Grahan Web series Review in Hindi: 84 के दंगों का सच और उसके बीच से निकली प्रेम कहानी

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Grahan Web series Review in Hindi: डिज्नी प्लस हॉटस्टार की नई वेब सीरीज ग्रहण (Grahan) रिलीज हो चुकी है। इस वेबसीरीज की कहानी बोकारो में हुए 1984 के सिख दंगों के इर्दगिर्द बुनी गई है।

Grahan Web series Review
Grahan Web series Review 

मुख्य बातें

  • डिज्नी प्लस हॉटस्टार की नई वेब सीरीज ग्रहण (Grahan) रिलीज हो चुकी है।
  • यह वेबसीरीज हिंदी लेखक सत्‍य व्‍यास की किताब चौरासी से प्रेरित है। 
  • इस वेबसीरीज को खास बनाते हैं इसके बेहतरीन डायलॉग्स।

Grahan Web series Review in Hindi: डिज्नी प्लस हॉटस्टार की नई वेब सीरीज ग्रहण (Grahan) रिलीज हो चुकी है। इस वेबसीरीज की कहानी बोकारो में हुए 1984 के सिख दंगों के इर्दगिर्द बुनी गई है। इसी महीने इस वेबसीरीज का ट्रेलर रिलीज किया गया था और तभी से दर्शकों में इसके प्रति उत्‍सुकता पैदा हो गई थी। हिंदी भाषी क्षेत्र के लोगों में ग्रहण को लेकर उत्‍सुकता की मुख्‍य वजह थी, इस कहानी का एक चर्चित उपन्‍यास से प्रे‍रित होना। डायरेक्टर रंजन चंदेल की यह वेबसीरीज हिंदी लेखक सत्‍य व्‍यास की किताब चौरासी से प्रेरित है। 

वेब सीरीज का नाम: ग्रहण
कलाकारों के नाम: जोया हुसैन, पवन मल्होत्रा, अंशुमन पुष्कर, वमिका गब्बी
निर्देशक का नाम: रंजन चंदेल
कहां देख सकते हैं: डिज्नी प्लस हॉटस्टार 

जब किसी पुस्‍तक पर फ‍िल्‍म या वेबसीरीज बनती है तो ये देखना दिलचस्‍प होता है कि पन्‍ने से निकलकर पर्दे पर पहुंची कहानी में कितना और कहां बदलाव हुआ। चौरासी से ग्रहण बनी इस कहानी में अनगिनत बदलाव किए गए हैं और शायद यही वजह है कि इस ग्रहण को चौरासी से प्रेरित कहा गया है ना कि आधारित। पुस्‍तक पढने के बाद इस कहानी को पर्दे पर देखने वाले समझ जाएंगे कि पन्‍ने से पर्दा कितना अलग है। 

ऋषि बने अंशुमन पुष्कर, पवन मल्होत्रा, मनु बनीं वमिका गब्बी, सहीदुर रहमान, टीकम जोशी जैसे कलाकारों से सजी ये वेबसीरीज रोमांच से भरी है। मुक्काबाज अदादारा जोया हुसैन (Zoya Hussain) ने ग्रहण में अहम किरदार निभाया है। उपन्यास की कहानी में 1984 के बोकारो शहर और उस शहर में हुए सिक्खों के संहार की पृष्ठभूमि में मनु और ऋषि के प्यार की कहानी थी और खासबात ये है कि पर्दे पर ही कहानी की आत्मा ये प्रेम कहानी ही है। हालांकि कहानी को पटकथा में बदलते समय राजनीति, सस्पैंस और थ्रिल के दृश्‍य डाले गए हैं। आठ एपिसोड वाली ये कहानी बोर तो नहीं करती है लेकिन कहीं कहीं खिंची हुई जरूर नजर आती है। कहीं लंबे-लंबे सीन बेचैन करने लगते हैं। 

रांची की एसपी अमृता सिंह को बोकारो में हुए 1984 सिख विरोधी दंगों की जांच का जिम्‍मा मिलता है। अमृता जांच में जुटती हैं तो उन्‍हें पता चलता है कि इन दंगों की अगुआई ऋषि रंजन नाम के आदमी ने की थी। ऋषि रंजन ने अब अपना नाम बदल लिया है। अमृता को पता चलता है कि ऋषि रंजन कोई और नहीं बल्कि गुरसेवक सिंह उसके पिता हैं। पुलिस की जांच होती है और उस पर राजनीति भी होती है। क्‍या दंगों का सच सामने आया, यह जानने के लिए आपको वेबसीरीज देखनी होगी।

इस वेबसीरीज को खास बनाते हैं इसके बेहतरीन डायलॉग्स। "हमला करने वाला दंगाई होता है, हिन्दु या मुस्लिम नहीं।", "राजनीति में कुछ बदलता नहीं है, टलता है और माहौल देखकर इतिहास अपने आप को दोहराता है।", "राजनीति किसी के तरीके से नहीं चलती, उसकी अपनी चाल होती है।", हम अक्सर दुनिया में चीजों को काले और सफेद में देखते हैं, पर सच उसके बीच का रंग होता है।" जैसे डायलॉग शानदार हैं। 

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