प्रेमिका के ल‍िए संतोष आनंद ने लिखा था 'एक प्यार का नगमा है...', आज है एक हजार साल का सर्वश्रेष्‍ठ गीत

एक हजार साल का सर्वश्रेष्‍ठ गीत 'एक प्यार का नगमा है...' लिखने वाले संतोष आनंद 81 साल के हो गए हैं। बीते दिनों संतोष आनंद खूब चर्चा में रहे, जब वह इंडियन आइडल के मंच पहुंच पहुंचे और अपनी आपबीती सुनाई।

Santosh Anand
Santosh Anand 

मुख्य बातें

  • 5 मार्च 1940 को उत्‍तर प्रदेश के बुलंदशहर में हुआ था संतोष आनंद का जन्‍म
  • बॉलीवुड की लगभग 30 फ‍िल्‍मों में लिखे हैं 110 गीत, सभी गाने रहे सुपरहिट
  • रानू मंडल जैसे ज‍िनके गाने गाकर हो गए फेमस, जमाने ने उन्‍हें भुला द‍िया

Santosh Anand Birthday: एक हजार साल का सर्वश्रेष्‍ठ गीत 'एक प्यार का नगमा है...' लिखने वाले महान गीतकार संतोष आनंद आज यानि 5 मार्च को 81 साल के हो गए हैं। आज ही के दिन साल 1940 में उत्‍तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले के सिकंद्राबाद में संतोष आनंद का जन्‍म हुआ था। संतोष आनंद बीते द‍िनों खूब चर्चा में रहे, जब वह इंडियन आइडल के मंच पर पहुंचे और अपनी हालत बयां की। एक हजार साल का सर्वश्रेष्‍ठ गीत यानि सॉन्‍ग ऑफ मिलेनियम जिस गीतकार की कलम से निकला, उसकी हालत के बारे में जानकर हर किसी को दर्द हुआ। और ये दर्द हो भी क्‍यों ना, जब रानू मंडल जैसे लोग जिसके गाने गाकर ख्‍याति पा जाते हैं और उसकी गीतकार ये दुनिया भुला देती है। 

मंचों के कवि संतोष आनंद की कलम ने जब हिंदी सिनेमा के लिए लिखना शुरू किया था तो पहला गाना निकला 'पुरवा सुहानी आई रे....'! 1970 में आई मनोज कुमार, सायरा बानो और अशोक कुमार की फ‍िल्‍म पूरब और पश्चिम का यह गाना हमेशा हमेशा के ल‍िए फैंस की जुबां पर स्‍थापित हो गया। इसके बाद उनकी कलम ने वो गाना लिखा जिसे सॉन्‍ग ऑफ मिलेनियम कहा गया। 1972 में आई मनोज कुमार, जया बच्‍चन और प्रेम नाथ की फ‍िल्‍म शोर का गाना 'एक प्‍यार का नगमा है, मौजों की रवानी है, जिंदगी और कुछ भी नहीं, तेरी मेरी कहानी है।'

प्रेमिका के ल‍िए ल‍िखा गाना 

इस गीत को लता मंगेशकर ने आवाज दी थी और यह ऐसा छाया कि अमर हो गया। इस गीत के ल‍िए उन्‍हें दो बार फ‍िल्‍मफेयर और यश भारती अवॉर्ड से नवाजा गया। यह गीत संतोष आनंद ने दिल की उस गहराई से रचा था, जहां केवल उनकी प्रेमिका की जगह रही होगी। संतोष आनंद ने खुद यह बताई थी कि उन्‍होंने यह गीत अपनी प्रेमिका के ल‍िए लिखा था। पटना में एक कवि सम्‍मेलन में उन्‍होंने कहा था कि जिस प्रेमिका के लिए यह गीत उन्‍होंने ल‍िखा, वह बिछुड़ गई थी। 50 साल बाद वह मिलेगी, इसका यकीन उन्‍हें ना था। एक दिन अचानक उसका फोन आया और लंबी बात हुई। आज वह अक्‍सर फोन करती है और पुणे में रहती है। संतोष आनंद की यह प्रेम कहानी वाकई फ‍िल्‍मी है।

बेटे-बहू की सुसाइड के बाद 'टूटे'

संतोष आनंद ने 1995 के बाद से ही फिल्मों में गाना लिखना बंद कर दिया था। पांच साल पहले उनके बेटे और बहू के सुसाइड कर लिया था। उनके बेटे संकल्प आनंद 15 अक्टूबर 2014 को अपनी पत्नी के साथ ही दिल्ली से मथुरा पहुंचे थे। कोसीकलां कस्बे के पास रेलवे ट्रैक पर इंटरसिटी एक्सप्रेस के सामने कूदकर दोनों ने जान दे दी थी। इस हादसे में संकल्‍प की बेटी बच गई थी। ज़िन्दगी की ना टूटे लड़ी जैसा गाना कलमबद्ध करने वाले संतोष आनंद बेटे और बहू के निधन के बाद बुरी तरह टूट गए। आज वह अपनी छोटी सी पोती के साथ रहते हैं।

ल‍िखे 100 से ज्‍यादा सदाबहार गीत 

संतोष आनंद ने 30 से ज्‍यादा फ‍िल्‍मों में 109 के करीब गाने लिखे हैं। उनके लोकप्रिय गीतों में फ़िल्म: प्यासा सावन (1981) का मेघा रे मेघा रे, मत परदेस जा रे, फ़िल्म क्रांति (1981) का ज़िन्दगी की ना टूटे लड़ी, फ़िल्म प्रेम रोग (1982) का ये गलियां ये चौबारा, यहां आना न दोबारा शामिल हैं।

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