इलेक्शन

प्रियंका गांधी ने वोटिंग के दिन वायनाड की जनता से जताई ये उम्मीद, कह दी ये बड़ी बात

Wayanad Lok Sabha By-Election: वायनाड लोकसभा सीट पर हो रहे उपचुनाव में कांग्रेस की प्रियंका गांधी वाड्रा का क्या होगा? उन्होंने कहा है कि क्या मुझे उम्मीद है कि वायनाड के लोग अपने प्रतिनिधित्व का अवसर देंगे। आपको बताते हैं कि प्रियंका गांधी ने इसके अलावा और क्या कुछ कहा।

Image

प्रियंका गांधी वाड्रा और राहुल गांधी।

Priyanka Gandhi on By-Election: वायनाड लोकसभा उपचुनाव में कांग्रेस नीत यूडीएफ की उम्मीदवार प्रियंका गांधी वाद्रा ने बुधवार को उम्मीद जताई कि इस संसदीय क्षेत्र के लोग उन्हें प्रतिनिधित्व करने का मौका देंगे। कांग्रेस महासचिव ने वायनाड में मतदान केंद्रों का दौरा करते समय यह बयान दिया जहां लोकसभा उपचुनाव के लिए मतदान जारी है।

वायनाड की जनता से प्रियंका गांधी ने जताई ये उम्मीद

प्रियंका गांधी वाड्रा ने मीडिया से कहा, 'मेरी अपेक्षा है कि वायनाड के लोग मुझे उस प्यार और स्नेह को लौटाने का अवसर देंगे जो उन्होंने मुझे दिया है। वे मुझे अपने लिए काम करने और अपना प्रतिनिधि बनने का अवसर देंगे।' वक्फ कानून के मुद्दे पर संवाददाताओं के प्रश्नों का उत्तर देते हुए प्रियंका ने कहा, 'मुझे नहीं लगता कि आज इस तरह के विवादों की बात करने का दिन है। आज मतदान का दिन है। मुझे उम्मीद है कि सभी लोग अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का इस्तेमाल करेंगे और मतदान करेंगे।'

क्या राहुल गांधी का रिकॉर्ड तोड़ पाएंगी प्रियंका गांधी?

क्या वह वायनाड में अपने भाई राहुल गांधी की तुलना में बड़े अंतर से जीत दर्ज करेंगी, इस प्रश्न पर प्रियंका ने कहा, ‘यह तो देखना होगा।’ राहुल ने 2024 के लोकसभा चुनाव में वायनाड लोकसभा सीट पर साढ़े तीन लाख वोट से अधिक अंतर से जीत हासिल की थी। 2019 में उनकी जीत का अंतर 4.3 लाख वोट से अधिक था।

वह 2024 के आम चुनाव में वायनाड के साथ रायबरेली लोकसभा सीट से भी चुनाव जीते थे। बाद में उन्होंने वायनाड सीट छोड़ दी और यहां उपचुनाव जरूरी हो गया।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

और पढ़ें
End of Article