माइक हेसन: महज 22 साल की उम्र में बन गए थे कोच, बताया कब होता है क्रिकेट नहीं खेल पाने का अफसोस 

आरसीबी के क्रिकेट निदेशक माइक हेसन ने बताया है कि उन्हें कब खुद के क्रिकेट नहीं खेल पाने का अफसोस होता है। 45 साल के हेसन ने महज 22 साल की उम्र में कोचिंग को बतौर करियर अपना लिया था।

Mike Hesson
माइक हेसन  |  तस्वीर साभार: Twitter

मुख्य बातें

  • आरसीबी के कोच माइक हेसन ने अपने कोचिंग करियर के बारे में कई बातें साझा की हैं
  • 22 साल की उम्र में ही क्यों और कैसे बन गए थे ओटागो के कोच
  • क्रिकेट में नहीं मिला मौका लेकिन कम उम्र में ही न्यूजीलैंड का अन्य खेल में किया प्रतिनिधित्व

दुबई: पिछले 12 साल से आईपीएल खिताब जीतने का इंतजार कर रही रॉयल चैलेंजर्स बेंगलोर(आरसीबी) की टीम के क्रिकेट निदेशक माइक हेसन ने कहा है कि खिलाड़ी से कोच बनने के बाद उन्हें सपाट विकेट देखकर क्रिकेट नहीं खेल पाने का अफसोस होता है। पीठ की चोट के कारण हेसन न्यूजीलैंड के लिए किसी भी स्तर पर क्रिकेट नहीं खेल पाए।

 45 वर्षीय हेसन ने महज 22 साल की उम्र में कोचिंग के साथ नाता जोड़ लिया था। वो साल 2003 में ओटागो की टीम के असिस्टेंट कोच बने थे इसके एक साल बाद उन्हें ओटागो का क्रिकेट निदेशक बना दिया गया। ओटागो के साथ उनका 15 साल का नाता रहा। अपने कार्यकाल में उन्होंने ओटागो की टीम की कायापलट कर दी और एक संघर्ष कर रही टीम को नियमित तौर पर खिताबी दावेदार टीम में तब्दील कर दिया। उनके दौर में ही ओटागा को 20 साल  लंबा खिताबी सूखा खत्म हुआ। 

6 साल तक रहे कीवी टीम के कोच
साल 2011 के विश्व कप में कीनिया की टीम का प्रदर्शन बेहद खराब था। ऐसे में हेसन 2012 में कीनिया के साथ दो साल के लिए बतौर कोच जुड़े लेकिन मई 2012 में उन्होंने पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद वो न्यूजीलैंड की टीम को कोच बन गए। साल 2018 तक वो टीम के साथ जुड़े रहे। उनके कार्यकाल में न्यूजीलैंड की टीम 2015 के विश्व कप के फाइनल में पहुंची। वो कीवी टीम के साथ सबसे लंबे समय तक बतौर कोच काम करने वाले व्यक्ति हैं। 

पीठ की चोट ने सबकुछ बदल दिया
आरसीबी द्वारा जारी एक वीडियों में हेंसन ने अपने कोचिंग के सफर के बारे में चर्चा करते हुए कहा, मेरी पीठ में शुरुआत में गंभीर चोट लग गई थी। लेकिन इसके बाद कम उम्र में ही क्रिकेट के निदेशक बनने का मौका मिला, जो वाकई में मेरे लिए सौभाग्यशाली अवसर था और मुझे यह बहुत पसंद आया। मुझे कोचिंग से बहुत लगाव है और विभिन्न स्तर पर काम करने के मुझे जो मौके मिले उन्होंने मुझे काफी अनुभव दिया।'

हेसन ने बतौर खिलाड़ी क्रिकेट नहीं खेल पाने पर अफसोस जाहिर करते हुए कहा, मुझे कई बार क्रिकेट नहीं खेल पाने का अफसोस होता है खासकर तब जब मैं सपाट विकेट देखता हूं। इसके अलावा मैं खुश हूं।


 
गैर-पेशेवर थे कीनिया के खिलाड़ी और बोर्ड 
 कीनिया की टीम का साथ उन्होंने सुरक्षा का हवाला देते हुए छोड़ा था लेकिन उस बारे में चर्चा करते हुए हेसन ने कहा, कीनिया के खिलाड़ी गैर पेशेवर थे। उनके यहां ऐसी सुविधाएं भी ऐसी थी जहां आपको अपने काम में लचीला रुख अपनाना पड़ता था।' हेसन ने अपनी घरेलू टीम के साथ बतौर कोच काम करने को विशेष अनुभव बताया। इस बारे में उन्होंने कहा, "मैं निश्चित तौर पर कीनिया की टीम को कोचिंग देना चाहता था। लेकिन अपनी घरेलू टीम के साथ जुड़कर अच्छा करना शानदार अनुभव था।"

बैडमिंटन में किया न्यूजीलैंड का प्रतिनिधित्व 
45 वर्षीय हेसन ने बताया कि उन्होंने अपने करियर के शुरुआती दौर में बैडमिंटन में भी अपने देश का प्रतिनिधित्व किया था। उन्हें भारत आने में खुशी होती है। उन्होंने कहा, निश्चित तौर पर मुझे क्रिकेट पसंद है लेकिन मुझे भारत में आना पसंद है।

आरसीबी की टीम अबतक एक बार भी आईपीएल खिताब नहीं जीत सकी है ऐसे में विराट सेना के खिताबी सूखे को खत्म करने की जिम्मेदारी अब हेसन के कंघों पर है। आरसीबी अपना पहला मैच 21 सितंबर को दुबई में सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ खेलने उतरेगी। 

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