एजुकेशन

AI से ऐसे बदल जाएगा भारत का एजुकेशन सिस्टम, क्लास 3 से बच्चे सीखेंगे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस

Artificial intelligence to change indian education system: जैसे अभी तक बचपन से ही हिंदी, अंग्रेजी, गणित और साइंस जैसे सब्जेक्ट बचपन से ही पढ़ाए जाते रहे हैं। ठीक उसी तरह आने वाले साल में एआई को भी मेंडेटरी यानी जरूरी सब्जेक्ट बनाया जाने वाला है। सीबीएसई ने हाल ही में अपने स्कूलों में छोटी कक्षा से ही एआई पढ़ाए जाने की बात रखी है। बता दें कि पूरे देश में सीबीएसई के 18,000 से भी ज्यादा स्कूल हैं। अगर बोर्ड का ये फैसला स्कूलों पर लागू हो जाता है तो आने वाले समय में भारत का एजुकेशन सिस्टम पूरी तरह से बदल जाएगा।

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Indian Education System (iStock)

AI In indian school curriculum: अभी तक स्कूलों में शिक्षा का पैटर्न ही बहुत अलग था। मगर अब शिक्षा के क्षेत्र में जल्द ही बड़ी क्रांति देखने को मिलने वाली है। अगले साल यानी 2026 से स्कूलों में एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI in Indian Schools) के बारे में पढ़ाया जाएगा। अब आप सोच रहे होंगे कि बच्चे एआई या फिर चैटजीपीटी के बारे में सीखकर क्या करेंगे? या फिर बच्चों के लिए ये काफी जल्दी है कि स्कूलों में ही उन्हें इन सब चीजों के बारे में सिखाया जा रहा है। मगर लॉन्ग टर्म में देखें तो पूरा एजुकेशन सिस्टम पढ़ाई (Indian Education System) करने का तरीका ही बदलने जा रहा है। आने वाले समय में एआई की डिमांड बड़ी तेजी से बढ़ती ही जा रही है और ऐसे में बच्चों को भी इसके लिए पूरी तरह से तैयार किया जा रहा है। चीन की बात करें तो वहां ये सब चार साल पहले ही शुरू हो चुका है। 25 करोड़ स्टूडेंट्स की आबादी वाले भारत में स्कूलों में एआई शिक्षा एक क्रांति लेकर आने वाली है। भारत में एआई की मदद से पूरी तरह से शिक्षा ही बदलने वाली है। मगर इस बड़े बदलाव के साथ-साथ ढेरों चुनौतियां भी मुंह खोले खड़ी हैं।

शिक्षा में क्रांति लाएगा AI

जैसे अभी तक बचपन से ही हिंदी, अंग्रेजी, गणित और साइंस जैसे सब्जेक्ट बचपन से ही पढ़ाए जाते रहे हैं। मगर अब इन सब्जेक्ट्स की ही तरह एआई भी मेंडेटरी किया जा रहा है। यानी कि इन सब्जेक्ट्स की तरह अब एआई भी पढ़ाया जाएगा। सीबीएसई ने एक बड़ा फैसला लेते हुए पूरे भारत में अपने 18,000 से भी ज्यादा स्कूलों में एआई को एक स्किल मानते हुए एआई स्टडी को जरूरी बताया है और अगले साल से इसे लागू करने की भी बात कही है।

अब स्कूलों में AI को बनाया जाएगा जरूरी विषय

AI in Schools

सीबीएसई की नई पहल: (CBSE New Education System)

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सीबीएसई की ओर से एनसीईआरटी को एक ड्राफ्ट मिला है और अब एनसीईआरटी की विशेषज्ञ कमेटी बनाई जा रही है। यही कमेटी एआई कोर्स के ड्राफ्ट पर अंतिम निर्णय लेगी। सीबीएसई के स्कूलों में तो क्लास 8वीं से एआई की पढ़ाई का ऑप्शन दिया जाता है। मगर राज्य के शिक्षा बोर्ड में ये ऑप्शन नहीं मिलता। अगले साल से हर बोर्ड में ये ऑप्शन दिया जाएगा।

संजय कुमार ने दी जानकारी अटल इनोवेशन मिशन के तहत अटल टिंकरिंग लैब्स (Atal Tinkering Labs) में बड़े स्तर पर एआई को लागू किए जाने की योजना है। इस बारे में बात करते हुए एआई इकोनोमी में जॉब्स के नए अवसरों के रोडमैप पर नीति आयोग की एक रिपोर्ट लॉन्चिंग के मौके पर स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव संजय कुमार ने कहा कि अगले वर्ष नये सत्र से देश के सभी राज्यों के स्कूली छात्रों के लिए तीसरी क्लास से ही AI करिकुलम तैयार कर लिया जाएगा।

