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सवाल महापुरुष के बारे में था, लेकिन जवाब मोहल्ले की समस्याओं पर पहुंच गया, चर्चा का विषय बने छात्राओं के जवाब

सागर के एक्सीलेंस गर्ल्स कॉलेज में परीक्षा कॉपियों की जांच में हैरान करने वाला सच सामने आया है। सवालों के जवाब में छात्राओं ने मोहल्ले की समस्याएं लिख दीं और कई जगह सवालों को ही रिपीट कर दिया। अब मामला सामने आने के बाद कॉलेज और छात्राओं, दोनों के शिक्षण-शिक्षा पर सवाल उठ रहे हैं।

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आंसरशीट की जांच करती एक छात्रा

Sagar News: मध्य प्रदेश के सागर के एक कॉलेज में परीक्षा होती है, प्रश्नपत्र बांटे जाते हैं, छात्राएं उत्तर लिखती हैं। लेकिन उन उत्तरों का प्रश्नपत्रों के सवाल से कुछ लेना देना नहीं है। उत्तर में वे बताती हैं कि मोहल्ले की समस्याओं के बारे में बताती हैं या सवाल ही दोबारा लिख देती हैं और जब अंक कम आते हैं तो प्रदर्शन करने लगती हैं। इसकी पोल तब खुलती है जब कॉलेज परीक्षार्थियों को अपनी कॉपियां देखने के लिए बुला लेता है।

दरअसल मामला है सागर के एक्सीलेंस गर्ल्स कॉलेज का, जहां बीते 5 अक्टूबर को बीए प्रथम वर्ष की छात्राओं ने सड़क पर प्रदर्शन कर परीक्षा परिणाम पर सवाल उठाए थे। छात्राओं का कहना था कि 1300 परीक्षार्थियों में से 999 को सप्लीमेंट्री दे दी गई, जबकि 157 को फेल कर दिया गया। इसके बाद कॉलेज प्रबंधन ने छात्राओं को उत्तरपुस्तिकाएं दिखाने और उनकी आपत्तियों का समाधान करने के लिए बुलाया। सोमवार और मंगलवार को 1251 छात्राओं को कॉपियां देखने के लिए बुलाया गया लेकिन केवल 69 छात्राएं ही पहुंचीं। प्रशासन ने अभिभावकों के साथ आने की बात कही थी लेकिन केवल हैरानी की बात यह रही कि महज तीन छात्राएं ही माता-पिता को लेकर पहुंचीं।

आंसरशीट में लिखे मनमर्जी के जवाब

जब छात्राओं को उनकी कॉपियां दिखाई गई तो उनको शर्मिंदा होना पड़ा, कुछ उत्तरपुस्तिकाओं में लिखे जवाब अब चर्चा का विषय बन गए हैं। मसलन परीक्षा में सवाल था कि दीनदयाल उपाध्याय कौन थे? इस सवाल के जवाब में एक छात्रा ने लिखा कि दीनदयाल नगर में अधिक गंदगी रहती है। रात में कुत्ते भोंकते हैं, यहां लड़कियां सुरक्षित नहीं है। दीनदयाल नगर में सफाई होनी चाहिए। यानी सवाल महापुरुष के बारे में था, लेकिन जवाब मोहल्ले की समस्याओं पर पहुंच गया। वहीं, अंग्रेजी की कॉपियों में सवालों के जवाब लिखने के बजाय कई जगह सवाल ही दोहराए जाने की बात सामने आई।

कॉलेज पर भी उठ रहे सवाल

मामले को लेकर जब टाइम्स नाउ नवभारत ने कॉलेज के प्राचार्य डॉ.आनंद तिवारी से बात की तो उन्होंने कहा कि छात्राएं नियमित रूप से कॉलेज नहीं आतीं, जिसके चलते उनकी पढ़ाई प्रभावित होती है और सप्लीमेंट्री आने की स्थिति बनती है। जिसके चलते छात्राएं कुछ भी लिख कर कॉपी भर देती है। हालांकि, इतने बड़े स्तर पर छात्राओं के सप्लीमेंट्री आने के मामले में केवल छात्राओं की उपस्थिति को जिम्मेदार मानना पर्याप्त नहीं है। कॉलेज की शिक्षण व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे है। फिलहाल बड़ी संख्या में छात्राओं को सप्लीमेंट्री आने के बाद हुए प्रदर्शन के मामले में अब छात्राओं की उत्तर पुस्तिकाओं की जांच के बाद नए-नए कारनामे सामने आ रहे है।

Makarand Kale
मकरंद कालेauthor

सुखदुःखे समे कृत्वा लाभालाभौ जयाजयौ।\nततो युद्धाय युज्यस्व नैवं पापमवाप्स्यसि\n\nसाल 2008 में by chance journalist बना। 2013 से by choice journalist हूं। कहते हैं ना कि अच्छे काम में पहले बहुत परेशानियां आती हैं। और बाद में उसी की आदत पड़ जाती है।

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