साइंस, AI, रिसर्च, इनोवेशन और हाईटेक टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भारत-फ्रांस के बीच एक नए और स्वर्ण युग की शुरुआत हो रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया फ्रांस यात्रा के दौरान दोनों देशों ने रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण फैसले लिए, जिसमें से एक है 'भारत-फ्रांस इनोवेशन रोडमैप 2030' (India-France Innovation Roadmap 2030)। इस रोडमैप को अंतिम रूप दिया गया है। दोनों देशों के बीच यह साझेदारी केवल एक सामान्य समझौता नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा मजबूत और दूरगामी फ्रेमवर्क साबित होगा, जो आने वाले सालों में दोनों देशों के तकनीकी सहयोग और विकास को एक नई और स्पष्ट दिशा प्रदान करेगा।
फ्रांस और भारत के बीच यह ऐतिहासिक डील भविष्य के लिए बहुत लाभकारी साबित होने वाली है। इस डील की सबसे खास बात यह है कि भारत के टॉप तकनीकी संस्थान यानी आईआईटी (IITs) और आईआईएससी फ्रांस के वर्ल्ड-क्लास शैक्षणिक संस्थान के साथ में मिलकर काम करने वाले हैं और फ्यूचर तकनीकों पर डीप रिसर्च करेगा।
पीएम मोदी की फ्रांस यात्रा में 'इनोवेशन रोडमैप 2030'
इस रोडमैप को पीएम मोदी की फ्रांस यात्रा के दौरान दोनों देशों द्वारा अपनाया गया। पीएम मोदी और फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बीच हुई उच्चस्तरीय द्विपक्षीय वार्ताओं में दोनों देशों ने तकनीकी और आर्थिक भविष्य को लेकर कई महत्वपूर्ण फैसले लिए, जिसमें इनोवेशन रोडमैप एक था। पीएम मोदी की फ्रांस यात्रा के सबसे बड़ा परिणाम 'इनोवेशन रोडमैप 2030' को माना जा रहा है, जो देश के 'विकसित भारत' के संकल्प और फ्रांस के फ्यूचर टेक्नोलॉजी विजन को एक साथ जोड़ने का काम करता है।
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देश के टॉप IITs और फ्रांस के बीच 19 ऐतिहासिक समझौते
भारत-फ्रांस इनोवेशन रोडमैप 2030 का सबसे मजबूत और मुख्य स्तंभ एजूकेशन और रिसर्च का आदान प्रदान है। जी हां, इसके तहत भारत और फ्रांस के प्रमुख एजुकेशनल इंस्टीट्यूट के बीच 19 संस्थागत समझौते हुए हैं। इसका सीधा अर्थ यह है कि भारत और फ्रांस के टॉप संस्थान आपस में मिलकर आगे काम करने वाले हैं। बता दें कि इसमें IIT बॉम्बे, IIT दिल्ली, IIT मद्रास और IISc बेंगलुरु को शामिल किया गया है। ये सभी संस्थान मिलकर फ्रांस के टॉप इंस्टीट्यूट के साथ ज्वाइंट रिसर्च प्रोग्राम और तकनीकी विकास को बढ़ावा देंगे। इस कदम से भारतीय छात्रों और रिसर्चर्स को लाभ मिलेगा, क्योंकि उन्हें फ्रांस की अत्याधुनिक लैब्स, एडवांस्ड इंफ्रास्ट्रक्चर और वैश्विक विशेषज्ञों का सीधा सहयोग मिल सकेगा।
डिजिटल टेक्नोलॉजी के लिए स्थापित होगा 'सेंटर ऑफ डिजिटल साइंसेज'
डिजिटल क्रांति के इस युग में दोनों देशों के आईटी और डिजिटल क्षेत्र में एक साथ एक दूसरे के सहयोग से महारत हासिल करने के लिए भारत के डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (DST) और फ्रांस की नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च इन डिजिटल साइंस एंड टेक्नोलॉजी (INRIA) ने एक दूसरे से हाथ मिलाया है। इन दोनों विभागों के आपसी सहयोग से एक विशेष 'सेंटर ऑफ डिजिटल साइंसेज' (Center of Digital Sciences) स्थापित करने का फैसला लिया है। इस सेंटर का काम मुख्य रूप से डिजिटल सेक्टर में जॉइंट रिसर्च और नई टेक्नोलॉजी के डेवलपमेंट को गति देना है। इसके माध्यम से भारत और फ्रांस की वैज्ञानिकों की टीमें मिलकर डिजिटल टेक्नोलॉजी, कोडिंग, सॉफ्टवेयर और डेटा मैनेजमेंट के क्षेत्र में नई-नई खोजें करेंगी, जो भविष्य के उद्योगों को बदलने की क्षमता रखेंगी।
India France Innovation Roadmap 2030
फ्रांस में गूंजेगा भारतीय ज्ञान
भारत और फ्रांस का इनोवेशन रोडमैप 2030 का समझौता केवल मशीनों और कंप्यूटरों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें दोनों देशों के सांस्कृतिक और बौद्धिक मूल्यों को भी गहराई से जोड़ा गया है। इसी समझौते के तहत फ्रांस की विश्व प्रसिद्ध यूनिवर्सिटी पेरिस-सैकले (University Paris-Saclay) में AI, इनोवेशन और संस्कृति पर ICCR इंडिया चेयर स्थापित की जाने वाली है।
बता दें कि इस विशेष चेयर का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच शिक्षा और संस्कृति के आपसी सहयोग को मजबूत बनाना है। इसके माध्यम से फ्रांस की इस टॉप यूनिवर्सिटी में फ्रांसीसी और अंतरराष्ट्रीय छात्रों को भारतीय ज्ञान, भारत की समृद्ध संस्कृति, वैश्विक मुद्दों पर भारत की सोच और हमारे तकनीकी नवाचारों के बारे में विस्तार से जानने और पढ़ने के लिए एक वैश्विक मंच प्रदान करता है।
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आधुनिक तकनीकों पर भी रहेगा विशेष फोकस
इस रोडमैप के तहत फ्यूचर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), साइबर सुरक्षा, सुपरकंप्यूटिंग और क्वांटम टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग को बढ़ाए जाने को शामिल किया गया है। दोनों देश (भारत और फ्रांस) इस बात पर पूरी तरह से सहमत हैं कि वैश्विक चुनौतियों जैसे जलवायु परिवर्तन, सुरक्षित इंटरनेट और डेटा गोपनीयता से निपटने के लिए एक मजबूत और भरोसेमंद तकनीकी इकोसिस्टम की जरूरत है, जिसमें भारत का सॉफ्टवेयर टैलेंट और फ्रांस की एडवांस्ड इंजीनियरिंग मिलकर एक बड़ा बदलाव ला सकती है।
वैश्विक महाशक्ति बनने की राह पर एक और मजबूत कदम
'भारत-फ्रांस इनोवेशन रोडमैप 2030' केवल दो देशों की सरकारों के बीच साइन किया गया केवल एक डॉक्यूमेंट का टुकड़ा नहीं है। यह आने वाले कल की महाशक्तियों का एक ब्लूप्रिंट जैसा है। जब IITs और IISc जैसी भारतीय संस्थाओं की मेधावी दिमागी क्षमता और फ्रांस की तकनीकी विशेषज्ञता एक साथ काम करेंगे, तो इससे न केवल दोनों देशों के युवाओं के लिए उच्च स्तर रोजगार और रिसर्च के नए रास्ते खुलेंगे, बल्कि पूरी दुनिया को डिजिटल और वैज्ञानिक क्षेत्र में नए समाधान मिलेंगे।
