RG Kar Medical College rape case: आरजी कर मेडिकल कॉलेज रेप केस की सुनवाई अब कलकत्ता हाई कोर्ट में होगी। सुप्रीम कोर्ट ने इस केस का ट्रांसफर बुधवार को कलकत्ता हाई कोर्ट के पास कर दिया। 2024 में हुए इस रेप कांड ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। इस रेप एवं मर्डर कांड के खिलाफ देश भर में आक्रोश देखने को मिला और जगह-जगह विरोध प्रदर्शन हुए। शीर्ष न्यायालय ने खुद इस केस का संज्ञान लिया था। ट्रेनी डॉक्टर का शव नौ अगस्त 2024 को अस्पताल के सेमीनार रूम में मिला था। ट्रेनी डॉक्टर का रेप के बाद बेरहमी से उसकी हत्या कर दी गई। मामले में पुलिस ने आरोपी संजय राय को गिरफ्तार किया। निचली अदालत ने राय को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
कई मुद्दों की निगरानी कर रहा SC
शीर्ष अदालत मुख्य दोषसिद्धि के बाद भी, डॉक्टरों की अनधिकृत अनुपस्थिति को नियमित करने सहित कई सहायक मुद्दों की निगरानी कर रही है। मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए, पीठ ने पिछले वर्ष 20 अगस्त को इस अपराध के मद्देनजर चिकित्सा पेशेवरों की सुरक्षा और संरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक प्रोटोकॉल तैयार करने हेतु राष्ट्रीय कार्य बल (एनटीएफ) का गठन किया था। पिछले वर्ष नवंबर में, एनटीएफ ने अपनी रिपोर्ट में जो केंद्र सरकार के हलफनामे का हिस्सा थी कहा कि स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ अपराधों से निपटने के लिए अलग से किसी केंद्रीय कानून की आवश्यकता नहीं है।
पैनल ने कहा कि राज्य कानूनों में छोटे अपराधों से निपटने के लिए पर्याप्त प्रावधान हैं, जबकि गंभीर अपराधों के लिए भारतीय न्याय संहिता, 2023 के तहत प्रावधान मौजूद हैं।
माता-पिता को स्थिति रिपोर्ट की प्रति देने का भी निर्देश
न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने मामले के कागजात उच्च न्यायालय को भेजने का निर्देश दिया। न्यायालय ने मृतका के माता-पिता को स्थिति रिपोर्ट की एक प्रति देने का भी निर्देश दिया। स्नातकोत्तर प्रशिक्षु चिकित्सक का शव पिछले साल नौ अगस्त को अस्पताल के सेमिनार कक्ष में मिला था। कोलकाता पुलिस ने अगले दिन मामले के संबंध में नागरिक स्वयंसेवक संजय रॉय को गिरफ्तार किया था।
पश्चिम बंगाल में लंबे समय तक विरोध प्रदर्शन हुए
कोलकाता की एक निचली अदालत ने 20 जनवरी को रॉय को इस मामले में ‘आजीवन कारावास’की सजा सुनाई। इस अपराध ने पूरे देश में आक्रोश पैदा कर दिया था और पश्चिम बंगाल में लंबे समय तक विरोध प्रदर्शन हुए थे। मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए पीठ ने पिछले वर्ष 20 अगस्त को एक राष्ट्रीय कार्य बल (एनटीएफ) का गठन किया था ताकि अपराध के मद्देनजर चिकित्सा पेशेवरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक प्रोटोकॉल तैयार किया जा सके।
