Tractor Parade: 26 जनवरी को किसानों के ट्रैक्टर परेड के क्या हैं मायने, सही या गलत ट्रेंड

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Jan 25, 2021, 09:06 AM IST

26 जनवरी को दिल्ली की सड़कों पर किसान ट्रैक्टर परेड कर सकेंगे। लेकिन इसके साथ ही एक नई परिपाटी की शुरुआत होगी। सवाल यह है कि यह ट्रेंड कितना सही या गलत साबित होगा।

Tractor Parade: 26 जनवरी को किसानों के ट्रैक्टर परेड के क्या हैं मायने, सही या गलत ट्रेंड

नई दिल्ली। 26 जनवरी को देश राजपथ पर गणतंत्र की आन बान और शान का गवाह बनेगा तो दूसरी तरफ परेड खत्म होने के बाद एक और परेड का साक्षी बनेगा जिसे दिल्ली की सीमा पर डटे हुए किसान निकालेंगे। किसानों को शर्तों के साथ सिंघु बार्डर, टिकरी बार्डर और गाजीपुर बार्डर से परेड निकालने की अनुमति मिल गई है। किसान दिल्ली की सीमा में दाखिल होंगे लेकिन आउटर रिंग रोड पर परेड की इजाजत नहीं है। इन सबके बीच यह सवाल उठ खड़ा हुआ है कि जिस ट्रेंड की शुरुआत होने जा रही है वो कितना सही और कितना गलत है।
कई दौर की बातचीत के बाद परेड को मिली इजाजत
रविवार को दिल्ली पुलिस ने शाम में प्रेस कांफ्रेंस की थी और यह बताया कि 13 जनवरी से लेकर 17 जनवरी के बीच करीब 308 ट्विटर हैंडल अस्तित्व में आए जो पाकिस्तान से संचालित हो रहे थे और उनका मकसद किसानों को भ्रम में डालकर अव्यस्था फैलाने का था। इस तरह की चुनौतियों के बीच भी पुलिस ने किसानों के ट्रैक्टर परेड को निकालने की अनुमति दी है। लेकिन किसानों को तय रूट का ही पालन करना होगा। किसान अपने ट्रैक्टर परेड की शुरुआत गणतंत्र दिवस की परेड समाप्त होने के बाद करेंगे। किसानों की उस मांग को हरी झंडी नहीं दी गई जिसमें आउटर रिंग रोड पर परेड निकालने की मांग की थी। किसानों से इस संबंध में व्यावहारिक दिक्कतों को बताया गया और वो लोग अपनी मांग से पीछे हट गए।

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खालिस्तान राग एक बार फिर आया सामने
दिल्ली पुलिस की इजाजत मिलने के साथ ही यह साफ हो गया कि किसान सिंघु, टिकरी और गाजीपुर बार्डर से ट्रैक्टर परेड निकाल सकेंगे। लेकिन रविवार को जब लुधियाना से कांग्रेस सांसद रवनीत सिंह बिट्टू जब किसानों के धरने में शामिल होने के लिए पहुंचे तो उन्हें निशाना बनाया गया और रवनीत सिंह ने कहा कि ये तो खालिस्तानी समर्थक हैं। लेकिन उनके इरादे को नहीं तोड़ सकते। यही वो बिंदु था जो कई तरह के सवालों को जन्म दे गई। 

परेड को लेकर कई सवाल
पहला सवाल तो यही है कि क्या किसानों के आंदोलन को हाईजैक करने की कोशिश की जा रही है, क्या कोई ऐसा धड़ा है जो किसानों के नाम पर पूरे आंदोलन का फायदा उठाकर देश की छवि को खराब करना चाहता है। क्या कांग्रेस को इस बात का जवाब नहीं देना होगा किसानों के आंदोलन में कुछ असामाजिक तत्व हैं जिनके बारे में पहले भी चर्चा हुई थी। इन सबके बीच एक सवाल यह भी है कि क्या परेड की इजाजत आने वाले समय में सरकार और दिल्ली पुलिस के लिए मुश्किलों भरा होगा क्योंकि यहां से एक नई परंपरा की शुरुआत होने जा रही है। 

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