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Monsoon Tracker: अरब सागर और बंगाल की खाड़ी, मानसून की दोनों ब्रांच में क्या फर्क हैं? Explained

भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून से सिर्फ 4 महीने में ही पूरे सालभर की 70-80 फीसद बारिश हो जाती है। हिंद महासागर से उठने वाली मानसूनी हवाएं दो हिस्सों में बंटती हैं और पूरे देश को सराबोर करती हैं। चलिए जानते हैं मानसूनी हवाएं कैसे अपना पूरा रूट तय करती हैं -

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भारत में मानसून की दोनों शाखाओं से कैसे होती है बारिश?
Authored by: Digpal Singh
Updated Jul 8, 2026, 11:02 IST
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मानसून भारतीय धरती की पहचान है। मानसून के बिना भारत की कल्पना भी नहीं की जा सकती। मानसून के बिना भारतीय उपमहाद्वीप किसी तपती भट्टी से कम नहीं। मानसूनी हवाओं के साथ आसमान से बरसने वाली बूंदें ही देश को हरियाली, पीने के लिए पानी और इस पूरी धरा को जीवन देती हैं। भारत की अर्थव्यवस्था काफी हद तक मानसून पर निर्भर करती है। मई के अंतिम दिनों में हिंद महासागर से उठने वाली मानसूनी हवाएं जैसे-जैसे देश के दक्षिणी हिस्से से उत्तर की ओर बढ़ती हैं, वैसे-वैसे खुशियां भी बढ़ती जाती हैं। मानसून अपने साथ हरियाली और खुशहाली भी लेकर आता है। हालांकि, कभी-कभी लैंडस्लाइड और अन्य वर्षा जनित घटनाओं के जलते जानमाल का नुकसान भी होता है। लेकिन मानसून के बिना भारतीय उपमहाद्वीप सूखा रेगिस्तान और तपती भट्टी बन जाएगा।

मानसून भारत के लिए कितना महत्वपूर्ण है, इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वार्षिक वर्षा का 70-80 फीसद बारिश इसी मौसम में होती है। यानी जून से सितंबर के बीच ही अधिकतम बारिश हो जाती है। मानसून को दक्षिण पश्चिम मानसून भी कहा जाता है। इसकी दो शाखाएं (Branch) हैं। जिनमें से एक को अरब सागर शाखा और दूसरी को बंगाल की खाड़ी शाखा कहा जाता है। चलिए जानते हैं यह दोनों शाखाएं कैसे आगे बढ़ती हैं? इनमें क्या समानताएं और भिन्नताएं हैं? इसके साथ ही यह भी जानेंगे कि किस शाखा से किन राज्यों में बारिश होती है और किस शाखा के कारण बादल ज्यादा बरसते हैं?

हिंद महासागर से होती है मानसून की शुरुआत

जैसा कि हमने ऊपर बताया दक्षिण-पश्चिम मानसून की शुरुआत हिंद महासागर में होती है। इसकी अरब सागर और बंगाल की खाड़ी दो शाखाएं हैं और यह दोनों एक ही मानसून सिस्टम से जन्म लेती हैं। दोनों शाखाएं दक्षिण से उत्तर तक कई राज्यों, पर्वतमालाओं और दबाव क्षेत्रों को पार करते हुए पहुंचती हैं। अरब सागर वाली शाखा पश्चिमी घाट से टकराकर भारत के पश्चिमी तट पर भारी बारिश करती है। जबकि बंगाल की खाड़ी वाली शाखा म्यांमार होते हुए उत्तर-पूर्वी भारत में एंट्री लेती है और फिर हिमालय से टकराकर उत्तर-पश्चिम की ओर मुड़ जाती है।

मानसून की अरब सागर शाखा (Arabian Sea Branch)

मानसून की यही शाखा मई के आखिरी या जून के पहले हफ्ते में केरल तट पर टकराती है और इसी के साथ भारत की मुख्य भूमि पर मानसून की शुरुआत मानी जाती है। मुख्य भूमि पर आने के बाद यह शाखा तीन धाराओं में बंट जाती है। इसकी पहली धारा पश्चिमी घाट से टकराती है और पश्चिमी ढलानों पर मूसलाधार बारिश करती है। इसी धारा के चलते पश्चिमी महाराष्ट्र, गोवा, तटीय कर्नाटक और केरल के तटीय इलाकों में भारी बारिश होती है और इन दिनों महाराष्ट्र में हो रही बारिश के लिए यही धारा जिम्मेदार है। दूसरी धारा मुंबई और उत्तरी तट से टकराकर आगे बढ़ती है, जबकि तीसरी धारा सौराष्ट्र-कच्छ और राजस्थान में बारिश करती है।

अरब सागर शाखा कैसे आगे बढ़ती है

मानसून की अरब सागर शाखा के आगे बढ़ने के पीछे कारण गर्मियों में उत्तर-पश्चिमी भारत और थार मरुस्थल के ऊपर कम दबाव का क्षेत्र बनना है। कम दबाव का क्षेत्र बनने के चलते ही मानसूनी हवाएं यहां जमकर बारिश करती हैं। जब नम हवाएं अरब सागर को पार करती हैं तो वह बड़ी मात्रा में पानी लेकर आगे बढ़ती हैं। अपने इस आगे बढ़ने के क्रम में वह पश्चिमी घाट (महाराष्ट्र से केरल तक फैली पहाड़ियों) से एक सही एंगल पर टकराती हैं। पश्चिमी घाटी की ऊंची चोटियों को पार करने के लिए मानसूनी हवाएं ऊपर उठती हैं और इसी क्रम में वह अपने साथ लाई नमी को बारिश के रूप में पश्चिमी घाट के पश्चिमी ढलानों पर गिरा देती हैं। पश्चिमी घाट की ऊंची पहाड़ियों को पार करने के बाद मानसूनी हवाएं अपनी ज्यादातर नमी को खो चुकी होती हैं और सेंट्रल इंडिया व उत्तर-पश्चिमी भारत की ओर आगे बढ़ जाती हैं।

