मुख्यमंत्री : पांचवे मुख्यमंत्री महामाया प्रसाद सिन्हा, जो बने पहले गैर कांग्रेसी सीएम; 'मेरे जिगर के टुकड़े' ने कर दिया 'खेला'

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की घोषणा के साथ ही राज्य मेंं चुनावों का शंखनाद हो चुका है। तमाम राजनीतिक पार्टियां अपने-अपने उम्मीदवारों की घोषणाएं कर रही हैं और चुनावी मुद्दों पर बहस चल रही है। इस बीच हम आपके लिए राज्य के अब तक के सभी मुख्यमंत्रियों की कहानी लेकर आ रहे हैं। इस कड़ी में आज जानिए बिहार के पांचवे और पहले गैर कांग्रेसी मुख्यमंत्री की कहानी।

बिहार में एक बार फिर विधानसभा चुनावों का शंखनाद हो चुका है। राज्य में 6 व 11 नवंबर को दो चरणों में मतदान होगा और 14 नवंबर 2025 को मतगणना के साथ नई विधानसभा की सूरत भी स्पष्ट हो जाएगी। इन विधानसभा चुनावों के मद्देनजर हम आपके लिए लेकर आए हैं मुख्यमंत्री सीरीज। इस सीरीज के तहत हम बिहार के एक-एक मुख्यमंत्री के बारे में विस्तार से जान रहे हैं। उनके निजी जीवन से लेकर राजनीतिक सफर और मुख्यमंत्री बनने व पद से हटते तक की कहानियां हम यहां संजोकर ला रहे हैं। इसी कड़ी में आज बिहार के पांचवे मुख्यमंत्री महामाया प्रसाद सिन्हा के बारे में जानते हैं। इनके बारे में जानना इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि वह बिहार के पहले गैर-कांग्रेस मुख्यमंत्री थे। चलिए जानते हैं -

5th CM of Bihar Mahamaya Prasad Sinha.

बिहार के पांचवे मुख्यमंत्री महामाया प्रसाद सिन्हा

महामाया प्रसाद सिन्हा का शुरुआती जीवन

महामाया प्रसाद सिन्हा का जन्म आधुनिक बिहार के सीवान जिले में साल 1909 में हुआ था। वह पढ़ाई में काफी अच्छे थे और एक अच्छे एथलीट भी थे। साल 1929 में उन्हें ICS के लिए जाना था, लेकिन वह महात्मा गांधी के सविनय अवज्ञा आंदोलन में शामिल होकर स्वतंत्रता की लड़ाई में लड़ने लगे। इसके कारण उन्हें जेल भी जाना पड़ा। आजादी से पहले वह कांग्रेस के सदस्य रहे। लेकिन बाद में मुख्यमंत्री श्रीबाबू से विवाद के बाद उन्होंने कांग्रेस का दामन छोड़ दिया। कांग्रेस छोड़ने से पहले वह पार्टी के चार बड़े नेताओं में शामिल थे। जिनमें तीन अन्य नाम कृष्ण वल्लभ सहाय, सत्येंद्र नारायण सिंह और विनोदानंद झा के थे।

End of Feed