'तुम्हारे पिता अस्पताल में, अब किसके भरोसे खाओगे'- ट्रोल का अभिषेक बच्चन ने दिया दिलचस्प जवाब

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Jul 30, 2020, 03:46 PM IST

Abhishek Bachchan reply on Social Media Troll: पिता अमिताभ बच्चन का नाम लेकर एक लड़की ने अभिषेक बच्चन पर टिप्पणी करके ट्रोल करने की कोशिश की थी लेकिन अभिनेता के विनम्र जवाब ने फैंस का दिल जीत लिया।

'तुम्हारे पिता अस्पताल में, अब किसके भरोसे खाओगे'- ट्रोल का अभिषेक बच्चन ने दिया दिलचस्प जवाब

मुंबई: मौजूदा समय में अभिषेक बच्चन का मुंबई के नानावती अस्पताल में कोविड​​-19 के इलाज के लिए भर्ती हैं। अभिनेता को उनके पिता अमिताभ बच्चन के साथ 11 जुलाई को भर्ती कराया गया था और दोनों स्थिर हालत में हैं। दिलचस्प बात यह है कि पिता-पुत्र की जोड़ी लगातार सोशल मीडिया पर लोगों के साथ जुड़े हुए हैं। इस बीच बीते दिन जूनियर बच्चन को ट्विटर पर एक यूजर ने ट्रोल करने की कोशिश की लेकिन अभिषेक ने विनम्रता के साथ सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए फैंस का दिल जीत लिया।

सवाल में ट्रोल ने लिखा, 'आपके पिता अस्पताल में भर्ती हैं ... अब किसके भरोसे बैठकर खाओगे? जिस पर लिखकर अभिषेक ने काफी व्यंग्यात्मक प्रतिक्रिया दी, 'फिलहाल तो लेट के खा रहे हैं.... दोनो एक साथ अस्पताल में।'

ट्रोलर ने आगे जवाब में लिखा, 'जल्दी ठीक हो जाइए सर ... हर किसी की किस्मत में लेटकर खाना कहां।' एक बार फिर विनम्र प्रतिक्रिया में अभिनेता ने लिखा, 'मैं प्रार्थना करता हूं कि आप हमारे जैसी परिस्थिति में न फंसें और स्वस्थ- सुरक्षित रहें। आपकी शुभकामनाओं के लिए धन्यवाद।'

उनके ट्वीट में लिखा था, 'मैं प्रार्थना करता हूं कि आप कभी भी हमारी जैसी स्थिति में न हों और आप सुरक्षित और स्वस्थ रहें। आपकी शुभकामनाओं के लिए धन्यवाद मैम।'

इसके बाद ट्रोलर को अपनी गलती का अहसास हो गया और उन्होंने लिखा, 'आपका बहुत-बहुत धन्यवाद सर ... लेकिन कुछ गलत होता है तो कृपया अपनी आवाज उठाइए. असली हीरो बनिए..सिर्फ फिल्मी नहीं। अस्पताल में नहीं घर पर बैठकर खाएं... आम लोगों का गुस्सा है निकल जाता है। बस बाद में बुरा लगता है।'

अभिषेक बच्चन की इस प्रतिक्रिया ने सोशल मीडिया पर फैंस को बेहद प्रभावित किया कि कैसे उकसाने वाले कमेंट करने पर भी शांत रहते हुए जवाब दिया जाता है। यहां आप कुछ प्रतिक्रियाएं देख सकते हैं।

लोगों ने इस बात का समर्थन किया कि जब कोई कड़वी बात बोलने की कोशिश करता है तो जरूरी नहीं कि हम भी वैसे बनें बल्कि उसे गलती का अहसास कराने के दूसरे भी तरीके हैं।

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