मुख्यमंत्री: बिहार में कांग्रेस के आखिरी CM साबित हुए जगन्नाथ मिश्र, चारा घोटाले में जेल की हवा भी खाई

बिहार विधानसभा चुनाव के मद्देनजर हम आपके लिए मुख्यमंत्री सीरीज लेकर आए हैं। इस सीरीज के तहत आज बात हो रही है 14वें मुख्यमंत्री डॉ. जगन्नाथ मिश्र के बारे में। वह तीन बार बिहार के मुख्यमंत्री रहे। जिन पर अपनी सरकार बचाने के लिए तंत्र-मंत्र का सहारा लेने का भी आरोप लगा। बाबरी ढहने पर आंसू बहाए और बिहार में कांग्रेस के अंतिम मुख्यमंत्री साबित हुए।

बात अक्टूबर 1989 की है। बिहार के भागलपुर में हिंदू-मुस्लिम दंगे भड़क गए। करीब दो महीने तक भागलपुर इन दंगों की आग में झुलसता रहा। सरकारी आंकड़ों के अनुसार इन दंगों में 1070 लोगों की जान गई थी। हालांकि, दावा किया जाता है कि 2000 से ज्यादा लोगों ने इन दंगों में जान गंवाई थी। इस दौरान करीब 12 हजार घरों को जला दिया गया था और 50 हजार लोग बेघर होकर पलायन को मजबूर हो गए। इस बीच 1989 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को देश में बुरी तरह हार का सामना करना पड़ा। प्रधानमंत्री राजीव गांधी को कुर्सी छोड़नी पड़ी, बिहार में कांग्रेस को 54 में से सिर्फ 4 सीटों पर जीत मिल पायी थी। बिहार में इस हार ठीकरा मुख्यमंत्री सत्येंद्र नारायण सिंह पर फोड़ा गया और पांच दिन बाद ही उनका इस्तीफा ले लिया गया। अब कांग्रेस को संभालने और भागलपुर दंगों के चलते खराब हुई छवि को सुधारने की जिम्मेदारी डॉ. जगन्नाथ मिश्र को दी गई। उनकी मुस्लिमों में अच्छी छवि थी, उन्होंने ही उर्दू को राजकीय भाषा का दर्जा भी दिया था। कांग्रेस को लगा कि जगन्नाथ मिश्र मुस्लिमों के जख्मों पर कुछ मरहम लगा पाएंगे। जगन्नाथ मिश्र तीसरी बार राज्य के मुख्यमंत्री बने और वह बिहार में कांग्रेस के आखिरी मुख्यमंत्री साबित हुए। अपने तीसरे कार्यकाल में वह अगले विधानसभा चुनाव तक यानी कुल 94 दिन तक मुख्यमंत्री की कुर्सी पर रहे। यही नहीं, जिस चारा घोटाले का भूत आज तक लालू प्रसाद यादव का पीछा नहीं छोड़ रहा है, उसी चारा घोटाले में जगन्नाथ मिश्र जेल भी गए।

14th CM of Bihar Jagannath Mishra.

बिहार के 14वें मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्र, तीन बार रहे सीएम

जमींदार परिवार में जन्मे थे जगन्नाथ मिश्र

जगन्नाथ मिश्र का जन्म 24 जून 1937 को बिहार में सुपौल के बलुआ बाजार गांव में हुआ था। उनका परिवार मैथिल ब्राह्मण परिवार था और उनके पिता रविनंदन मिश्र जमींदार थे। उनकी मां यमुना देवी गृहिणी थीं और जगन्नाथ मिश्र पांच भाइयों में सबसे छोटे थे। जगन्नाथ की शुरुआती पढ़ाई बलुआ बाजार में ही हुई। जब वह सिर्फ 9 साल के थे, तभी उनके पिता का निधन हो गया। इसके बाद उनके बड़े भाई ललित नारायण मिश्र ने उनकी जिम्मेदारी संभाली। जगन्नाथ मिश्र का ज्यादातर समय बड़े भाई के साथ ही बीता। साल 1953 में जब जगन्नाथ मिश्र 10वीं में थे, तभी आचार्य विनोबा भावे के भूदान आंदोलन से जुड़ गए। छुट्टियों में उनका ज्यादातर समय विनोबा भावे के साथ ही बीतता था और उनके साथ गांव-गांव पैदल घूमते थे। जगन्नाथ मिश्र ने अपनी ऑटो-बायोग्राफी 'बिहार बढ़कर रहेगा' में लिखा है कि उन्होंने अपने परिवार की भी एक हजार एकड़ जमीन दान में दिलवाई थी।

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