भारत के किस राज्य ने हाल ही में AI स्कूल लॉन्च किया है? First Indian State to launch AI

केरल एक ऐसा राज्य है जिसने हाल ही में एआई स्कूल लॉन्च किया है।

ATL क्या है (What is ATL)

ये भारत सरकार की एक पहल है, जिसका उद्देश्य स्कूलों में बच्चों को नवाचार और रचनात्मकता सिखाना है।

बड़ी कक्षा के बच्चे ले रहे एआई की क्लासेज

6वीं क्लास से एक्स्ट्रा सब्जेक्ट के तौर पर एआई की पढ़ाई शुरू की गई थी। अभी तक 16 क्लासेस ही बच्चों को एआई की दी जा रही थी। यानी कि पूरे साल में 1-1 घंटे की सिर्फ 16 क्लासेस ही दी जा रही थीं। एक साल में 16 क्लासेज कंप्लीट करनी होती थीं। मगर अब बच्चों को शुरू से ही एआई से रूबरू करवाया जाएगा और इसे भी अन्य विषयों की ही तरह सिलेबस में जरूरी किया जाएगा। शिक्षकों को एआई की ट्रेनिंग दी जाएगी, जिससे कि वे बच्चों को एआई के बारे में अच्छी तरह से पढ़ा सकें।

स्कूलों में सिखाया जाएगा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस

स्कूलों में सिखाया जाएगा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस

अटल टिंकरिंग लैब (What is Atal Tinkering Lab)

नीति आयोग और अटल इनोवेशन का पार्ट अटल टिंकरिंग लैब (Atal Tinkering Lab) नाम का एक बेस मॉड्यूल बनाया गया है। इस बेस मॉडल के अंदर बच्चों को एआई से जुड़ी बेसिक जानकारी समझाई जाएगी और इसके बारे में पढ़ाया जाएगा। बच्चों को बेसिक फोटो जनरेशन, वीडियो जनरेशन सिखाया जाएगा। ताकि वे अपने प्रोजेक्ट्स को एआई के जरिये तैयार कर सकें। अटल टिंकरिंग लैब सरकार की एक पहल है, जो नीति आयोग के तहत अटल इनोवेशन मिशन का एक हिस्सा है। इसका मुख्य उद्देश्य स्कूली छात्रों में नवाचार, रचनात्मकता और वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देना है।

क्या है AI की इस पहल का मकसद?

इसे तहत लैब में छात्रों को 3डी प्रिंटर, रोबोटिक्स किट और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण दिए जाते हैं। साथ ही छात्रों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और कोडिंग सीखने का भी मौका मिलता है। इस परियोजना का मकसद बच्चों में प्रॉब्लम सॉल्विंग स्किल और स्टार्टअप की मानसिकता को विकसित करना है। अटल टिंकरिंग योजना लैब वो जगह है जहां बच्चे सोचते हैं, बनाते हैं और सीखते हैं। यानि कि भविष्य के लिए इनोवेटर तैयार होते हैं।

अटल इनोवेशन मिशन क्या है (What is Atal Innovation Mission)

नीति आयोग और अटल इनोवेशन का एक बेस मॉड्यूल है।

एआई स्टेप अप मॉड्यूल (Who is CEO of Atal Mission)

Deepak Bagla दीपक बागला

अटल इनोवेशन योजना का बजट कितना है? (What is the budget of Atal Innovation Mission?)

400 Crore.

एडवांस लेवल पर सिखाया जाएगा AI (Artificial Intelligence in education)

यहां एआई एडवांस लेवल पर सिखाया जाएगा। इसमें एआई को पूरी तरह से प्रैक्टिकल एजुकेशन की तरह सिखाया जा रहा है। एआई दोनों ही तरह से प्रैक्टिकल और थ्योरोटिकल तरीके से बच्चों को सिखाया जाएगा। साथ ही शिक्षकों को भी प्रॉपर ट्रेनिंग दी जा रही है।

एआई सिखाने के साथ-साथ इसके खतरों के बारे में भी बच्चों को बताया जाएगा। बच्चों के अंदर बचपन से ही एआई की जरूरी स्किल्स डाली जा रही हैं। ताकि समय बीतने के साथ-साथ एआई सिर्फ एक सब्जेक्ट ही नहीं बल्कि बच्चों की मजबूत स्किल बन जाएं। साइंस और इनोवेशन में बच्चे जो एक्सपेरिमेंट करते आ रहे हैं वे अब एआई के जरिये करेंगे।

