Uttarakhand SIR News: उत्तराखंड में भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) अभियान के तहत मतदाता सूची का व्यापक पुनरीक्षण शुरू होने जा रहा है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने इसकी तैयारियां शुरू कर दी हैं, जिसमें इस साल की मतदाता सूची का 2003 की आधारभूत सूची के साथ मिलान किया जाएगा। यह कदम आने वाले चुनावों से पहले मतदाता सूची से सारी गलतियां हटाकर अपडेट करने के लिए उठाया गया है। इस अभियान को लेकर राजनीतिक दलों में हलचल तेज हो गई है और सभी पक्ष इसकी प्रक्रिया पर नजर रखे हुए हैं।
SIR अभियान का उद्देश्य
विशेष गहन पुनरीक्षण का मुख्य लक्ष्य मतदाता सूची से अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत और डुप्लीकेट मतदाता नामों को हटाना है, ताकि सूची पूरी तरह सटीक और पारदर्शी हो। राज्य में 2024 तक 83 लाख से अधिक मतदाता पंजीकृत हैं, और हाल के पुनरीक्षण में लाखों नए नाम जोड़े गए हैं। अब 2003 की मतदाता सूची के साथ तुलना कर पुरानी एंट्री की गहन जांच होगी, ताकि कोई भी पात्र मतदाता छूट न जाए।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय की तैयारियां
मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने SIR के लिए व्यापक तैयारियां शुरू की हैं। हाल ही में एक 'टेबल टॉप एक्सरसाइज' आयोजित की गई, जिसमें सभी जिलों के निर्वाचन अधिकारियों ने हिस्सा लिया। इस अभ्यास में दस्तावेज सत्यापन, दोहरी प्रविष्टियों को हटाने और नए मतदाताओं के नाम जोड़ने की प्रक्रिया का सिमुलेशन किया गया। कार्यालय ने बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) को प्रशिक्षण देना शुरू कर दिया है, जो घर-घर जाकर सत्यापन करेंगे। साथ ही, पुरानी मतदाता सूचियां डिजिटल रूप में वेबसाइट पर अपलोड की जा रही हैं। अधिकारियों के अनुसार, SIR की प्रक्रिया में प्रारूप मतदाता सूची का प्रकाशन होगा, जिसके बाद आपत्तियां दर्ज करने और उनका निपटारा करने का समय दिया जाएगा। अंतिम सूची के प्रकाशन से पहले सभी त्रुटियों को ठीक करने का लक्ष्य है।
राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया
SIR अभियान को लेकर सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों में चर्चा तेज हो गई है। सत्तारूढ़ दल ने इसे मतदाता सूची को पारदर्शी बनाने का स्वागत योग्य कदम बताया है, जबकि विपक्ष ने इसकी समयबद्धता और निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं। विपक्षी नेताओं का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में बीएलओ की कमी और जागरूकता की आवश्यकता पर ध्यान देना जरूरी है। कुछ दलों ने मांग की है कि अभियान में पात्र मतदाताओं के नाम हटने से बचाने के लिए पर्याप्त समय और संसाधन दिए जाएं। इसके लिए राजनीतिक दलों के साथ बैठकें आयोजित की जा रही हैं।
मतदाताओं के लिए जरूरी जानकारी
- नाम की जांच: मतदाता अपनी जानकारी राष्ट्रीय मतदाता सेवा पोर्टल (nvsp.in) या स्थानीय बीएलओ के माध्यम से सत्यापित कर सकते हैं।
- दस्तावेज जमा: नए मतदाता या सुधार के लिए आधार, जन्म प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेज 20 अगस्त 2025 तक जमा करें।
- आपत्ति दर्ज: यदि नाम गलत या छूट गया हो, तो फॉर्म-7 (हटाने के लिए) या फॉर्म-8 (सुधार के लिए) भरें।
- नया पंजीकरण: 18 वर्ष पूरे करने वाले युवा फॉर्म-6 के माध्यम से नाम दर्ज कराएं।
देश भर में SIR की कवायद
SIR अभियान देश के कई राज्यों में शुरू हो चुका है, जिसमें बिहार में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद प्रगति देखी गई है। उत्तराखंड के साथ-साथ पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम और केरल जैसे राज्य भी पहले चरण में शामिल हैं। यह अभियान 22 वर्षों में पहली बार इतने बड़े पैमाने पर हो रहा है, जिसका लक्ष्य देशभर की मतदाता सूची को त्रुटिरहित बनाना है।
