Madan Mohan Malaviya Quotes
Madan Mohan Malaviya Motivational Inspirational Quotes for Students: मां भारती के परम उपासक, 'भारत रत्न' महामना पं. मदन मोहन मालवीय जी की आज (12 नवंबर) को पुण्यतिथि है। उनकी वाणी में वेद की गंभीरता और कर्म में राष्ट्रसेवा की तपस्या थी। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना कर उन्होंने भारत व भारतीयता के आदर्शों को प्रखर किया एवं युवाओं में संस्कार युक्त शिक्षा के बीज बोए। उनके विचार छात्रों को प्रेरणा देते हैं। उनका मानना था कि शिक्षा केवल ज्ञान ही नहीं, बल्कि चरित्र-निर्माण, नैतिक मूल्यों और सामाजिक उत्थान का भी साधन है। ऐसे युगद्रष्टा, स्वतंत्रता सेनानी और समाज सुधारक महामना को उनकी पुण्यतिथि पर विनम्र श्रद्धांजलि!
मदन मोहन मालवीय का जन्म प्रयागराज में 25 दिसम्बर 1861 को पं० ब्रजनाथ व मूनादेवी के यहां हुआ था। वे अपने माता-पिता से उत्पन्न कुल सात भाई बहनों में पांचवें पुत्र थे। श्रीमद्भागवत की कथा सुनाकर अपनी आजीविका अर्जित करते थे। पांच वर्ष की आयु में उन्हें उनके मां-बाप ने संस्कृत भाषा में प्रारम्भिक शिक्षा लेने हेतु पण्डित हरदेव धर्म ज्ञानोपदेश पाठशाला में भर्ती करा दिया जहां से उन्होंने प्राइमरी परीक्षा उत्तीर्ण की। उसके बाद वे एक अन्य विद्यालय में भेज दिये गये जिसे प्रयाग की विद्यावर्धिनी सभा संचालित करती थी। यहां से शिक्षा पूर्ण कर वे इलाहाबाद के जिला स्कूल पढ़ने गये। यहीं उन्होंने मकरन्द के उपनाम से कवितायें लिखनी प्रारम्भ की। उनकी कवितायें पत्र-पत्रिकाओं में खूब छपती थीं। लोगबाग उन्हें चाव से पढते थे। 1879 में उन्होंने म्योर सेण्ट्रल कॉलेज से, जो आजकल इलाहाबाद विश्वविद्यालय के नाम से जाना जाता है, मैट्रीकुलेशन (दसवीं की परीक्षा) उत्तीर्ण की। हैरिसन स्कूल के प्रिंसपल ने उन्हें छात्रवृत्ति देकर कलकत्ता विश्वविद्यालय भेजा जहां से उन्होंने 1884 ई० में बी०ए० की उपाधि प्राप्त की।
मदन मोहन मालवीय जी ने भारत में स्काउटिंग की शुरुआत की—1917 में उन्होंने 'सेवा समिति स्काउट एसोसिएशन' की स्थापना की, जो युवाओं को सेवा और अनुशासन सिखाने का माध्यम बनी। वे चार बार कांग्रेस अध्यक्ष रहे (1909, 1918, 1932, 1933)। वे एक महान पत्रकार भी थे—'अभ्युदय', 'लीडर' और 'मर्यादा' जैसे अखबार शुरू किए। रवींद्रनाथ टैगोर ने उन्हें 'महामना' की उपाधि दी।