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Success Story: ठेले पर सब्जी बेचने वाले की बेटी बनी सिविल जज, कभी फीस भरने के नहीं थे पैसे

  • Authored by: कुलदीप राघव
  • Updated Oct 13, 2023, 08:43 AM IST

Ankita Nagar Success Story Who Become Civil Judge: आर्थिक तंगी के बीच कड़ी मेहनत कर सफलता हासिल कैसे की जाती है, संघर्ष कर रहे छात्रों को इंदौर की अंकिता नागर से सीखनी चाहिए। उनके पिता सब्जी बेचते हैं और घर में उनकी फीस भरने तक के पैसे नहीं। पिता का हाथ बंटाने के लिए अंकिता ने भी सब्जी बेची!

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Ankita Nagar Success Story

Ankita Nagar Success Story Who Become Civil Judge: गरीबी हौसले का गला नहीं घोट पाती है। अगर मेहनत और लगन सच्ची हो तो संसाधनों का अभाव भी सफलता के कदम नहीं रोक पाता है। इस बात को साबित कर दिखाया इंदौर की रहने वाली अंकिता नागर ने। इंदौर के मूसाखेड़ी रोड पर लक्ष्मी और अशोक नागर सब्जी का ठेला लगाते हैं। दोनों पति-पत्नी लंबे अर्से से इंदौर (Indore) की गलियों में सब्जी बेचते हैं। इन्हीं की बेटी हैं अंकिता नागर जिन्होंने जज बनकर मां बाप का नाम रोशन कर दिया। आर्थिक तंगी के बीच कड़ी मेहनत कर सफलता हासिल कैसे की जाती है, संघर्ष कर रहे छात्रों को इंदौर की अंकिता नागर से सीखनी चाहिए। उनके पिता सब्जी बेचते हैं और घर में उनकी फीस भरने तक के पैसे नहीं। पिता का हाथ बंटाने के लिए अंकिता ने भी सब्जी बेची!

Ankita Nagar Story: कभी फीस भरने के नहीं थे पैसे

अंकिता के माता पिता इंदौर के मूसाखेड़ी रोड पर लक्ष्मी और अशोक नागर सब्जी का ठेला लगाते हैं। जिस वक्त सिविल जज का परिणाम आया, अंकिता यहां सब्जी बेच रही थीं। सिविल जज बनी अंकिता ने बताया कि एक समय में हमारे पास फॉर्म भरने के लिए 800 रुपये नहीं थे। अंकिता शुरू से ही जज बनना चाहती थी। कॉलेज में एलएलबी की पढ़ाई के दौरान से ही वह तैयारी शुरू कर दी थी। मां-पिता के हाथ में काम बंटाने के लिए अंकिता भी सब्जी के ठेले पर पहुंच जाती थी। वह खुद सब्जी तौलकर ग्राहकों को देती थी, इससे मां-पिता को मदद मिल जाती थी। रिजल्ट आने के बाद उसने मां को ठेले पर ही जाकर बताई थी कि मैं जज बन गई हूं।

सपने पूरे करने को नहीं की शादी

अंकिता के बड़े भाई और छोटी बहन की शादी हो गई है लेकिन उन्होंने अपने सपने पूरे करने के लिए शादी नहीं की। अंकिता घर की आर्थिक स्थिति से वाकिफ थीं, इसलिए जब भी समय मिलता, वह माता पिता के साथ सब्जी बेचने का काम करतीं। 29 वर्षीय अंकिता नागर ने बताया कि सिविल जज भर्ती परीक्षा में तीन बार असफल होने के बाद भी मैंने हिम्मत नहीं हारी। संघर्ष कर रहे छात्रों के लिए अंकिता नागर मिसाल बनी है।

कुलदीप राघव
कुलदीप राघवauthor

कुलदीप राघव प्रिंट और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों से अधिक अनुभव का रखने वाले पत्रकार हैं। टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में वह एजुकेशन सेक्शन को लीड कर रहे हैं। एजुकेशन सेक्टर की गहरी समझ और लगातार फील्ड-ओरिएंटेड रिपोर्टिंग के कारण कुलदीप इस बीट के भरोसेमंद पत्रकारों में गिने जाते हैं। वे स्कूल और उच्च शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाएं, एडमिशन और काउंसलिंग प्रोसेस, स्कॉलरशिप, करियर गाइडेंस, जॉब अलर्ट, स्किल डेवलपमेंट और युवाओं से जुड़े सामाजिक-शैक्षणिक मुद्दों पर तथ्यात्मक और आसान भाषा में खबरें पब्लिश करते हैं। कुलदीप ने अब तक 18,000 से अधिक बाइलाइन स्टोरीज लिखी हैं, जिनमें कई एक्सक्लूसिव रिपोर्ट्स, विश्लेषण, डेटा आधारित रिपोर्ट्स और एक्सप्लेनर शामिल हैं।

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