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लोकसभा में बढ़ी पार्टियों की संख्या, जानें कितनी बदली तस्वीर और सांसदों का सारा 'नंबर गेम'

Loksabha Chunav: लोकसभा में पार्टियों की संख्या बढ़ गई है। यानी इस बार संसद की तस्वीर काफी हद तक बदल जाएगी। इस लोकसभा चुनाव में 41 दलों के उम्मीदवार चुने गए, जबकि पिछले चुनाव में 36 दलों के प्रत्याशी जीते थे। आपको नवनिर्वाचित सांसदों का सारा 'नंबर गेम' बताते हैं।

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सांकेतिक तस्वीर

Election News: इस बार के लोकसभा चुनावों में राजनीतिक दलों की भागीदारी में इजाफा देखा गया है। जीतने वाली पार्टियों की तादाद में भी बढ़ोतरी हुई है। चुनावी नतीजों में इस बार भी भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। हालांकि नंबर गेम में वो इस बार पीछे रह गई। नतीजों में एनडीए को बहुमत हासिल हुआ, लेकिन बीजेपी के खाते में 240 सीटें ही आई, जो बहुमत के नंबर से 32 सीटें कम है। ये एक बड़ी वजह है कि संसद में इस बार पार्टियों की संख्या में इजाफा हुआ है।

2024 के चुनाव में चुने गए 41 दलों के उम्मीदवार

2019 के आम चुनाव में 36 दलों के उम्मीदवार चुने जाने की तुलना में 2024 के चुनाव में 41 दलों के उम्मीदवार चुने गए। थिंक-टैंक ‘पीआरएस’ के एक विश्लेषण के अनुसार, इस चुनाव में राष्ट्रीय दलों ने 346 सीट पर जीत प्राप्त की जो कुल सीट की 64 फीसदी हैं, वहीं राज्य स्तरीय मान्यता प्राप्त दलों ने 179 सीट पर जीत दर्ज की है जो कुल सीट का 33 प्रतिशत है।

2009 से 2024 तक कितनी पार्टियों का इजाफा?

गैर-मान्यता प्राप्त दलों ने 11 निर्वाचन क्षेत्रों में जीत हासिल की, वहीं सात पर निर्दलीयों को विजेता घोषित किया गया है। चुनाव से संबंधित विश्लेषण करने वाली संस्था ‘एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स’ के विश्लेषण के अनुसार, 2009 से 2024 तक राजनीतिक दलों की संख्या में 104 प्रतिशत का इजाफा हुआ है।

किस चुनाव में कितनी पार्टियों ने आजमाई किस्मत?

साल 2024 में आम चुनाव में कुल 751 दलों ने हिस्सा लिया, जबकि 2019 में 677, 2014 में 464 और 2009 में 368 दल मैदान में थे। एडीआर और ‘नेशनल इलेक्शन वॉच’ ने हाल में संपन्न हुए चुनावों में किस्मत आजमाने वाले कुल 8,337 उम्मीदवारों के हलफनामों का अध्ययन कर ये आंकड़े प्रस्तुत किए।

नव निर्वाचित सांसदों की कितनी है औसत आयु?

अठारहवीं लोकसभा में नवनिर्वाचित सांसदों की औसत आयु 56 वर्ष है जबकि 17वीं लोकसभा में सदस्यों की औसत उम्र 59 वर्ष थी। पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च नामक संस्था के विश्लेषण में यह बात सामने आई। मंगलवार को घोषित लोकसभा चुनाव परिणाम के अनुसार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) 240 सीट के साथ इस लोकसभा में सबसे बड़ी पार्टी है, वहीं दूसरे स्थान पर कांग्रेस (99) और तीसरे स्थान पर समाजवादी पार्टी (37) है।

इसमें बताया गया है कि 11 प्रतिशत नवनिर्वाचित सदस्यों की आयु 40 साल या इससे कम है और 38 प्रतिशत की उम्र 41 साल से 55 साल के बीच है। विश्लेषण के आंकड़ों के अनुसार करीब 52 प्रतिशत नए सांसदों की आयु 55 साल से कम है। सबसे उम्रदराज लोकसभा सदस्य द्रमुक के टी आर बालू हैं जिनकी आयु 82 साल है, वहीं समाजवादी पार्टी के पुष्पेंद्र सरोज और प्रिया सरोज लोकसभा चुनाव जीतने वाले सबसे कम उम्र के सांसद बने हैं।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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