ग्रेटर नोएडा में 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की दर्दनाक मौत के मामले में जांच तेज हो गई है। इस केस में गिरफ्तार बिल्डर को बुधवार को अदालत ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। वहीं, विशेष जांच दल (SIT) ने लापरवाही के आरोपों के तहत नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों से घंटों पूछताछ की।
बिल्डर कोर्ट में पेश, जेल भेजा गया
पुलिस के मुताबिक, आरोपी बिल्डर अभय कुमार, जो एमजेड विज़टाउन प्लानर्स के निदेशक हैं, को सूरजपुर स्थित मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया गया। कोर्ट ने उन्हें दो हफ्ते की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। पुलिस ने बताया कि एफआईआर में नामजद लोटस ग्रीन्स से जुड़े एक अन्य बिल्डर की गिरफ्तारी के प्रयास भी जारी हैं।
फोरेंसिक टीम ने घटनास्थल से जुटाए सबूत
जांच के तहत बुधवार को फोरेंसिक विशेषज्ञों की टीम ने घटनास्थल से नमूने जुटाए। सेक्टर-150 में मौजूद सड़क और उससे सटे नाले की बारीकी से माप-जोख की गई, ताकि हादसे की असली वजह सामने आ सके।
नोएडा प्राधिकरण के अफसरों से लंबी पूछताछ
तीन सदस्यीय एसआईटी ने सेक्टर-6 स्थित नोएडा प्राधिकरण मुख्यालय में कई घंटे बिताए। इस दौरान वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ यातायात प्रकोष्ठ से जुड़े कनिष्ठ कर्मचारियों से भी सवाल-जवाब किए गए।
कैसे हुआ हादसा?
गुरुग्राम में काम करने वाले युवराज मेहता 16 जनवरी की रात घर लौट रहे थे। सेक्टर-150 में एक निर्माणाधीन स्थल के पास उनकी कार पानी से भरे गहरे गड्ढे में गिर गई। घने कोहरे के बीच पुलिस, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ ने बचाव की कोशिश की, लेकिन करीब दो घंटे तक मदद की गुहार लगाने के बावजूद युवराज को बचाया नहीं जा सका। इस दर्दनाक मंजर को उनके पिता राज कुमार मेहता ने अपनी आंखों के सामने देखा।
सरकार का सख्त कदम
घटना के बाद बढ़ते जन आक्रोश को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने नोएडा प्राधिकरण के सीईओ को हटा दिया है। साथ ही एसआईटी जांच के आदेश दिए हैं। वहीं, यातायात प्रकोष्ठ के एक कनिष्ठ अभियंता की सेवा समाप्त कर दी है।
किन धाराओं में केस दर्ज
पुलिस ने बताया कि बिल्डर के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 105 (गैर इरादतन हत्या), 106 (लापरवाही से मौत) और 125 (दूसरों की जान को खतरे में डालना) समेत अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।
