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कर्नाटक चुनाव में 'बजरंगबली' की एंट्री, जानिए PM Modi ने मंच से क्यों करवाई नारेबाजी?

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated May 3, 2023, 06:52 PM IST

Karnataka Election 2023: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को कर्नाटक में एक चुनावी रैली में कहा, कांग्रेस पार्टी ने अपने मेनिफेस्टो में बजरंगबली को ताले में बंद करने का निर्णय लिया है। पहले भगवान श्रीराम को ताले में बंद किया और अब जय बजरंग बली बोलनेवालों को ताले में बंद करने का निर्णय लिया है। यह देश का दुर्भाग्य है।

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कर्नाटक में चुनाव प्रचार के दौरान पीएम मोदी ने लगवाए जय बजरंग बली के नारे

Photo : ANI

Karnataka Election 2023: कर्नाटक में 10 मई को होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले एक बार फिर हिंदुत्व का मुद्दा जोर पकड़ते दिखाई दे रहा है। एक तरफ भाजपा ने फिर से हिजाब और अजान के मुद्दे को उछाला है तो दूसरी तरफ उसने अपने घोषणा पत्र में समान नागरिक संहिता लागू करने का भी ऐलान कर दिया है। इस बीच कर्नाटक के विधानसभा चुनाव में बजरंग बली की एंट्री हो गई है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को कर्नाटक में भाजपा के चुनाव प्रचार के बीच बजरंग बली का जिक्र किया। उन्होंने कर्नाटक के मुदबिद्री में 'बजरंगबली' के नारों के साथ अपनी रैली का समापन किया। आइए जानते हैं कर्नाटक विधानसभा चुनाव में बजरंग बली चुनावी मुद्दा कैसे बने?

कांग्रेस के घोषणा पत्र से क्या है संबंध?

कर्नाटक की सत्ता में वापसी के लिए कांग्रेस पार्टी जोर-शोर से लगी हुई है। पार्टी यहां वोटरों को लुभाने के लिए जोर-शोर से प्रचार कर रही है। इस बीच मंगलवार को पार्टी की ओर से चुनावी घोषणा पत्र जारी किया गया, जिसमें 200 यूनिट बिजली फ्री के वादे के साथ महिलाओं और युवाओं को साधने की कोशिश की गई। पार्टी ने अपने घोषणा पत्र में पीएफआई और बजरंग दल पर प्रतिबंध लगाने का भी ऐलान किया है। पार्टी का कहना है कि ये दोनों संगठन राज्य में सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने का काम कर रहे हैं।

पीएम मोदी ने क्या कहा?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को कर्नाटक में एक चुनावी रैली को सबंधित किया था। उन्होंने कहा, आज जब मैं यहां हनुमान जी की पवित्र भूमि पर आया हूं। मेरे लिए हनुमान जी की पवित्र भूमि को नमन करना बहुत बड़ा सौभाग्य है, लेकिन दुर्भाग्य देखिए जब मैं यहां आया हूं, उसी समय कांग्रेस पार्टी ने अपने मेनिफेस्टो में बजरंगबली को ताले में बंद करने का निर्णय लिया है। पहले भगवान श्रीराम को ताले में बंद किया और अब जय बजरंग बली बोलनेवालों को ताले में बंद करने का निर्णय लिया है। यह देश का दुर्भाग्य है कि कांग्रेस को प्रभु श्रीराम से तो तकलीफ रही ही है, अब उसे जय बजरंगबली बोलने वालों से भी तकलीफ हो रही है।

शिवराज सिंह चौहान ने भी बोला हमला

इस बीच मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी कांग्रेस पर बजरंग दल पर बैन लगाने के वादे पर हमला बोला है। उन्होंने कहा, कांग्रेस की मति मारी गई है। बजरंग दल पर प्रतिबंध लगाने की बात कर रहे हैं। बजरंग दल प्रखर राष्ट्रवादी संगठन है, आतंकवाद और लव-जिहाद का विरोध करता है। सामाजिक सेवा, देश भक्ति के भाव, अपने धर्म और संस्कृति के प्रति स्वाभिमान और जागरण का भाव प्रकट करता है। उसकी तुलना पीएफआई जैसे आतंकवादी संगठन से। यह वही कांग्रेस है, जो अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का विरोध करती थी। यह वही कांग्रेस है, जिसने रामसेतु को काल्पनिक कहा था। यह वही कांग्रेस है, जो मौका मिलते ही हिंदुत्व का विरोध करती है, आज कांग्रेस का चेहरा पूरी तरह से बेनकाब हो गया है। कौन भूलेगा कि मध्य प्रदेश में सिमी के नेटवर्क को खाद-पानी कौन पहुंचा रहा था। सर्जिकल स्ट्राइक का विरोध करते वाले आतंकवाद का महिमा मंडन करने वाले अब बजरंग दल का विरोध कर रहे हैं। कमलनाथ जी बड़े हनुमान जी के भक्त बनते हैं। कमलनाथ भी अब जवाब दें।
प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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