहते हैं कि आगे क्या होगा।”
उसने कहा, “बहुत मेहनत के बाद यहां तक पहुंचने पर ये चीजें खुशहाल माहौल नहीं बनातीं और लंबे समय में चिंता पैदा करती हैं। शोध में वर्षों लग जाते हैं और यदि आपके सामने बाधाएं हैं तो यह आपकी यात्रा को कठिन बना देती हैं।”
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