AI की मदद से मिलेगी प्रैक्टिकल स्किल

AI की मदद से मिलेगी प्रैक्टिकल स्किल

भारतीय स्कूलों के सामने चुनौतिया: (Challenges of Artificial Intelligence in India)

बच्चों को बचपन से ही एआई से जुड़ी सारी जानकारी दी जाएंगी किसी एक सब्जेक्ट की तरह। लेकिन ये सब सुनने और समझने में जितना आसान लगता है, जमीन पर इसे उतारना उतना ही मुश्किल है। जी हां! CBSE ने साल 2026 से स्कूलों में एआई को लेकर इस बड़े बदलाव की घोषणा तो की है मगर इस फैसले के सामने ढेर सारी चुनौतियां मुंह खोले खड़ी हैं। चलिये बात करतें हैं उन सभी चुनौतियों के बारे में...

  • हमारे देश में लगभग 1 करोड़ शिक्षक हैं और एक करोड़ शिक्षकों को एआई सिखाना अपने आप में एक चुनौती है।
  • स्कूलों को डिजिटल इंफ्रास्टक्चर चाहिए। बड़े प्राइवेट स्कूलों में तो ये संभव है मगर छोटे स्कूलों तक सुविधाएं पहुंचाना बेहद मुश्किल है।
  • छोटे शहरों में कहीं जगहों पर सड़कें तक नहीं आई हैं, ऐसे में वहां एआई जैसी बातें करना किसी सपने से कम नहीं लगता।
  • एआई के इस्तेमाल के लिए बच्चों के पास डिजिटल डिवाइसों का होना बेहद जरूरी है। मगर गरीब घर के बच्चों के पास ये सब सुविधाएं नहीं हैं।
  • ज्यादातर शिक्षकों को एआई की नॉलेज नहीं है। ऐसे में उन्हें पहले नए सिरे से एआई को सीखना होगा।
  • एथिकल डेटा कंसर्न भी बड़ी चुनौती है। क्योंकि एआई को लेकर आए दिन डेटा लीक की खबरें आती हैं।
हालांकि ओवरऑल मिशन का मकसद भारत को तरक्की की राह पर चलाना है। ऐसे में ये बड़ी पहल पूरे देश के लिए गेम चेंजर साबित हो सकती है। विदेशों की बात करें तो वहां स्कूलों में पहले ही एआई को शामिल किया जा चुका है मगर भारत में एआई को स्कूलों में शुरू से ही शामिल करने पर अभी विचार ही चल रहा है। लेकिन अगर भारत में स्कूली शिक्षा में एआई को शामिल कर दिया जाता है तो ये एक बहुत बड़ा कदम साबित होगा। क्योंकि अन्य देशों के मुकाबले भारत में स्टूडेंट्स की संख्या काफी ज्यादा है। ऐसे में भविष्य में एआई की मदद से स्कूली शिक्षा में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।
Kusum Bhatt
कुसुम भट्टauthor

टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बतौर एजुकेशन जर्नलिस्ट कार्यरत कुसुम भट्ट शिक्षा जगत से जुड़ी हर छोटी-बड़ी हलचल पर पैनी नजर रखती हैं। मास्टर्स इन मास कम्युनिकेशन की डिग्री प्राप्त करने के बाद वह पिछले 5 सालों से एजुकेशन बीट को मजबूती से संभाल रही हैं। कुसुम को खबरों को सबसे पहले ब्रेक करने, विषय की गहराई में जाकर स्टोरी तैयार करने और युवाओं को उनके करियर से जुड़ी सटीक जानकारी देने में विशेष दक्षता प्राप्त है। कुसुम की लेखन शैली संक्षिप्त, शोध आधारित और प्रभावशाली है। वे एग्जाम टिप्स, करियर गाइडेंस, सरकारी नौकरी से जुड़ी खबरें, बोर्ड रिजल्ट और सक्सेस स्टोरीज़ जैसे विषयों पर सटीक और भरोसेमंद कंटेंट तैयार करने के लिए जानी जाती हैं। कुसुम अबतक पांच हजार से अधिक बाइलाइन रिपोर्ट पब्लिश कर चुकी हैं। उन्हें ब्लॉगिंग, वेब स्टोरीज और ट्रेंडिंग एजुकेशनल टॉपिक्स पर काम करने का खास शौक है। उनका मानना है कि – "शिक्षा सिर्फ करियर का माध्यम नहीं, बल्कि सोच और समाज दोनों को बदलने की शक्ति रखती है।"

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