NEET Topper Bhumika Shekhawat Inspirational story: अगर कोई व्यक्ति दिल से मेहनत करे, सही दिशा में पूरी लगन और योजना के साथ आगे बढ़े, तो सपनों को हकीकत में बदलना मुमकिन है। गुजरात की भूमिका शेखावत ने यही कर दिखाया है। उन्होंने नीट यूजी 2024 की परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 33 हासिल करते हुए 720 में से 715 अंक प्राप्त किए हैं। यह सफलता उनके वर्षों के समर्पण, कड़ी मेहनत और आत्मविश्वास का नतीजा है। भूमिका को बचपन से ही पढ़ाई में रुचि रही है। छठी कक्षा में ही उन्होंने तय कर लिया था कि उन्हें बायोलॉजी पढ़नी है और आठवीं कक्षा में आते-आते उनका सपना साफ हो गया – डॉक्टर बनना है। इस सपने को साकार करने के लिए उन्होंने हर दिन निष्ठा और ईमानदारी से मेहनत की।
भूमिका एक साधारण परिवार से आती हैं। उनके पिता एक समय सर्विसमैन थे और अब एक कपड़ा फैक्ट्री में काम करते हैं। उनकी मां एक स्कूल टीचर हैं। परिवार ने हमेशा उन्हें पढ़ाई के लिए प्रेरित किया और हर कदम पर साथ दिया। माता-पिता का यह सहयोग भी उनकी सफलता का अहम हिस्सा रहा है।
कैसे पाई सफलता
भूमिका की पढ़ाई की रणनीति और दिनचर्या बहुत संतुलित और व्यावहारिक रही। शुरुआत में उन्होंने हर विषय को समान महत्व दिया। NCERT की किताबों को उन्होंने मुख्य आधार बनाया और कोचिंग के नोट्स के साथ गहराई से अध्ययन किया। कक्षाओं के बाद थोड़ा आराम करके वे खुद से पढ़ाई में लग जाती थीं। नीट जैसी प्रतियोगी परीक्षा में एनसीईआरटी की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है, खासकर बायोलॉजी के लिए। भूमिका ने NCERT की किताबों को 5 से 6 बार पढ़ा और हर बार समझकर दोहराया। फिजिक्स और केमेस्ट्री में भी उन्होंने थ्योरी को अच्छी तरह समझा और फिर प्रश्नों का अभ्यास किया।
छोटे छोटे नोट्स बनाए
अंतिम महीनों में, जब तनाव और दबाव सबसे ज्यादा होता है, भूमिका ने मानसिक संतुलन बनाए रखा। उन्होंने हर टेस्ट सीरीज़ को गंभीरता से लिया, अपनी गलतियों को नोट किया और शिक्षकों से मार्गदर्शन लेकर उन्हें सुधारा। यह आदत उनके आत्मविश्वास को और मजबूत करती गई। उन्होंने पढ़ाई के दौरान छोटे नोट्स भी बनाए, जिससे अंतिम समय में रिवीजन आसान हो सके। यह आदत उन्हें विषयों को बेहतर ढंग से याद रखने में मदद करती थी। साथ ही, उन्होंने अपनी कमजोरियों को पहचाना और उन पर निरंतर काम किया।
आज भूमिका शेखावत AIIMS में MBBS के दूसरे वर्ष की पढ़ाई कर रही हैं। उनका सफर इस बात का प्रमाण है कि अगर कोई छात्र सही दिशा में मेहनत करे, तो किसी भी परिस्थिति में बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है। उनकी कहानी हर मेडिकल अभ्यर्थी के लिए एक प्रेरणा है।
