Haryana Election News: लोकसभा चुनाव 2024 को लेकर सियासी उठापटक का दौर तेज हो चुका है। पहले चरण के मतदान में अब कुछ ही घंटे बाकी रह गए हैं, कि तमाम पार्टियां और उम्मीदवार अपनी एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं। हाल ही में कांग्रेस छोड़ भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए पूर्व सांसद नवीन जिंदल का एक वीडियो सामने आया है। जिसमें वो अपने कंधों पर बोझ उठाते दिखाई दे रहे हैं।
भाजपा उम्मीदवार ने कंधे पर उठाया गेहूं का बोरा
लंबे समय से कांग्रेस का हिस्सा रहे नवीन जिंदल ने अब भाजपा का दामन थाम लिया है और इस बार बीजेपी ने उन्हें कुरुक्षेत्र लोकसभा सीट से अपना उम्मीदवार बनाया है। जिंदल ने एक वीडियो अपने सोशल मीडिया पर साझा किया है, जिसमें वो अपने कंधे पर गेहूं का बोरा उठाते नजर आ रहे हैं। इस दौरान यहां मौजूद उनके समर्थक 'नवीन जिंदल जिंदाबाद, हमारा नेता कैसा हो-नवीन जिंदल जैसा हो...' नारेबाजी कर रहे हैं। उन्होंने गेहूं के बोरे को एक ट्रक मे लोड किया।
शुरू से बीजेपी से प्रभावित थे जिंदल नवीन जिंदल
कहा जाता है कि नवीन जिंदल एक समय देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से काफी प्रभावित थे और वर्ष 2004 के चुनाव में बीजेपी के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ना चाहते थे। हालांकि उनके करीबी बताते हैं कि पिता के दबाव में उन्होंने कांग्रेस का दामन थाम लिया। कांग्रेस के टिकट पर उन्होंने कुरुक्षेत्र सीट से 2004 और 2009 का लोकसभा चुनाव जीता। कांग्रेस में रहते हुए उन्हें राहुल गांधी का करीबी माना जाता था।
भाजपा में आते ही क्या बोले नवीन जिंदल?
नवीन जिंदल ने बीजेपी की सदस्यता ली तो उन्होंने कहा था कि 'आज मेरे जीवन का एक बहुत महत्वपूर्ण दिन है और मुझे ये सौभाग्य प्राप्त हुआ है कि बीजेपी के साथ जुड़कर देश हित में योगदान दे सकूं, इसके साथ ही पीएम मोदी ने जो विकसित भारत का सपना दिखाया है, उसे भी पूरा करने में योगदान दे सकूं, इसके लायक उन्होंने मुझे समझा, मुझे मौका दिया इसके लिए मैं शीर्ष नेतृत्व आभारी हूं, मैं अपनी तरफ से पूरी कोशिश करूंगा कि उनके बताए रास्ते पर चलकर अपने देश की सेवा कर सकूं।'
देश के दिग्गज उद्योगपति नवीन जिंदल कांग्रेस के टिकट पर कुरुक्षेत्र से लगातार दो बार सांसद रहे हैं। गौर हो कि साल 2019 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए राज्य की सभी 10 सीटें जीती थीं, बीजेपी ने हरियाणा में 58.21 फीसदी वोटों पर तो वहीं कांग्रेस ने सिर्फ 28.51 फीसदी वोटों पर कब्जा किया था।
