RRR के फर्स्‍ट लुक पर BJP को आपत्ति, राजामौली से कहा- लुक बदलो, नहीं तो थिएटर्स जला देंगे

RRR in controversy: बाहुबली जैसी सुपरहिट फ‍िल्‍म के डायरेक्‍टर एसएस राजामौली अपनी नई फ‍िल्‍म RRR को लेकर व‍िवादों में घिर गए हैं। बीजेपी ने उनकी फ‍िल्‍म के फर्स्‍ट लुक पर आपत्ति जताई है।

RRR First look
RRR First look 

मुख्य बातें

  • एसएस राजामौली अपनी नई फ‍िल्‍म RRR को लेकर व‍िवादों में घिर गए हैं।
  • बीजेपी ने उनकी फ‍िल्‍म के फर्स्‍ट लुक पर आपत्ति जताई है।
  • फ्रीडम फाइटर कोमराम भीम के रि-प्रजेंटेशन पर उठाए सवाल।

RRR in controversy: बाहुबली जैसी सुपरहिट फ‍िल्‍म के डायरेक्‍टर एसएस राजामौली अपनी नई फ‍िल्‍म RRR को लेकर व‍िवादों में घिर गए हैं। बीजेपी ने उनकी फ‍िल्‍म के फर्स्‍ट लुक पर आपत्ति जताई है। बीजेपी ने साफ शब्‍दों में फर्स्‍ट लुक बदलने की मांग की है और ऐसा ना करने पर थिएटर जलाने की धमकी दे डाली है। दैनिक भास्‍कर की रिपोर्ट की मानें तो तेलंगाना बीजेपी के नेता और करीम नगर से सांसद बांदी संजय ने फिल्म में फ्रीडम फाइटर कोमराम भीम के रि-प्रजेंटेशन पर सवाल उठाए हैं। आदिलाबाद से भाजपा सांसद सोयम बापू ने भी फिल्ममेकर पर निशाना साधा है।

बता दें कि डायरेक्‍टर एसएस राजामौली इन दिनों अपनी मल्टीस्टारर फिल्म 'आरआरआर' को लेकर व्‍यस्‍त हैं। फिल्म में साउथ सुपरस्टार एनटी रामा राव जूनियर, राम चरण और बॉलीवुड एक्टर अजय देवगन में अहम रोल में दिखाई देंगे। वहीं, आलिया भट्ट फीमेल लीड में नजर आएंगी। पिछले दिनों फिल्म से जूनियर एनटीआर का फर्स्ट लुक रिलीज किया था, जो कोमराम भीम की भूमिका निभा रहे हैं। फर्स्‍ट लुक में वह कुर्ता-पायजामा पहने नजर आ रहे हैं और उन्‍होंने मुस्लिम टोपी पहन रखी है। बीजेपी के नेताओं ने आदिवासी नेता को मुस्‍लिम टोपी में दिखाने का विरोध किया है।

सनसनी फैलाने का आरोप 

सांसद बांदी संजय का कहना है कि राजामौली ने सनसनी फैलाने के लिए कोमराम भीम को यह टोपी पहनाई है। हम यह कभी स्‍वीकार नहीं करेंगे। वहीं सांसद सोयम बापू का कहना है कि आदिवासी नेता को सुरमा, मुस्लिम टोपी और कुर्ता पायजामा में दिखाना गलत है। उन्‍होंने निजाम के शासन के खिलाफ जंग की और अपना बलिदान दे दिया। ऐसे में अगर उनके लुक को गलत तरीके से पेश किया जाएगा तो हम थिएटर्स जलाने में भी संकोच नहीं करेंगे।

कौन थे कोमराम भीम

22 अक्टूबर 1901 को जन्‍मे कोमराम भीम ने हैदराबाद को आजाद कराने के लिए असफजाही राजवंश के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी। जब वह 19 साल के थे और उनके आदिवासियों के लिए लड़ाई लड़ने के चलते उनके पिता को निजाम के अधिकारियों ने मार डाला था। उसके बाद कोमराम ने संघर्ष किया। कोमराम की भीम सेना और निजाम सेना के बीच तीन दिन तक लड़ाई चली और आखिरकार 27 अक्टूबर 1940 को 39 साल की उम्र में उनका निधन हो गया। 

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