AI and Data science future afer 10 years : 12वीं के बाद छात्रों के सामने अलग-अलग करियर ऑप्शन होते हैं। कोई MBBS, कोई BA तो कोई BCA समेत सभी छात्र अलग-अलग कोर्सेज की तैयारी में हैं। कई छात्र डिप्लोमा कोर्सेज या फिर अलग-अलग तरह के शॉर्ट-टर्म टेक कोर्स भी कर रहे हैं। चारों तरफ बस इस बात की होड़ मची है कि किसी तरह कॉलेज खत्म होते ही एक अच्छी नौकरी मिल जाए लेकिन इस बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि आज आप जिस करियर या कोर्स को अपना रहे हैं, वो 10 साल बाद आपके कितने काम आएगा? क्या ये 10 सालों के बाद भी इतना ही कारगर रहेगा या फिर नहीं? आने वाले खतरे और चुनौतियों को भांपते हुए कुछ खास कोर्सेज की मांग आज भले ही बहुत ज्यादा दिख रही हो, लेकिन तकनीक के इस दौर में यह जानना बेहद जरूरी है कि इनमें से कौन से विकल्प भविष्य में टिक पाएंगे। चलिये बात करते हैं कि क्या आज की सबसे हॉट स्किल्स आने वाले समय में भी इतनी ही डिमांडिंग रहेंगी जितनी कि आज हैं? जानते हैं उन चुनिंदा विकल्पों के बारे में जो 10 साल बाद भी पूरी तरह काम आएंगे और आपका करियर सुरक्षित रखेंगे।
AI स्किल्स पर बढ़ता जोर
आजकल के AI वाले दौर में युवा इससे जुड़ी स्किल्स सीख रहे हैं। कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के तुरंत ही बाद युवाओं का रुझान Generative AI, Python Programming, Data Analytics, Prompt Engineering और Machine Learning (ML) जैसे शॉर्ट टर्म सर्टिफिकेट कोर्सेज की तरफ बढ़ रहा है। सभी को ये लगता है कि 6 महीने का डिप्लोमा या फिर एआई टूल को ऑपरेट करने की बेसिक स्किल उन्हें जीवनभर के लिए एक सुरक्षित और हाई पेइंग करियर देगी। आने वाले खतरे और चुनौतियों को भांपते हुए कुछ ऐसे ही कोर्सेज की मांग बढ़ती जा रही है मगर इन सबके बीच ये जानना बेहद जरूरी है कि क्या ये सभी कोर्सेज या फिर स्किल आने वाले 10 सालों में काम के रह जाएंगे ? चलिये बात करते हैं कि क्या आने वाले समय में भी ये कोर्सेज इतने ही डिमांडिंग रह जाएंगे जितने कि आज हैं? साथ ही जानते हैं उन सभी विकल्पों के बारे में, जो कि 10 साल बाद भी काम आएंगे।
आज के युवा की होड़- भेड़चाल या फिर मजबूरी ?
अगर बात करें आज के दौर में भारतीय युवाओं के बीच चल रहे क्रेज की, तो एडटेक, प्लेटफॉर्म्स और सोशल मीडिया विज्ञापनों ने एक अजीब सा डर (FOMO) पैदा कर दिया है। आज युवा सबसे ज्यादा क्या कर रहे हैं? ग्रेजुएशन पूरी होती ही वे 50,000 से लेकर 3 लाख रुपये तक के AI और डेटा साइंस मास्टरक्लास या फिर फुल स्टैक एआई डेवलपर जैसे बूटकैम्प्स में एडमिशन ले रहे हैं।
चैटजीपीडी या फिर मिडजर्नी जैसे टूल्स के आने के बाद प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग को इस तरह से दिखाया गया, जैसे कि यही भविष्य का सबसे बड़ा मंत्र हो। युवाओं की इसी होड़ के कारण आज के समय में बुनियादी डेटा कोडिंग, सिंपल एक्सक्लूसिव, क्वेरी लिखना और सामान्य चैटबॉट कस्टमाइजेशन सिखाने वाले संस्थानों की चांदी कट रही है। लेकिन इस होड़ में युवा इस बात को बिल्कुल भूल रहे हैं कि क्या जिस गति से एआई खुद को अपग्रेड कर रहा है, वो अगले 3 से 5 सालों में इन बुनियादी कोडिंग और प्रॉम्प्टिंग के कामों को पूरी तरह से खुद ही संभाल लेगा। यानी कि आज जो हुनर हॉट केक बना हुआ है, वो 10 साल के बाद पूरी तरह से अप्रासंगिक हो सकता है।
10 साल बाद की कल्पना
