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Election 2024: 25 हजार विस्थापित कश्मीरी पंडित मतदाता डाल सकेंगे वोट, जानें बारामूला लोकसभा सीट का इतिहास

Election News: जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने के बाद पहली बार लोकसभा चुनाव हो रहे हैं। पांचवें चरण में बारामूला लोकसभा सीट पर मतदान होंगे, जो कई मायनों में खास होगा। इस सीट से उमर अब्दुल्ला चुनाव लड़ रहा है, जहां 25 हजार विस्थापित कश्मीरी पंडित मतदाता वोट डाल सकेंगे।

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जम्मू-कश्मीर के इस सीट पर है बड़ी दिलचस्प लड़ाई।

Photo : Times Now Digital

Jammu Kashmir Election: अनुच्छेद 370 हटने के बाद पहली बार जम्मू-कश्मीर में लोकसभा चुनाव हो रहे हैं। 5 सालों में कश्मीर में क्या-क्या बदला, ये इस बार का बड़ा चुनावी मुद्दा है। हालांकि इस बार का चुनाव इसलिए भी खास है, क्योंकि विस्थापित कश्मीरी पंडित अपना वोट डाल सकेंगे। जम्मू-कश्मीर की बारामूला लोकसभा सीट के लिए 5वें चरण में 20 मई को मतदान होगा और इस सीट के लिए देश के विभिन्न इलाकों में रह रहे 25 हजार से अधिक विस्थापित कश्मीर पंडित मतदान करने की अर्हता रखते हैं। पहले आपको बारामूला सीट का चुनावी समीकरण समझाते हैं।

बारामूला सीट पर कौन-कौन प्रमुख उम्मीदवार?

पार्टीउम्मीदवार
जेकेएनसीउमर अब्दुल्ला
जेकेपीडीपीफैयाज अहमद मीर
जेकेपीसी सज्जाद गनी लोन
इस सीट पर हो रहे लोकसभा चुनाव का समीकरण बेहद दिलचस्प हो गया है, क्योंकि यहां से उमर अब्दुल्ला मैदान में हैं। प्रमुख उम्मीदवारों के रूप में फैयाज अहमद मीर और सज्जाद गनी लोन भी दो-दो हाथ कर रहे हैं। माना जा रहा है कि मुख्य मुकाबला पीपुल्स कांफ्रेंस के सज्जाद लोन और नेशनल कांफ्रेंस के उमर अब्दुल्ला के बीच होगा। आपको इस सीट का चुनावी इतिहास समझाते हैं और बताते हैं कि बारामूला से कब और कौन-कौन अब तक सांसद चुना गया है।

बारामूला से कब कौन चुना गया सांसद?

वर्षनामपार्टी
1957शेख मोहम्मद अकबरभारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
1967सैयद अहमद आगाभारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
1971सैयद अहमद आगाभारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
1977अब्दुल अहद वकीलजम्मू एवं कश्मीर राष्ट्रीय सम्मेलन
1980ख्वाजा मुबारक शाहजम्मू एवं कश्मीर राष्ट्रीय सम्मेलन
1983 (उपचुनाव)सैफुद्दीन सोज़जम्मू एवं कश्मीर राष्ट्रीय सम्मेलन
1984सैफुद्दीन सोज़जम्मू एवं कश्मीर राष्ट्रीय सम्मेलन
1989सैफुद्दीन सोज़जम्मू एवं कश्मीर राष्ट्रीय सम्मेलन
1996गुलाम रसूल कारभारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
1998सैफुद्दीन सोज़जम्मू एवं कश्मीर राष्ट्रीय सम्मेलन
1999अब्दुल रशीद शाहीनजम्मू एवं कश्मीर राष्ट्रीय सम्मेलन
2004अब्दुल रशीद शाहीनजम्मू एवं कश्मीर राष्ट्रीय सम्मेलन
2009शरीफुद्दीन शारिकजम्मू एवं कश्मीर राष्ट्रीय सम्मेलन
2014मुजफ्फर हुसैन बेगजम्मू एवं कश्मीर पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी
2019मोहम्मद अकबर लोनजम्मू एवं कश्मीर राष्ट्रीय सम्मेलन

विस्थापित कश्मीरी मतदाता डाल सकेंगे वोट

बारामूला निर्वाचन क्षेत्र में मतदान की तैयारियां अंतिम दौर में है जहां के 17.32 लाख मतदाता 23 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला करेंगे। कुल मतदाताओं में 8.59 लाख महिलाएं हैं। सहायक निर्वाचन अधिकारी (विस्थापित) रियाज अहमद ने बताया, 'बारामूला लोकसभा क्षेत्र में 20 मई को होने वाले मतदान के लिए कुल 25,821 विस्थापित कश्मीरी मतदाता के रूप में पंजीकृत हैं। इनमें से 12,747 पुरुष मतदाता और 13,074 महिला मतदाता हैं।'

कुल 26 मतदान केंद्र बनाए गए हैं- अधिकारी

उन्होंने बताया कि विस्थापितों के लिए कुल 26 मतदान केंद्र बनाए गए हैं जिनमें से 21 जम्मू में, चार दिल्ली में और एक मतदान केंद्र उधमपुर में स्थापित किया गया है। अहमद ने बताया कि निर्वाचन आयोग ने कश्मीरी विस्थापित मतदाताओं को मतदान केंद्र पर लाने और वासस ले जाने की व्यवस्था की है। सुविधा सुबह छह बजे से शाम छह बजे तक उपलब्ध रहेगी। उन्होंने कहा, 'परिवहन की व्यवस्था वहां मौजूद रहेगी जहां पर विस्थापितों की अधिक संख्या है।'

विस्थापित मतदाताओं के लिए दो तरीके

अहमद ने बताया कि विस्थापित मतदाताओं के लिए वोट डालने के दो तरीके हैं। उन्होंने कहा, 'सबसे पहले, वे एम-फॉर्म भरकर ऐसा कर सकते हैं, जो पूर्व सूचना है और वे विशेष रूप से उनके लिए स्थापित मतदान केंद्र में मतदान कर सकते हैं।' उन्होंने बताया कि दूसरा विकल्प डाक मतपत्रों के माध्यम से मतदान करने का है, जिसके लिए उन्हें फॉर्म-12सी भरना होगा।

इस सीट पर कड़ा मुकाबला है जिसके मद्देजनजर विभिन्न राजनीतिक दलों और स्वतंत्र समूह इन मतदाताओं से संपर्क कर रहे हैं। शेख अब्दुल राशिद उर्फ इंजीनियर राशिद की अवामी इत्तेहाद पार्टी (एआईपी) के मैदान में उतरने से मुकाबला दिलचस्प हो गया है। दो बार के विधायक राशिद दिल्ली की तिहाड़ जेल से चुनाव लड़ रहे हैं। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार एवं पूर्व राज्यसभा सदस्य फैयाज मीर भी मैदान में हैं।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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