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Maharashtra Education: महाराष्ट्र में हिंदी पहली कक्षा से नहीं बल्कि पांचवीं कक्षा से, जानें अजित उपमुख्यमंत्री ने क्यों कहा ऐसा

Maharashtra Education: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने राज्य के विद्यालयों में पहली कक्षा से तीसरी भाषा के रूप में हिंदी को शामिल किए जाने के कदम का विरोध किया और कहा कि इसे पांचवीं कक्षा से पढ़ाया जाना चाहिए।

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महाराष्ट्र में हिंदी की पढ़ाई (image - socio pulse AI)

Maharashtra Education News: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने राज्य के विद्यालयों में पहली कक्षा से तीसरी भाषा के रूप में हिंदी को शामिल किए जाने के कदम का विरोध किया और कहा कि इसे पांचवीं कक्षा से पढ़ाया जाना चाहिए। मंगलवार को मुंबई में पत्रकारों से बात करते हुए महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री पवार ने कहा कि छात्रों को पहली कक्षा से मराठी ही सीखनी चाहिए ताकि वे इसे अच्छी तरह से पढ़ और लिख सकें।

महाराष्ट्र के स्कूलों में हिंदी तीसरी भाषा

राज्य सरकार ने पिछले सप्ताह एक संशोधित आदेश जारी किया था जिसमें कहा गया था कि मराठी और अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में पहली से पांचवी कक्षा तक के विद्यार्थियों को हिंदी सामान्यतः तीसरी भाषा के रूप में पढ़ाई जाएगी, जिसके बाद इस पर विवाद पैदा हो गया।

20 प्रतिशत छात्रों की चाहिए होगी सहमति

सरकार ने कहा कि हिंदी अनिवार्य नहीं होगी तथापि उसने हिंदी के अलावा किसी अन्य भाषा का अध्ययन करने के लिए स्कूल में प्रत्येक कक्षा में कम से कम 20 छात्रों की सहमति अनिवार्य कर दी।

पवार ने कहा, ‘‘मुख्यमंत्री ने सोमवार को इस मुद्दे पर एक बैठक बुलाई। मेरा मानना है कि हिंदी को पहली कक्षा से चौथी कक्षा तक शुरू नहीं किया जाना चाहिए। इसे पांचवीं कक्षा से शुरू किया जाना चाहिए। छात्रों को पहली कक्षा से मराठी सीखनी चाहिए और इसे धाराप्रवाह पढ़ने और लिखने में सक्षम होना चाहिए।"

छात्रों पर नहीं डाला जाएगा बोझ

उन्होंने कहा कि हालांकि कोई भी किसी विशेष भाषा को पढ़ाने के खिलाफ नहीं है, लेकिन युवा छात्रों पर शुरुआती चरण में एक अतिरिक्त भाषा का बोझ डालना अनुचित है।

इस बीच, अभिनेता सयाजी शिंदे ने भी पहली कक्षा से हिंदी पढ़ाने का विरोध किया। उन्होंने कहा, ‘‘छात्रों को मराठी सीखने की अनुमति दी जानी चाहिए, जो एक बहुत ही समृद्ध भाषा है। उन्हें कम उम्र में ही मराठी में पारंगत होना चाहिए और उन पर किसी अन्य भाषा का बोझ नहीं डालना चाहिए। अगर इसे अनिवार्य बनाना ही है, तो इसे पांचवीं कक्षा के बाद ही पढ़ाया जाना चाहिए।’’

(भाषा इनपुट के साथ)

Neelaksh Singh
नीलाक्ष सिंहauthor

नीलाक्ष सिंह 2021 से टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल से जुड़े हैं और एजुकेशन सेक्शन के लिए कंटेंट लिखते हैं। लखनऊ विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने प्रिंट मीडिया में इंटर्नशिप की, जहां फील्ड रिपोर्टिंग, स्टूडेंट-इश्यू बेस्ड ग्राउंड स्टोरीज और सटीक न्यूजराइटिंग की बुनियादी समझ हासिल की। प्रिंट के बाद डिजिटल मीडिया में भी वह एजुकेशन बीट पर ही लगातार काम करते रहे हैं। पत्रकारिता में 10 सालों से सक्रिय नीलाक्ष सिंह 12 हजार से अधिक खबरें लिख चुके हैं। वह एग्जाम अपडेट्स, एडमिशन प्रोसेस, करियर गाइडेंस, स्टूडेंट वेलफेयर, बोर्ड रिजल्ट्स और नीतिगत बदलावों पर गहन और बेहद उपयोगी कंटेंट तैयार करते हैं।

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