Kanpur Encounter: पुलिस रेड के दौरान गई थी बिजली, तैयार थे 25-30 लोग, विकास दुबे ने भी की थी फायरिंग

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Jul 5, 2020, 12:24 PM IST

Vikas Dubey: कानपुर एनकाउंटर में 8 पुलिसकर्मियों की हत्या के मामले में कई नए-नए खुलासे हो रहे हैं। ये सामने आ रहा है कि छापेमारी से पहले विकास दुबे पर जानकारी पहुंच गई थी और वो अलर्ट हो गया था।

Kanpur Encounter: पुलिस रेड के दौरान गई थी बिजली, तैयार थे 25-30 लोग, विकास दुबे ने भी की थी फायरिंग
Photo Credit: ANI

कानपुर: 2 जुलाई की रात को कानपुर पुलिस चौबेपुर थाने के बीकरू गांव में रहने वाले हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे को गिरफ्तार करने जाती है। लेकिन उन पर हमला हो जाता है और इसमें 8 पुलिसकर्मी शहीद हो जाते हैं। विकास दुबे तभी से फरार है। उसकी खोज जारी है। पुलिस की कई टीमें विकास का पता लगाने में लगी हुई हैं। इस एनकाउंटर के बाद से ही कई बातें सामने आ रही हैं। पहले आया कि किसी पुलिस वाले ने भी विकास को छापेमारी की सूचना दे दी थी, जिससे वो पहले से अलर्ट था। इस संबंध में चौबेपुर के थानाध्यक्ष विनय तिवारी को निलंबित कर दिया गया है। उन पर मुखबिरी के आरोप लगे।

गांव की काटी बिजली

पुलिस की छापेमारी के दौरान विकास के गांव की बिजली काट दी गई थी। इससे गांव में घोर अंधेरा हो गया, जिससे पुलिस की मुश्किलें बढ़ीं। जिस समय पुलिस मौके पर पहुंची, उस समय बीकरू गांव की बिजली काट दी गई, इसके लिए जिम्मेदार शख्स से पुलिस ने पूछताछ की है। दरअसल, बिजली काटने के लिए फोन आया था, जिसके बाद लाइनमैन ने गांव की बिजली काट दी। छत्रपाल सिंह, ऑपरेटर, शिवली पावर सब-स्टेशन, कानपुर ने बताया, '3 जुलाई को मुझे चौबेपुर पावर स्टेशन से बीकरू गांव में बिजली काटने के लिए एक कॉल मिली, क्योंकि वहां बिजली लाइन खराब थी।' 

विकास दुबे ने की पुलिस पर फायरिंग

इसके अलावा पुलिस ने विकास दुबे के सहयोगी दया शंकर अग्निहोत्री को गिरफ्तार कर लिया है। उसने भी हैरान कर देने वाले खुलासे किए हैं। अग्निहोत्री ने बताया, 'पुलिस के आने से पहले उसके (विकास दुबे) पास पुलिस स्टेशन से एक फोन आया। इसके बाद, उसने लगभग 25-30 लोगों को बुलाया। उसने पुलिस कर्मियों पर गोलियां चलाईं। मैं मुठभेड़ के समय घर के अंदर बंद था इसलिए कुछ नहीं देखा।' 

इसके अलावा पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चला है कि 8 पुलिसकर्मियों की पुलिस के हथियारों से ही गोली मारकर हत्या कर दी गई। इन हथियारों को हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे और उसके गुर्गों ने लूट लिया था। ऑटोप्सी रिपोर्ट के अनुसार, कांस्टेबल जितेंद्र कुमार को एके-47 राइफल से गोलियां लगीं। डॉक्टरों ने उनके शरीर से कई एके-47 कारतूस बरामद किए। उन्हें पांच बार गोली मारी गई और दो गोलियां उनके शरीर से गुजरीं जिसका मतलब है कि उन्हें बेहद करीब से निशाना बनाया गया था। 

पुलिस के हथियार लूटे

पहली मुठभेड़ में अपराधी पुलिसकर्मियों के हथियार भी छीन ले गए, जिनमें एके-47 रायफल, एक इंसास रायफल, एक ग्लाक पिस्टल और दो नाइन एमएम पिस्टल शामिल थे। इस मुठभेड़ के कुछ घंटे बाद हुई दूसरी पुलिस मुठभेड़ में पुलिस ने दो अपराधियों को मार गिराया था और उनके पास से लूटी गई एक पिस्टल भी बरामद की थी।

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