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Madan Mohan Malaviya Quotes: मदन मोहन मालवीय के प्रेरक विचार, छात्र बांध लें गांठ

Madan Mohan Malaviya Motivational Inspirational Quotes for Students: मां भारती के परम उपासक, 'भारत रत्न' महामना पं. मदन मोहन मालवीय जी की आज (12 नवंबर) को पुण्यतिथि है। उनकी वाणी में वेद की गंभीरता और कर्म में राष्ट्रसेवा की तपस्या थी। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना कर उन्होंने भारत व भारतीयता के आदर्शों को प्रखर किया एवं युवाओं में संस्कार युक्त शिक्षा के बीज बोए। उनके विचार छात्रों को प्रेरणा देते हैं।

Madan Mohan Malaviya Quotes

Madan Mohan Malaviya Quotes

Madan Mohan Malaviya Motivational Inspirational Quotes for Students: मां भारती के परम उपासक, 'भारत रत्न' महामना पं. मदन मोहन मालवीय जी की आज (12 नवंबर) को पुण्यतिथि है। उनकी वाणी में वेद की गंभीरता और कर्म में राष्ट्रसेवा की तपस्या थी। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना कर उन्होंने भारत व भारतीयता के आदर्शों को प्रखर किया एवं युवाओं में संस्कार युक्त शिक्षा के बीज बोए। उनके विचार छात्रों को प्रेरणा देते हैं। उनका मानना था कि शिक्षा केवल ज्ञान ही नहीं, बल्कि चरित्र-निर्माण, नैतिक मूल्यों और सामाजिक उत्थान का भी साधन है। ऐसे युगद्रष्टा, स्वतंत्रता सेनानी और समाज सुधारक महामना को उनकी पुण्यतिथि पर विनम्र श्रद्धांजलि!

मदन मोहन मालवीय प्रेरक विचार

  • उनका मानना था कि शिक्षा का उद्देश्य व्यक्ति को न केवल विद्वान बनाना है, बल्कि उसे एक अच्छा इंसान बनाकर समाज के उत्थान में सहायक बनाना भी है।
  • उन्होंने शिक्षा को चरित्र निर्माण और व्यक्तित्व विकास का एक महत्वपूर्ण साधन माना।
  • भारतीय संस्कृति का संवर्धन: वह शिक्षा के माध्यम से भारतीय संस्कृति और परंपराओं को सहेजने के पक्षधर थे।
  • मालवीय ने धर्म को चरित्र का आधार और मानव सुख का सच्चा स्रोत माना।
  • उनका मानना था कि शिक्षा को नैतिक और आध्यात्मिक रूप से सशक्त होना चाहिए।
  • उन्होंने "सत्यमेव जयते" (सत्य की ही जीत होगी) के नारे को लोकप्रिय बनाया, जो सत्य और न्याय पर आधारित उनके विचारों को दर्शाता है।
  • उन्होंने देशभक्ति को एक शक्तिशाली उत्थान प्रभाव के रूप में देखा जो लोगों को उच्च विचारों और निःस्वार्थ कार्यों के लिए प्रेरित करती है।
  • उन्होंने मानव सेवा को हर कार्य से ऊपर रखा, जैसा कि एक घटना में उन्होंने एक घायल महिला की मदद के लिए अपना जलसा छोड़कर अस्पताल ले जाने का आदेश दिया था।
  • वह धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों के समर्थक थे, लेकिन उनका मानना था कि यह देश सभी के लिए है और पारसी, मुसलमान, ईसाई और यहूदी सभी को एक साथ मिलकर भारत की उन्नति के लिए काम करना चाहिए।

Madan Mohan Malaviya Jivan Parichay: मदन मोहन मालवीय जीवन परिचय

मदन मोहन मालवीय का जन्म प्रयागराज में 25 दिसम्बर 1861 को पं० ब्रजनाथ व मूनादेवी के यहां हुआ था। वे अपने माता-पिता से उत्पन्न कुल सात भाई बहनों में पांचवें पुत्र थे। श्रीमद्भागवत की कथा सुनाकर अपनी आजीविका अर्जित करते थे। पांच वर्ष की आयु में उन्हें उनके मां-बाप ने संस्कृत भाषा में प्रारम्भिक शिक्षा लेने हेतु पण्डित हरदेव धर्म ज्ञानोपदेश पाठशाला में भर्ती करा दिया जहां से उन्होंने प्राइमरी परीक्षा उत्तीर्ण की। उसके बाद वे एक अन्य विद्यालय में भेज दिये गये जिसे प्रयाग की विद्यावर्धिनी सभा संचालित करती थी। यहां से शिक्षा पूर्ण कर वे इलाहाबाद के जिला स्कूल पढ़ने गये। यहीं उन्होंने मकरन्द के उपनाम से कवितायें लिखनी प्रारम्भ की। उनकी कवितायें पत्र-पत्रिकाओं में खूब छपती थीं। लोगबाग उन्हें चाव से पढते थे। 1879 में उन्होंने म्योर सेण्ट्रल कॉलेज से, जो आजकल इलाहाबाद विश्वविद्यालय के नाम से जाना जाता है, मैट्रीकुलेशन (दसवीं की परीक्षा) उत्तीर्ण की। हैरिसन स्कूल के प्रिंसपल ने उन्हें छात्रवृत्ति देकर कलकत्ता विश्वविद्यालय भेजा जहां से उन्होंने 1884 ई० में बी०ए० की उपाधि प्राप्त की।

Madan Mohan Malaviya Kaun The: मदन मोहन मालवीय कौन थे

मदन मोहन मालवीय जी ने भारत में स्काउटिंग की शुरुआत की—1917 में उन्होंने 'सेवा समिति स्काउट एसोसिएशन' की स्थापना की, जो युवाओं को सेवा और अनुशासन सिखाने का माध्यम बनी। वे चार बार कांग्रेस अध्यक्ष रहे (1909, 1918, 1932, 1933)। वे एक महान पत्रकार भी थे—'अभ्युदय', 'लीडर' और 'मर्यादा' जैसे अखबार शुरू किए। रवींद्रनाथ टैगोर ने उन्हें 'महामना' की उपाधि दी।

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कुलदीप राघव
कुलदीप राघव Author

कुलदीप राघव प्रिंट और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों से अधिक अनुभव का रखने वाले पत्रकार हैं। टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में वह एजुकेशन सेक्शन को लीड कर... और देखें

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