जब हम आज से 10 साल बाद की दुनिया की कल्पना करते हैं तो परिदृश्य बिल्कुल ही अलग होगा। बुनियादी डेटा एंट्री, सिंपल रिपोर्ट मेंकिंग, वेबसाइट के लिए बेसिक कोड लिखना या फिर साधारण ग्राफिक और कंटेंट जनरेशन जैसे काम पूरी तरह से मशीनों के हवाले हो चुके होंगे। तब केवल AI टूल्स का इस्तेमाल करना जानना कोई अनोखी स्किल नहीं रह जाएगी क्योंकि वो हर किसी के लिए वैसे ही आम बात होगी, जैसे कि आज कंप्यूटर का इस्तेमाल करना है।
तब असली मांग उन लोगों की होगी, जो इन AI मॉडल्स के पीछे के साइंस को समझें, इसके बड़े बुनियादी ढांचे को संभाल सकें और जटिल मानवीय समस्याओं को सुलझाने के लिए AI का सही इस्तेमाल कर सकें। अगर आप लंबे समय के लिए एक सुरक्षित करियर की प्लानिंग कर रहे हैं तो आपको सिर्फ टूल्स सीखने की बजाय इन कोर और एडवांस क्षेत्रों पर भी ध्यान देना चाहिए-
एआई नीति, सुरक्षा और नैतिक विशेष विशेषज्ञ (AI Ethics & Govrnance Specialists)
जैसे-जैसे एआई इंसानी जिंदगी के फैसलों में शामिल होगा (जैसे कि लोन अप्रूवल, अदालती फैसले या फिर मेडिकल डायग्नोसिस) वैसे-वैसे पक्षपात, डेटा प्राइवेसी और डीपफेक जैसे साइबर खतरे भी अपने चरम पर होंगे। कंपनियों और सरकारों को ऐसे एथिक्स एक्सपर्ट्स की सख्त जरूरत होगी, जो ये तय कर सकें कि AI नियमों और नैतिक दायरों में रहकर काम करे।
AI कितनी ही एडवांस हो जाए लेकिन वो खुद को नैतिक रूप से सही या फिर गलत नहीं ठहरा सकता है। इसके लिए हमेशा इंसानी विवेक और सही निर्णय क्षमता की जरूरत होगी।
भविष्य के लिए क्या हैं करियर के ऑप्शन ?
एडवांस्ड MLOps और AI आर्किटेक्ट
आज का युवा सिर्फ तैयार एआई मॉडल्स को ही इस्तेमाल करना सीख रहे हैं लेकिन भविष्य उनका सुरक्षित रहेगा, जो इन मॉडल्स का बुनियादी ढांचा तैयार करेंगे। एमएलऑप्स का काम AI मॉडल्स को बड़े पैमाने पर कंपनियों के सिस्टम में डिप्लॉय, टेस्ट और लगातार मेंटेन करना होता है।
जैसे-जैसे दुनिया के छोटे-बड़े सभी बिजनेस पूरी तरह से AI संचालित होंगे, उनके जटिल और भारी-भरकम तकनीकी सिस्टम को डिजाइन करने वाले आर्किटेक्स्ट्स की मांग भी बढ़ेगी।
डोमेन विशिष्ट एआई इंटीग्रेशन
भविष्य में सिर्फ शुद्ध टेक कंपनियों जैसे गूगल या माइक्रोसॉफ्ट में ही एआई एक्सपर्ट्स की जरूरत नहीं होगी। हेल्थकेयर, फाइनेंस और स्मार्ट एग्रीकल्चर समेत क्लाइमेट चेंज जैसे क्षेत्रों में भी एआई का कस्टमाइज्ड इस्तेमाल काफी बढ़ जाएगा।
डेटा इंजीनियरिंग और डेटा प्रिवेंशन (Data Engineering)
अकसर लोग डेटा एनालिस्ट और डेटा इंजीनियर में कन्फ्यूज हो जाते हैं। एआई को सटीक काम करने के लिए बिल्कुल साफ, व्यवस्थित और अरबों-खरबों की मात्रा में डेटा की जरूरत होती है। डेटा इंजीनियर्स इस डेटा को प्रोसेस करने, री स्ट्रक्चर करने और सुरक्षित करने का काम करते हैं। इसकी डिमांड इसलिये भी है क्योंकि डेटा की मात्रा हर सेकेंड बढ़ रही है। जब तक डेटा रहेगा, तब तक उसे संभालने वाले इंजीनियर्स की जरूरत एआई मॉडल्स को जिंदा रखने के लिए पड़ती रहेगी।
मानवीय संज्ञानात्मक कौशल और क्रिटिकल थिंकिंग (Human Cognitive & Soft Skills)
मशीनें डेटा का विश्लेषण पलक झपकते ही कर सकती हैं लेकिन वे इंसानी भावनाएं, टीम लीडरशिप, कूटनीति और एकदम अलग स्थिति में लीग से हटकर नहीं सोच सकती हैं। ऐसे में जो युवा तकनीकी समझ के साथ-साथ अपनी कम्यूनिकेश स्किल्स, साइकोलॉजी और क्रिएटिव थिंकिंग को निखारेंगे, उनके करियर पर कोई भी मशीन कब्जा नहीं कर सकेगी।
