Karuppu Movie Review: सुपरस्टार सूर्या की फिल्म करुप्पु आज बड़े पर्दे पर रिलीज हो गई। फैंस लंबे समय से इसका इंतजार कर रहे थे। अब फिल्म दर्शकों की उम्मीदों पर कितनी खरी उतरती है, यही इस रिव्यू में जानने को मिलेगा।
देसी सुपरहीरो बनकर 'सूर्य' की तरह चमके सूर्या (pic credit-instagram)
Karuppu Movie Review: सुपरहीरो वाली फिल्में तो आपने खूब देखी होंगी। सुपरमैन, बैटमैन और आयरन मैन जैसे किरदारों को लोगों ने हमेशा प्यार दिया है। लेकिन भारतीय दर्शक लंबे समय से ऐसे सुपरहीरो का इंतजार कर रहे थे, जो हमारी संस्कृति और लोककथाओं से जुड़ा हो। अब साउथ सुपरस्टार सूर्या ने फिल्म करुप्पु (Karuppu) के जरिए यही कोशिश की है। फिल्म को लेकर पहले से ही काफी बज बना हुआ था और फैंस इसके रिलीज का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। दमदार एक्शन, शानदार विजुअल्स और अलग कहानी के साथ आई ये फिल्म लोगों की उम्मीदों पर खरी उतरती है या नहीं, इसका जवाब आपको इस रिव्यू में मिलेगा। (ये भी पढ़ें-सूर्या-तृषा कृष्णन की एक्टिंग देख झूम उठे लोग, 'करुप्पु' को बताया 'ब्लॉकबस्टर')
फिल्म की कहानी बेबी कन्नन (आरजे बालाजी) के आसपास घूमती है, जो एक लालची वकील है और हमेशा ताकतवर लोगों का साथ देता है। उसकी पहुंच इतनी मजबूत होती है कि कोई भी उसके खिलाफ जाने की हिम्मत नहीं करता। यहां तक कि कानून और न्याय व्यवस्था को भी अपनी उंगलियों पर नचाता है। इसी बीच मट्टनचेरी (इंद्रंस) और उनकी बेटी उससे मदद मांगने आते हैं, ताकि पुलिस द्वारा जब्त किया गया उनका सोना वापस मिल सके। लेकिन बेबी कन्नन उन्हें भी धोखा दे देता है। टूट चुके मट्टनचेरी अपने गांव के रक्षक देवता करुप्पुसामी से प्रार्थना करते हैं, इसके बाद करुप्पुसामी सामने आते हैं और बेबी कन्नन को उसके कर्मों की सजा देना चाहते हैं। लेकिन बेबी कन्नन समाज में फैले भ्रष्टाचार और अन्याय का हवाला देता है और कहता है इस दुनिया में इंसाफ मिलना नामुमकिन हो गया है। वह देवता को चुनौती भी देता है कि अगर उनमें ताकत है तो बिना किसी दिव्य शक्ति के इंसानों के बीच रहकर इस सिस्टम को बदलकर दिखाएं। इसके बाद करुप्पुसामी इंसानी रूप में सूर्या के किरदार में नजर आते हैं। क्या सूर्या मट्टनचेरी और उनकी बेटी को न्याय दिला पाएंगे ये तो आपको फिल्म देखने के बाद ही पता चलेगा।
सूर्या एक परफेक्ट एक्टर है और वो इस बात को हर बार साबित करते है कहानी कोई भी किरदार कोई भी हो उन्हें फर्क नहीं पड़ता है। इस बारे भी सूर्या ने धमाल मचा दिया। सूर्या हर फ्रेम में पूरी तरह हावी हैं। उन्होंने करुप्पन के किरदार में रहस्य और गहराई भर दी है। फिल्म के अंतिम हिस्सों में तो वे देवता के गुस्से वाले रूप को बखूबी निभाते हैं। आरजे बालाजी ने बेबी कन्नन के बेरहम और खलनायक वाले किरदार को बेहद अच्छे से निभाया है। तृषा ने अपने रोल को कहानी में अच्छे से फिट किया है। श्वासिका और शिवदा जैसे कलाकारों के पास स्क्रीन टाइम कम है, लेकिन इंड्रांस ने अपने किरदार को बहुत ईमानदारी के साथ निभाया है।
सूर्या की मूवी करुप्पु कॉन्सेप्ट भले ही बहुत दिलचस्प है, लेकिन स्क्रीनप्ले उस लेवल का नहीं है जैसा होना चाहिए। है। कुछ इमोशनल सीन और सपोर्टिंग किरदार सिर्फ रोंगटे खड़े करते हैं बाकी मूवी देखकर कुछ खास नहीं होता। अगर फिल्म को और रॉ तरीके से बनाया जाता तो इसमें बात की कुछ और होती। कुछ हिस्से जरूरत से ज्यादा ड्रामेटिक हो जाते हैं। इसके अलावा, इंसान द्वारा भगवान को बार-बार चुनौती देने का आइडिया कुछ समय बाद अपना असर खोने लगता है। कई स्लो-मोशन सीक्वेंस भी प्रेडिक्टिव लगते हैं। बाकी मूवी का आइडिया जबरदस्त है।
अगर आप सूर्या के फैन है और आपको अच्छाई और बुराई के बीच के संघर्ष वाली कहानियां पसंद है तो आप करुप्पु देख सकते हैं। हम इस फिल्म को 3.5 स्टार की रेटिंग देते हैं। अब आपको ये मूवी कैसी लगी है हमें कमेंट करके जरूर बताएं।