मानसून की अरब सागर शाखा का रूट

  • अरब सागर
  • केरल
  • कर्नाटक
  • गोवा
  • महाराष्ट्र
  • गुजरात
  • राजस्थान
  • पंजाब
देश में खुशहाली का प्रतीक है अच्छा मानसून

देश में खुशहाली का प्रतीक है अच्छा मानसून

मानसून की बंगाल की खाड़ी शाखा (Bay of Bengal Branch)

मानसून की यह शाखा भी हिंद महासागर में ही पैदा होती है और बंगाल की खाड़ी में मौजूद अंडमान निकोबार द्वीप होते हुए उत्तर-पूर्व की दिशा में आगे बढ़ती है। आमतौर पर यह मानसून मुख्य भूमि से पहले ही अंडमान-निकोबार पहुंच जाता है। आगे बढ़ते हुए यह शाखा म्यांमार और बांग्लादेश के तटों से होकर गुजरती है। अराकान पर्वतमाला और पूर्वी हिमालय से टकराने के बाद यह शाखा पूर्वोत्तर के राज्यों (मेघालय में मॉसिनरम (चेरापूंजी) में भारी बारिश करती है। इसके बाद आगे बढ़ते हुए जब यह शाखा हिमालय की विशाल दीवार से टकराती है तो हवाएं उत्तर-पश्चिम दिशा में मुड़ जाती है और फिर गंगा के मैदान (पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश) होते हुए हिमालय के समानांतर आगे बढ़ती हैं।

बंगाल की खाड़ी शाखा कैसे आगे बढ़ती है?

पहले से ही नम मानसूनी हवाएं जब बंगाल की खाड़ी के ऊपर से गुजरती हैं तो यहां से और भी ज्यादा नमी इकट्ठा कर लेती हैं। यहां यह पहली बार जमीन से अंडमान और निकोबार में टकराती हैं। इसके बाद उत्तर-पूर्व की ओर आगे बढ़ते हुए मानसूनी हवाएं नॉर्थ-ईस्ट में खासी, गारो और जयंतिया पहाड़ी श्रृंखलाओं से टकराती हैं। इस टकराव के कारण ही मॉसीनरम में जमकर बारिश होती है। इसी कारण मॉसीनरम को दुनिया में सबसे ज्यादा बारिश के लिए जाना जाता है। हिमालय के ऊंचे पहाड़ मानसूनी हवाओं को तिब्बत की तरफ जाने से रोकते हैं तो यह पश्चिम की ओर मुड़ जाती हैं। फिर यह गंगा-यमुना के मैदानी इलाकों को झमाझम बारिश से सराबोर करती हैं।

मानसून की बंगाल की खाड़ी शाखा का रूट

  • बंगाल की खाड़ी
  • अंडमान और निकोबार
  • उत्तर-पूर्वी भारत
  • पश्चिम बंगाल
  • बिहार
  • उत्तर प्रदेश
  • दिल्ली
  • पंजाब

यहां टकराती हैं मानसून की दोनों शाखाएं

मानसून की दोनों शाखाएं आगे बढ़ते हुए आखिरकार उत्तर-पश्चिमी भारत, मुख्य रूप से पंजाब और हरियाणा के आसपास टकराती हैं। इनके मिलने से इस पूरे इलाके में अच्छी बारिश होती है। जिससे यहां न सिर्फ गर्मी से राहत मिलती है, बल्कि फसलों को नई जान मिलती है। तालाब रिचार्ज होते हैं, ग्राउंड वाटर टेबल रीचार्ज होती है और प्राकृतिक जलस्रोतों को नया जीवन मिलता है।

मानसून की दोनों शाखाओं में क्या समानता है?

जैसा कि हमने बताया, यह दोनों ही शाखाएं दक्षिण-पश्चिम मानसून का ही हिस्सा हैं। दोनों की शुरुआत हिंद महासागर में होती है और भारतीय उपमहाद्वीप में प्रचंड गर्मी के कारण इस मानसूनी मौसम चक्र का निर्माण होता है। यह दोनों ही शाखाएं हिंद महासागर से नमी लेकर आती हैं और दोनों ही शाखाओं के चलते जून से सितंबर के बीच भारतीय उपमहाद्वीप में जमकर बारिश होती है।

मानसून की दोनों शाखाओं में कोई अंतर नहीं है। दोनों शाखाओं के कारण देश में अच्छी बारिश होती है। अरब सागर शाखा के चलते पश्चिमी घाट में भारी बारिश होती है तो बंगाल की खाड़ी शाखा के कारण उत्तर-पूर्वी राज्यों में जमकर मूसलाधार बारिश होती है। उत्तर पूर्व में मॉसिनरम दुनिया में सबसे ज्यादा बारिश के लिए मशहूर भी है।

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