प्रयागराज

अतीक के प्रयागराज ऑफिस में मिले खून के धब्बे, चाकू भी बरामद; असद एनकाउंटर की न्यायिक जांच शुरू

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Apr 24, 2023, 12:45 PM IST

Atiq Ahmed Murder Case: अतीक अहमद के बेटे असद के एनकाउंटर की जांच के लिए सरकार ने दो सदस्यीय न्यायिक जांच आयोग का गठन कर दिया है। यह जांच सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय के न्यायाधीश राजीव लोचन मेहरोत्रा और सेवानिवृत्त डीजी विजय कुमार गुप्ता को सौंपी गई है।

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अतीक-अशरफ हत्याकांड

Atiq Ahmed Murder Case: माफिया से नेता बने अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ हत्याकांड मामले में पुलिस की जांच जारी है। उत्तर प्रदेश पुलिस की एसटीएफ लगातार अतीक से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी कर रही है। इस बीच सोमवार को अतीक के प्रयागराज ऑफिस पहुंची पुलिस के होश उड़ गए। पुलिस को यहां खून के धब्बे और चाकू बरामद हुआ है।

इससे जुड़ा एक वीडियो भी सामने आया है। इसमें यूपी पुलिस के कुछ अधिकारी अतीक के प्रयागराज वाले दफ्तर में दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में जमीन पर एक चाकू भी पड़ा दिख रहा है। साथ ही कई जगह पर खून के धब्बे भी दिखाई दे रहे हैं। बता दें, बीते दिनों प्रयागराज में अतीक और अशरफ की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने हत्या के तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस को उनके दो मददगारों की तलाश है।

असद एनकाउंटर की जांच के लिए न्यायिक आयोग गठित

उधर, उत्तर प्रदेश सरकार ने अतीक अहमद के बेटे असद के एनकाउंटर मामले की जांच के लिए दो सदस्यीय न्यायिक आयोग का गठन किया है। बता दें, झांसी मुठभेड़ की जांच के लिए राज्य सरकार ने दो सदस्यीय न्यायिक जांच समिति के गठन की घोषणा की थी। सरकार की ओर से दो सदस्यीय जांच आयोग गठित किया गया है। इस आयोग की अध्यक्षता सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय के न्यायाधीश राजीव लोचन मेहरोत्रा करेंगे, इसके अलावा सेवानिवृत्त डीजी विजय कुमार गुप्ता भी आयोग में शामिल हैं।

झांसी में हुआ था असद का एनकाउंटर

उमेश पाल हत्याकांड में असद अपने सहयोगी गुलाम के साथ 13 अप्रैल को झांसी में उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स के साथ मुठभेड़ में मारा गया था। इसके बाद असद के एनकाउंटर पर कई सवाल खड़े हुए थे, जिसके बाद सरकार ने न्यायिक जांच कराने के आदेश दिए थे। बता दें, अतीक अहमद और अशरफ अहमद की सनसनीखेज हत्या की जांच के लिए भी दो विशेष जांच दल (एसआईटी) के गठन की घोषणा की गई है। इसके अलावा, राज्य सरकार ने इस हत्याकांड की जांच के लिए इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश (सेवानिवृत्त) अरविंद कुमार त्रिपाठी की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय न्यायिक जांच समिति बनाने की भी घोषणा की। इस समिति में सेवानिवृत्त न्यायाधीश बृजेश कुमार सोनी और पूर्व डीजीपी सुबेश कुमार सिंह शामिल हैं।
प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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