इलेक्शन

CM की कुर्सी के लिए वसुंधरा राजे होंगी BJP की पहली पसंद? समझिए राजस्थान का सियासी गणित

Rajasthan Chunav: एग्जिट पोल के नतीजों में ये दावा किया गया है कि राजस्थान में 5 साल कांग्रेस और 5 साल भाजपा वाला फॉर्मूला बरकरार रहने वाला है। ऐसे में अगर भाजपा की वापसी होती है तो CM की रेस में कौन सबसे आगे होगा? सर्वे में दावा किया गया है कि वसुंधरा राजे सबसे मजबूत दावेदार हैं।

Image

कौन बनेगा राजस्थान का अगला मुख्यमंत्री?

Photo : Times Now Digital

BJP in Rajasthan: राजस्थान विधानसभा के नतीजों में भाजपा की बल्ले बल्ले होगी या फिर कांग्रेस शानदार कमबैक करेगी इस सवाल का जवाब 3 दिसंबर को मिल जाएगा। एग्जिट पोल के नतीजों में 5 साल कांग्रेस और 5 साल भाजपा वाला फॉर्मूला बरकरार रहने का दावा किया गया है। मगर सवाल ये उठ रहे हैं कि राजस्थान में एग्जिट पोल यदि एक्जेक्ट पोल में तब्दील हो जाते हैं तो भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री की कुर्सी के लिए सबसे प्रबल दावेदार कौन होगा? एक मीडिया संस्थान के सर्वे में ये दावा किया गया है कि वसुंधरा राजे मुख्यमंत्री के तौर पर राजस्थान के लोगों की पहली पसंद हैं।

भाजपा के दिग्गजों को भी वसुंधरा पर भरोसा

राजस्थान चुनाव के दौरान वसुंधरा राजे सबसे अधिक जनसभाओं में शामिल हुईं। अगर चुनावी नतीजों में भाजपा की वापसी होती है तो निश्चित तौर पर सीएम की रेस में वसुंधरा सबसे मजबूत दावेदार मानी जा रही हैं। रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि राजस्थान में भाजपा की लहर लाने में वसुंधरा की रैलियों की अहम भूमिका रही। राजनीतिक विश्लेषकों का दावा है कि राजे की लोकप्रियता और जनता से जुड़ाव भाजपा के लिए बेहद अहम साबित हुई। वसुंधरा ने राज्य में ताबड़तोड़ रैलियां और रोड़ शो किया। 58 से अधिक भाजपा उम्मीदवारों ने वसुंधरा राजे से अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में अभियान का नेतृत्व करने का अनुरोध किया।

इन नेताओं ने वसुंधरा राजे से किया था अनुरोध

रिपोर्टें सामने आईं कि 110 से अधिक उम्मीदवारों ने राजे के नेतृत्व वाली रैलियों या रोड शो के लिए अनुरोध किया था। इनमें तिजारा से बाबा बालकनाथ, चोमू से रामलाल शर्मा, कुंभलगढ़ से सुरेंद्र राठौड़ और बूंदी से अशोक डोगरा जैसी प्रमुख हस्तियां शामिल थीं। भाजपा इस बार राजस्थान में बिना किसी चेहरे के चुनावी मैदान में दंभ भरा। एक मीडिया संस्थान ने अपने सर्वे में दावा किया कि मुख्यमंत्री पद के लिए वसुंधरा राजे को 40% लोगों की पसंद हैं, जबकि अशोक गहलोत को 34% लोग फिर से मुख्यमंत्री के तौर पर देखना चाहते हैं।

आंतरिक कलह के बावजूद मजबूत हुईं वसुंधरा!

राजस्थान में चुनाव से पहले ये चर्चा जोरों पर थी कि भाजपा में आंतरिक कलह कहीं पार्टी की मुसीबत ना बढ़ा दे। ऐसा कहा जा रहा था कि वसुंधरा राजे के खेमे को दरकिनार किया जा रहा है, हालांकि वसुंधरा ने माहौल को बखूबी समझा और विरोध के बावजूद चुनावी अभियान पर जोर दिया। वसुंधरा ने इस बात को बेहतर समझा कि विवादों में उलझने के बजाय उन्हें चुनाव में अपनी ताकत झोंकनी चाहिए। ये देखना खास होगा कि सर्वे में जिस तरह वसुंधरा को मुख्यमंत्री पद के लिए पहली पसंद बताया गया है, अगर भाजपा की वापसी होती है तो क्या एक बार फिर बतौर सीएम उनकी ताजपोशी होती है या नहीं।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

और पढ़ें
End of Article