क्राइम

बठिंडा में बेटे ने पिता को मारी 3 गोलियां, सीने से हुई आर-पार; एम्स में भर्ती

पंजाब के बठिंडा में गेहूं की ब्रिकी को लेकर उपजे विवाद में बेटे ने अपनी लाइसेंसी रिवॉल्वर से पिता को तीन गोलियां मार दीं, जिससे वो बुरी तरह घायल हो गए। फिलहाल, बठिंडा एम्स में उनका इलाज किया जा रहा है।

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बठिंडा में बेटे ने पिता को मारी 3 गोलियां

बठिंडा : तलवंडी साबो उपमंडल के निकट कमालू गांव में रविवार को एक खेत में गेहूं की कटाई के दौरान पिता-पुत्र के बीच गेहूं बेचने को लेकर कहासुनी हो गई। इस दौरान गुस्साए बेटे ने अपनी लाइसेंसी रिवॉल्वर से पिता को तीन गोलियां मार दीं, जिनमें से दो गोलियां उसकी सीने में और एक जांघ में जा लगी। वारदात की सूचना मिलते ही स्थानीय हेल्पलाइन वेलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष बॉबी लेहरी अपने वालंटियर काला बंगी और रिंका मिस्त्री के साथ एंबुलेंस लेकर पहुंचे और घायल बुजुर्ग सुखपाल सिंह को सिविल अस्पताल रामां मंडी में भर्ती करवाया, जहां चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार देने के बाद उसे बठिंडा स्थित एम्स अस्पताल रेफर कर दिया।

इस बात को लेकर हुई बहस

घायल सुखपाल सिंह ने रामा पुलिस को दिए बयान में बताया कि वह गेहूं घर पर रखना चाहता था और उसका छोटा बेटा जगतार सिंह सारा गेहूं बेचने पर अड़ा था। इसी बात को लेकर बहस हो रही थी। तभी नाराज जगतार सिंह ने अपनी लाइसेंसी रिवाल्वर से उस पर तीन गोलियां चलाईं और मौके से फरार हो गया। मौके पर मौजूद परिवार के अन्य लोग बॉबी लेहरी की मदद से उन्हें अस्पताल ले गए। फिलहाल, बठिंडा एम्स में उनका इलाज किया जा रहा है।

इस संबंध में थाना रामा मंडी के थाना प्रमुख इंस्पेक्टर हरबंस सिंह ने बताया कि घायल सुखपाल सिंह के बयानों के आधार पर जगतार सिंह के खिलाफ हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। उसकी गिरफ्तारी के प्रयास जारी है।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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