Varanasi Ropeway Project: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में भारत के पहले अर्बन ट्रांसपोर्ट रोपवे प्रोजेक्ट पर काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत अब रोपवे का दूसरा चरण का ट्रायल रन शुरू हो चुका है। इसे दुनिया का तीसरा और भारत का पहला शहरी परिवहन रोपवे बताया जा रहा है। रोपवे के जल्द शुरू होने की उम्मीद है। इसके साथ ही वाराणसी नगर निगम शहर की संस्कृति और विरासत को खास अंदाज में दिखाने की तैयारी कर रहा है।
छतों पर दिखेगी काशी की पहचान
वाराणसी नगर निगम ने रोपवे कॉरिडोर के आसपास चुनी गई इमारतों की छतों पर चित्रकारी कराने के लिए ‘काशी टेरेस आर्टवर्क प्रोजेक्ट’ शुरू किया है। इस पहल के तहत 11,120.34 वर्ग मीटर क्षेत्र में छतों को सांस्कृतिक कलाकृतियों से सजाया जाएगा। न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक, नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने बताया कि इन चित्रों के जरिए काशी के पर्यटन स्थलों, सांस्कृतिक पहचान, खानपान और हस्तशिल्प को प्रदर्शित किया जाएगा। रोपवे से गुजरने वाले स्थानीय लोगों, श्रद्धालुओं और पर्यटकों को शहर की विरासत की झलक देखने को मिलेगी।
छतों पर दिखेंगे गंगा घाट, बनारसी पान और कचौड़ी
नगर निगम के मुताबिक, छतों पर गंगा के घाट, जलीय जीव, गंगा की डॉल्फिन और बनारस की खास पहचान से जुड़े चित्र बनाए जाएंगे। इनमें बनारस की चाय, गोलकी कचौड़ी, रबड़ी लस्सी, बनारसी पान और रिक्शे जैसे स्थानीय प्रतीक भी शामिल होंगे। नगर निगम का कहना है कि रोपवे से आसमान की ऊंचाई से शहर देखने वाले यात्रियों का स्वागत केवल सड़कों पर मौजूद लोग ही नहीं करेंगे, बल्कि रंग-बिरंगी छतें भी काशी की संस्कृति और जीवंतता को दर्शाएंगी।
पर्यटन और संस्कृति को जोड़ने की पहल
नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल के मुताबिक, इस परियोजना का मकसद शहर की पहचान को सुरक्षित रखते हुए लोगों को पर्यटन और संस्कृति से जोड़ना है। रोपवे कॉरिडोर के आसपास की छतों पर बनाई जा रही कलाकृतियों के जरिए काशी की परंपरा और आधुनिक परिवहन व्यवस्था को एक साथ प्रस्तुत करने की योजना है।
